मुंशी प्रेमचंद की समकालीन प्रासंगिकता:बदलते भारत में साहित्य की नैतिक चेतना
डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************** भारतीय साहित्य के इतिहास में मुंशी प्रेमचंद का स्थान केवल एक महान कथाकार या उपन्यासकार के रूप में नहीं है, बल्कि वे भारतीय समाज की आत्मा के सबसे विश्वसनीय व्याख्याकार भी हैं। उन्होंने साहित्य को मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का उपकरण माना। प्रेमचंद का साहित्य भारतीय समाज की … Read more