व्हाट्सऐप:संवाद का अभाव पैदा कर रहा तनाव

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** व्हाट्सऐप पर आने वाले संदेशों ने लोगों के बीच ज्ञान की गंगा बहा दी है। इन संदेशों को पढ कर लोग बिना सोचे-समझे अपने को महाज्ञानी समझते हुए कई बार  अंधानुकरण भी करने लगते हैं। इसी लिए कई बार मजाक में लोग कह उठते हैं, कि “यह व्हाट्सऐप  यूनिवर्सटी का ज्ञान है क्या ?”   आजकल … Read more

सामने आते ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ के दुष्परिणाम

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** भारत सहित विश्व के अनेक देशों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ का चलन तेजी से बढ़ा है। आधुनिक जीवन-शैली, शहरीकरण, आर्थिक स्वतंत्रता, शिक्षा के विस्तार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बढ़ती अवधारणा ने इस व्यवस्था को समाज के एक वर्ग में स्वीकार्यता दिलाई है। ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ का मूल विचार … Read more

क्या ‘अंग्रेजी’ की पढ़ाई भारतीय भाषाओं को लील जाएगी ?

प्रवीण कुमार जैनमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* मेरी ये चिंताएँ केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक कड़वा धरातलीय सत्य हैं। जिन बिंदुओं को मैंने रेखांकित किया है, वे भारतीय समाज के ‘सांस्कृतिक आत्मसमर्पण’ की ओर संकेत कर रहे हैं। जिस गति से महानगरों में परिवारों ने मातृभाषा को ‘पिछड़ेपन’ की निशानी मानकर त्याग दिया है, वह स्थिति वास्तव … Read more

स्वर्ग है शाश्वत सुख और दिव्य चेतना का लोक

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* भारतीय वैदिक, पौराणिक एवं आध्यात्मिक परम्परा में ‘स्वर्ग’ केवल एक भौतिक स्थान नहीं, अपितु पुण्य, सदाचार, धर्म, न्याय, प्रेम और दिव्य चेतना का परम प्रतीक माना गया है। यह वह अलौकिक लोक है, जहाँ दुःख, क्लेश, रोग, शोक, भय और अभाव का प्रवेश नहीं होता। स्वर्ग को देवताओं का … Read more

नजरिया बदले मनुष्य

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ हर एक शब्द का अपना दृष्टिकोण होता है, वह अर्थ को भी व्यर्थ में बदलता है। ज़िन्दगी के इन २ पलों में सिर्फ ४ दिन ही मिलते हैं, और यहाँ जीवन, जो कभी भी रुकता नहीं है; वह तो अनंत यात्रा पर ही होता है। हम आज-कल की भाषा में … Read more

समय की मांग-प्रश्न पूछें और समाधान भी खोजें

ललित गर्गदिल्ली*********************************** कॉकरोच राजनीति…. भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यह केवल मतदान की व्यवस्था नहीं, बल्कि संवाद, सहमति, असहमति, संवैधानिक मर्यादाओं और सामाजिक उत्तरदायित्वों का एक सशक्त तंत्र है। लोकतंत्र की शक्ति विरोध में निहित है, लेकिन उसकी गरिमा विरोध की शैली, उद्देश्य और मर्यादा से निर्धारित होती है। हाल के दिनों में … Read more

स्वास्थ्य सबका अधिकार, तो ‘इलाज’ क्यों ‘बीमार’ ?

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* आज स्वास्थ्य पर सभी का अधिकार है, पर सबको अपार सुविधा नहीं मिलती है, जबकि यह मौलिक अधिकार है एवं सभी को सदाबहार सुविधा मिलनी चाहिए।    आज किसी गरीब को यदि बीमारी हो जाए, तो जीवन उसका नरक बन जाता है। पैसे की चिंता जीते-जी उसके प्राण हरती है। बड़े-बड़े लोग … Read more

कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** ज़िंदगी ने कदम-कदम पर इम्तिहान लिया। इतने कठिन इम्तिहान लिए, कि आज सोचती हूँ तो आश्चर्य होता है कि किस तरह से उन सब पर विजय प्राप्त की। कदम-कदम पर चुनौतियाँ आईं।    एक ऐसी लड़की… जिसके मायके में हर तरह की सुविधाएँ थीं… खाने-पीने की कोई तंगी नहीं थी। बहुत बड़ा … Read more

अद्भुत गूलर का फूल

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** नीम, पीपल और बरगद की त्रिवेणी की बात तो सबने ही सुनी होगी। इन पूजनीय वृक्षों की श्रंखला में एक और दैवीय वृक्ष है- गूलर (सिकामोर)। यह नवग्रहों के वृक्षों में एक प्रमुख वृक्ष है। दर्शन दुर्लभ होने के अर्थ में ‘गूलर का फूल होना’ मुहावरे को बचपन से प्रयोग करते रहे हैं।   … Read more

ईरान को कमजोर समझने का फल भुगत रहा अमेरिका

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अक्सर महाशक्तियाँ एक गंभीर भूल कर बैठती हैं—वे अपने प्रतिद्वंद्वी की सैन्य शक्ति को नहीं, बल्कि उसकी राजनीतिक इच्छाशक्ति, भूगोल, सामाजिक सहनशीलता और रणनीतिक क्षमता को कम आंक लेती हैं। २८ फरवरी २०२६ को ईरान के विरुद्ध अमेरिका और इज़राइल द्वारा शुरू किया गया सैन्य अभियान भी कुछ … Read more