मिट्टी का दीपक
सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************* मिट्टी का एक दीपकजलाओ कहीं,है अँधेरा बहुतजगमगाओ कहीं। घर किसी के दिवालीमनाओ कभी,साथ उनके रंगोलीबनाओ कभी। आसरा है कि कुछ मालउनका बिके,जाकर उनसे घरदीपक जलाओ कभी। जो सड़क के किनारेबसेरा करें,उनके संग तुम पटाखेचलाओ कभी। दीप का पर्व सबके,घर दीपक जले।हो उदासी जहाँ,तुम लगा लो गले॥