पारंपरिक त्योहार या पर्यावरण से खिलवाड़

शीला बड़ोदिया ‘शीलू’इंदौर (मध्यप्रदेश )******************************************** दीपावली को दीपों की जगमगाहट, खुशी, प्रेम और रंग-बिरंगी सुंदर-सुंदर मिठाईयों के मनाया जाता है। इस त्योहार के पहले ही अपने घरों की साफ-सफाई की जाती है। घर के दरवाजे पर महालक्ष्मी और अतिथियों के स्वागत के लिए सुंदर, आकर्षक रंगोली बनाते हैं। अपने परिवार, पड़ोसियों और रिश्तेदारों को मिठाई … Read more

भारत के लिए ‘वीटो’ सहित स्थायी सीट आख़िर क्यों आवश्यक

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)*********************************** सोमश पर्वथनेनी ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जब तक वीटो का प्रावधान मौजूद है, तब तक सुधार के बाद बनने वाली परिषद के सभी स्थायी सदस्यों के पास यह अधिकार होना चाहिए। उनके मुताबिक़ बिना ‘वीटो’ वाले स्थायी सदस्यों की नई श्रेणी बनाना उन्हें व्यवहार में दूसरे दर्जे का … Read more

सदा संकल्प रहे ‘एकजुट भारत’ का

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)****************************** भारत देश की पहचान यहाँ की विविधता, संस्कृति और आपसी भाईचारा है। विविधता के बाद भी जो भावना हम सभी को एक सूत्र में बाँधती है, वह है-भारतीय होने का गर्व या हमारा देश प्रेम। ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना हमें सिखाती है, कि हमारी भाषा, वेशभूषा और जीवन-शैली भले अलग … Read more

मतदाता सूची:शुद्धता और लोकतंत्र में नागरिक का अधिकार आवश्यक

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)************************************ किसी भी कालखंड में लोकतंत्र की मजबूती केवल चुनाव कराने, सरकारें बनाने और सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं है। उसकी वास्तविक ताकत इस बात में निहित है, कि प्रत्येक पात्र नागरिक यानी आम आदमी को बिना किसी परेशानी यानी बाधा के अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अवसर मिले। मतदान का … Read more

भीड़ के बीच बिखरा भरोसा

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)*********************************** भारत ने स्वतंत्रता के बाद से कई बड़े राजनीतिक आंदोलन देखे हैं। उनमें से कुछ ने सरकारें हिला दीं, कुछ अख़बारों की सुर्ख़ियों में ही दम तोड़ गए। फ़र्क़ अक्सर एक ही बात से पड़ता था कि आम आदमी घर से निकला या नहीं। जे.पी. का आंदोलन हो, २०११ में अन्ना का … Read more

स्तरहीनता में उलझती कांग्रेस

ललित गर्गदिल्ली*************************** लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष एक-दूसरे के विरोधी अवश्य होते हैं, लेकिन उनकी भाषा शत्रुता की नहीं, वैचारिक प्रतिस्पर्धा की होनी चाहिए। राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र की शक्ति हैं, पर जब ये मतभेद व्यक्तिगत कटाक्ष, पारिवारिक टिप्पणियों और अपमानजनक शब्दों में बदलने लगते हैं, तब राजनीति का स्तर गिरता है और लोकतांत्रिक संस्थाओं की … Read more

भीतर का रावण मारें

शीला बड़ोदिया ‘शीलू’इंदौर (मध्यप्रदेश )******************************************** भीतर का रावण (विजयादशमी विशेष) … दशहरा हमें केवल रावण के पुतले का दहन करना नहीं सिखाता, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि हमारे भीतर छिपी बुराइयों को पहचानकर उन्हें समाप्त करना ही सच्चे अर्थों में विजयादशमी मनाना है।   रामायण में रावण के १० सिरों को प्रतीकात्मक रूप से … Read more

कठोर कार्रवाई और जवाबदेही भी तय हो

ललित गर्गदिल्ली*************************** कोलकाता में दुर्गापूजा के दौरान चोरबागान के सार्वजनिक पूजा पंडाल में हुई भगदड़ और उसमें १९ लोगों की मौत तथा २५ से अधिक लोगों के घायल होने की खबर ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। यह केवल हादसा नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक संवेदनहीनता, प्रशासनिक लापरवाही और धार्मिक आयोजनों के प्रति गैर-जिम्मेदार दृष्टिकोण … Read more

कृत्रिम मेधा:विकास में व्यावहारिक चुनौतियाँ

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)*********************************** कृत्रिम मेधा, यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.) आज दुनिया की सबसे तेज़ चलती तकनीकी दौड़ बन गई है। चैटबॉट से लेकर अस्पतालों तक और खेतों से लेकर बैंकों तक, हर जगह ए.आई. की चर्चा है। भारत इस दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहता और उसके पास इसके हुनर भी हैं। दुनिया के … Read more

सामाजिक सुरक्षा का कवच और समावेशी विकास का उजाला

ललित गर्गदिल्ली*************************** किसी राष्ट्र की प्रगति का वास्तविक मूल्यांकन केवल उसकी आर्थिक विकास दर, विशाल औद्योगिक परियोजनाओं, आधुनिक तकनीक, विदेशी निवेश और ऊँची प्रति व्यक्ति आय से नहीं किया जा सकता। विकास की सार्थकता तब सिद्ध होती है, जब समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी जीवन की अनिश्चितताओं से सुरक्षा मिले, श्रमिक … Read more