मेरे बाबू जी… आधार स्तंभ थे
पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** मेरी असली प्रेरणा… आज मैं उम्र के छठे दशक में हूँ। मेरे बाबू जी वर्षों पहले भगवान को प्यारे हो चुके हैं। वह ज्यादा पढे नहीं थे, परंतु शिक्षा के महत्व को समझते थे। मैं अपने माता-पिता की ज्येष्ठ संतान हूँ, इसलिए लाड़-प्यार से मेरी झोली भरी हुई है। मेरे बाबू जी कड़क … Read more