मेरे बाबू जी… आधार स्तंभ थे

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** मेरी असली प्रेरणा… आज मैं उम्र के छठे दशक में हूँ। मेरे बाबू जी वर्षों पहले भगवान को प्यारे हो चुके हैं। वह ज्यादा पढे नहीं थे, परंतु शिक्षा के महत्व को समझते थे। मैं अपने माता-पिता की ज्येष्ठ संतान हूँ, इसलिए लाड़-प्यार से मेरी झोली भरी हुई है। मेरे बाबू जी कड़क … Read more

पहला हार्ट अटैक

शीला बड़ोदिया ‘शीलू’इंदौर (मध्यप्रदेश )*********************************************** तब की-पैड वाले फोन का चलन था। शाम को मेरा फोन बजा, पापा ने कहा “मेरी तबियत खराब है, भाई को लेकर जल्दी वैशाली नगर चौराहा डॉ. व्यास के यहाँ आ जाओ।”मैंने पूछा,” क्या हुआ पापा ?”बोले, “बस तुम लोग जल्दी आ जाओ। “  भाई ने फटाफट बाइक निकाली और … Read more

बचपन और आम का स्वाद

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* बचपन की गर्मियाँ आज भी मन में मीठी स्मृतियों की तरह बसी हुई हैं। जैसे ही विद्यालय की छुट्टियाँ होतीं, मन खुशी से झूम उठता था। तपती दोपहरी में भी हमें कोई थकान नहीं होती थी, क्योंकि आम के बागों की सैर हमारा इंतज़ार कर रही होती थी।गाँव के … Read more

भयावह ‘कोरोना’ काल…

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* सन् २०२० से २०२१ का वह कालखंड मानव इतिहास के सबसे भयावह और त्रासद समयों में से एक बनकर मेरी स्मृतियों में अंकित हो गया है। दिल्ली जैसे महानगर में रहते हुए मैंने जो देखा, वह केवल एक महामारी नहीं थी-वह जीवन, व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं की कठोर परीक्षा … Read more

शहतूत का पेड़

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* अबकी बार शहतूत का पेड़ झूमकर फूलों से लद गया था। हर टहनी, उपशाखाओं पर फूल ही फूल, ऐसा लग रहा था जैसे शहतूत ने फूलों के गजरे ही गजरे पहन लिए हैं। छोटे-छोटे अनगिनत फूलों ने शहतूत को जैसे लपेट लिया हो। वाह ! शहतूत बसंत का स्वागत करने का … Read more

मेरा बचपन और होली

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* गाँव का रहने वाला हूँ। गाँव में उस समय लोगों में बहुत प्रेम-भाव व सद्भाव था। छोटे, बड़ों का बहुत सम्मान करते थे। होली पर हुल्लड़ नहीं होती थी। बच्चे-जवान, बूढ़े सभी मर्यादा में रहते थे, और एक-दूसरे का सम्मान करते थे।हम बच्चे सालभर होली का इंतज़ार करते थे। मैं अपने … Read more

मेरी ‘प्रतीक्षा’ को अनंत कर गई सरल व्यक्तित्व

सपना सी.पी. साहू ‘स्वप्निल’इंदौर (मध्यप्रदेश )******************************************** ‘नित्य संदेश’ समूह की स्वामी, मुद्रक एवं प्रकाशक सदा लियाकत जी (मेरठ) का हृदयाघात से अचानक चले जाना केवल नित्य संदेश मीडिया कम्यूनिकेशन की क्षति नहीं है, बल्कि उस ममतामयी छाया का उठ जाना है, जिसने परदे के पीछे रहकर पत्रकारिता के स्तम्भ लियाकत मंसूरी को इतनी मजबूती दी … Read more

मैया का आगमन

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* कल गाँव से नाशिक की ओर आते हुए एक दिलचस्प और भक्तिभरा नजारा सामने आया। २१ सितम्बर से नवरात्री उत्सव शुरू हुआ है, तो सम्पूर्ण भारतवर्ष में माँ भगवती की प्रतिमा स्थापित करके ९ दिन भगवती के विविध रूपों का जागरण होगा और रास गरबा, डांडिया नाच के आयोजन से सारा … Read more

अविस्मरणीय बरसात

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* मैंने शासकीय महाविद्यालय गुना में बीएससी प्रथम वर्ष में १९७६ में प्रवेश लिया था। चूंकि, मैं छोटी जगह से जिला मुख्यालय पर पहुंचा था, तो काफी डरा हुआ था। संकोच में भी था, पर मैं पढ़ाई में बहुत अच्छा था, और अच्छे संस्कारों में पला था इसलिए मुझमें एक आत्मविश्वास भी … Read more

सुरमई भोर के साए में…

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* जब भी गाँव के खेत में जाता हूँ, हर बार प्रकृति अपने नये मनोरम और लुभावन अंदाज में नजर आती है। प्रकृति अपने मोहक बाहुपाश में मन को जैसे जकड़ लेती है कि प्रकृति के सानिध्य में हर लम्हा अनोखा और नया अनुभव देने वाला होता है। आज भली प्रातः के … Read more