कुल पृष्ठ दर्शन :

कर्म निभाती तत्पर

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला(मध्यप्रदेश)
*******************************************

नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता….

नारी तो नित शक्तिस्वरूपा, संघर्षी है नारी जीवन।
देकर इस जग को उजियारा, यश पाता है जीवन॥

कभी न खाती है भय नारी, हिमगिरि पर चढ़ जाती नारी,
गहरे सागर, आसमान में, मुक्त उड़ानें भरती नारी।
कर्म निभाती है वो तत्पर, हर बाधा से लड़ जाती,
अंधकार हो, मायूसी हो, तो भी आगे बढ़ जाती।
मातु, बहन, पत्नी है पावन, धर्म सुवासित नारी जीवन,
देकर इस जग को उजियारा, यश पाता है जीवन॥

न्याय, नीति सब नारी से हैं, संस्कारों का है मौसम,
पर्व करे नारी नित हर्षित, नीति-मूल्य सब हैं हमदम।
तूफानों से वह लड़ जाती, उल्काओं से नित भिड़ जाती,
वैसे तो वह अति कोमल है, पर वह ज़िद पर अड़ जाती।
लेकर एक सुनिश्चित दृढ़ता, ऊपर चढ़ता नारी जीवन,
देकर इस जग को उजियारा, यश पाता है जीवन॥

संग सदा उसके धोखा है, बढ़ने से उसको टोका है,
बंधन बाँधे हाथों में तो, पग की बेड़ी ने रोका है।
कहने को तो देवी कहते, पर सब कुछ है बेमानी,
अंगारों पर चलती हरदम, नारी की कोमल ज़िंदगानी।
अपने पावन भावों से नित देखो, मुस्काता है नारी जीवन,
देकर इस जग को उजियारा, यश पाता है जीवन॥

सदियों का है सफ़र कष्टमय, तो भी कभी न रुक पाई,
बहुत झुकाने की कोशिश की, कभी न तो भी रुक पाई।
शोषण से टकराती नित ही, संकल्पित वह रहती है,
पीड़ा का आँचल हो विस्तृत, तो भी जल-सी बहती है।
नारी जीवन सार यही है, हर्ष लुटाता नारी जीवन,
देकर इस जग को उजियारा, यश पाता है जीवन॥

परिचय–प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे का वर्तमान बसेरा मंडला(मप्र) में है,जबकि स्थायी निवास ज़िला-अशोक नगर में हैL आपका जन्म १९६१ में २५ सितम्बर को ग्राम प्राणपुर(चन्देरी,ज़िला-अशोक नगर, मप्र)में हुआ हैL एम.ए.(इतिहास,प्रावीण्यताधारी), एल-एल.बी सहित पी-एच.डी.(इतिहास)तक शिक्षित डॉ. खरे शासकीय सेवा (प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष)में हैंL करीब चार दशकों में देश के पांच सौ से अधिक प्रकाशनों व विशेषांकों में दस हज़ार से अधिक रचनाएं प्रकाशित हुई हैंL गद्य-पद्य में कुल १७ कृतियां आपके खाते में हैंL साहित्यिक गतिविधि देखें तो आपकी रचनाओं का रेडियो(३८ बार), भोपाल दूरदर्शन (६ बार)सहित कई टी.वी. चैनल से प्रसारण हुआ है। ९ कृतियों व ८ पत्रिकाओं(विशेषांकों)का सम्पादन कर चुके डॉ. खरे सुपरिचित मंचीय हास्य-व्यंग्य  कवि तथा संयोजक,संचालक के साथ ही शोध निदेशक,विषय विशेषज्ञ और कई महाविद्यालयों में अध्ययन मंडल के सदस्य रहे हैं। आप एम.ए. की पुस्तकों के लेखक के साथ ही १२५ से अधिक कृतियों में प्राक्कथन -भूमिका का लेखन तथा २५० से अधिक कृतियों की समीक्षा का लेखन कर चुके हैंL  राष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में १५० से अधिक शोध पत्रों की प्रस्तुति एवं सम्मेलनों-समारोहों में ३०० से ज्यादा व्याख्यान आदि भी आपके नाम है। सम्मान-अलंकरण-प्रशस्ति पत्र के निमित्त लगभग सभी राज्यों में ६०० से अधिक सारस्वत सम्मान-अवार्ड-अभिनंदन आपकी उपलब्धि है,जिसमें प्रमुख म.प्र. साहित्य अकादमी का अखिल भारतीय माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार(निबंध-५१० ००)है।