मिट्टी का दीपक

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************* मिट्टी का एक दीपकजलाओ कहीं,है अँधेरा बहुतजगमगाओ कहीं। घर किसी के दिवालीमनाओ कभी,साथ उनके रंगोलीबनाओ कभी। आसरा है कि कुछ मालउनका बिके,जाकर उनसे घरदीपक जलाओ कभी। जो सड़क के किनारेबसेरा करें,उनके संग तुम पटाखेचलाओ कभी। दीप का पर्व सबके,घर दीपक जले।हो उदासी जहाँ,तुम लगा लो गले॥

‘दीप’ सबके लिए…

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)************************************ दीपावली विशेष… आओ एक दीप जलाएँ, हर अँधेरा मिटाएँ,मन का मैल धोकर, हम सबको गले लगाएँ॥ न कोई ऊँचा है, न कोई नीचा यहाँ,हर दिल में बसता है, एक ही जहाँ।दीप नहीं पूछता, किसका है ये घर,उजाला सबका है, यही सबको बताएं।आओ एक दीप जलाएँ, हर अँधेरा मिटाएँ…॥ जो भूखा है … Read more

दीपक धीरे-धीरे जल

ममता सिंह ‘विशिष्ट’धनबाद (झारखंड)***************************** दीपावली तिमिर हरण,सनातन किया तेरा वरण। दीपक धीरे-धीरे जल,अंधेरे को हरता चल। तुझमें हैं वो दम-ख़म,तुझमे खो जाये तम। तिमिर विनाशक है तू,रास्ते दिखाता चल तू। दीपक धीरे-धीरे जल,बुराई को जलाता जल। जहाँ जब तक तू रहेगा,बुराई को जाना पड़ेगा। जहाँ भी तू नहीं रहेगा,वहाँ पर शैतान रहेगा। दीपक धीरे-धीरे जल,शून्य … Read more

मुझे ही जलने दो…

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)*************************************** हर घर उजियारा हो (दीपावली विशेष)… दीया जल रहा,उजाला महंगाई काहटा रहामगर, उसमें तेल हार्मज केकारण रुकावट डाल रहा। युद्ध कैसे रुके!सब कब्जा करने कीचाह में अटके हैं,तभी तो रिश्ते देशों केभटके हैं। यद्ध विभीषिका को कौनसुलझाए ?सब अपनी खेंच-तानी मेंलगे हुए हैं,जब संकट के बादलछाएंगेतभी देशों की दोस्तीसमझ पाएंगे। जलता … Read more

खुशियों के दीप जलाएं…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* हर घर उजियारा हो (दीपावली विशेष)… खुशियाँ बहुत हैं कम यहाँ,इसे यूँ ही मत जाने दोस्नेह और उमंग के संग हम,त्योहार हर्ष मनाएं,आओ, खुशियों के दीप जलाएं…। अँधेरा बहुत हो चुका जीवन में,अंतर्मन में उजास की ज्योति जलाहम पर्व और त्योहार मनाएं,आओ, खुशियों के दीप जलाएं…। दीप-पर्व आया, मन में … Read more

चलो चलें, कुछ कमाना है

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ********************************************** चलो चलें कुछ कमाना है,अपने दम पर जमाने कोकुछ नया कर दिखाना है,चलो चलें, कुछ कमाना है। किसी से हाथ जोड़कर नहीं,किसी से दया भाव लेकर नहींमेहनत ही मेहनत करते रहना है,पसीने से इतिहास लिख जाना है। अपने हालात पर हँसने वालों को,कुछ अनोखा कर दिखाना हैधन से नहीं, हमें … Read more

माँ तेरा जाना…

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* माँ, तेरा जाना आँखों में सावन भर जाता है,तेरे बिन हर कोना सूना-सूना हो जाता हैतेरे चरणों में जो सुख था, वह कहाँ से लाएँगे,अगले बरस फिर आना अम्ब, हम राह निहारेंगे। तेरी दिव्य ज्योति से माँ, घर-आँगन उजियारा है,तेरी कृपा से जिंदगी का हर संकट हारा हैजाओ माँ, … Read more

मन का आभूषण ‘अभिव्यक्ति’

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)**************************************** मन को सजाना ही आभूषण,स्त्रियों के लिएमन से दूर रखें- काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, अंहकार अपनेप्रेम, दया, क्षमा, ममता, धैर्य सौहार्द, मन के सच्चे गहने। पत्नी को परमेश्वर मानते,पति, पत्नी को सर्वप्रिये मानतेस्त्री का गहना ही पति होते।आभूषण वही जो पिया मन भाए,जो जीवनभर सुहागन को गहना पहनाए॥

खुशियों की रात

ममता सिंह ‘विशिष्ट’धनबाद (झारखंड)****************************** अमृत की रात (शरद पूर्णिमा विशेष)… आश्विन शरद पूर्णिमा की रात में अमृत की किरणे बरसाती है,पूर्ण चन्द्रमा की सोलह कलाएं रात में आज मिल कर चाँदनी फैलाती हैं। धार्मिक मान्यता हैं हमारी बरसों से,श्री कृष्ण वृन्दावन में रास रचाते हैं वृंदावन की गोपियाँ भी कृष्ण के संग में,हँसी-खुशी मिल नाचती-गाती हैं। खीर का … Read more

दिल एक खिलौना

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)**************************************** दिल एक खिलौना है,सच ही कहा है तुमनेइस संसार के खेल में,दिल को ही अपना मानते। संसार की माया के बीच में,दिल अनेक रंग दिखाताकाम क्रोध लोभ मोह,हर पल इसे बहकाते। ममता और अहंकार अपना घर बनाते,हर मानव के दिल में ये संसार बसेदिल तो मेरा है दिया तुम विश्वास में,अपनी … Read more