हिंदी:वर्तमान स्थिति पर चिंतन जरूरी

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)************************************* हिन्दी दिवस (१४ सितम्बर) विशेष…    भारत के लिए उसके जन-सम्पर्क की भाषा यानी हिन्दी आज़ादी के ७९ वर्ष बाद भी उपेक्षा का शिकार है, क्योंकि इसे वह अधिकृत स्थान नहीं मिला है, जो कभी से दे दिया जाना था। हिंदी, जो संविधान की राजभाषा है और देश की सबसे बड़ी … Read more

कभी अस्त नहीं होता हिन्दी का सूर्य

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)*********************************** हिन्दी दिवस (१४ सितम्बर) विशेष… भाषा सिर्फ शब्दों का समूह नहीं होती, भाषा एक सभ्यता की आत्मा होती है और जब हम हिंदी की बात करते हैं तो हम सिर्फ एक भाषा की बात नहीं करते, जीवंत सभ्यता की बात करते हैं जो आज दुनिया के हर कोने में साँस ले … Read more

महादेवी जी में वेदना है, पर मीरा जैसा उद्दाम प्रेम प्रवाह नहीं

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)****************************** आधुनिक मीरा ‘महादेवी वर्मा’ (पुण्यतिथि विशेष)… महादेवी वर्मा को आधुनिक मीरा कहना तर्कसंगत है या नहीं, इस पर गहन रूप से विचार करना होगा, क्योंकि केवल एकांगी साम्य को देखकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं लगता।      जब हम मीरा बाई और महादेवी वर्मा की वेदना, दर्द के उद्गम स्त्रोत या उनके स्वरूप पर विचार … Read more

प्रकृति संरक्षण में मेरा योगदान

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)******************************* प्रकृति हमारी माँ के समान है और हमें जीने के लिए बहुत कुछ दिया है। हमें साँस लेने के लिए शुद्ध हवा, पीने के लिए पानी, भोजन के लिए फल और अनाज तथा रहने के लिए भूमि और घर मिले हैं।पेड़-पौधे, नदियाँ, पहाड़, पशु-पक्षी और अनेक प्राकृतिक संसाधन हमारे जीवन का … Read more

पर्युषण महापर्व:आत्मशुद्धि और मधुरता का अवसर

ललित गर्गदिल्ली***************************** पर्युषण पर्व (१४ सितम्बर) विशेष… जैन धर्म का प्रमुख आध्यात्मिक महाकुंभ पर्युषण महापर्व इन दिनों देशभर में त्याग, तपस्या, संयम, साधना और आत्मचिंतन के साथ मनाया जा रहा है। यह केवल ८ दिन तक चलने वाला धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मा को जगाने, जीवन को परिष्कृत करने और संबंधों को मधुर बनाने का … Read more

हर मोड़ पर हम शिक्षक और छात्र भी

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)****************************** मेरे भाग्य विधाता (शिक्षक दिवस विशेष )… भारतीय संस्कृति में गुरु को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है। पारंपरिक रूप से ‘शिक्षक’ शब्द सुनते ही कक्षा की दीवार पर लगा ब्लैकबोर्ड और उस पर चॉक से लिखती हुई किसी शिक्षिका या शिक्षक का चेहरा आँखों के समक्ष उभर आता है।  शिक्षक दिवस भी हम … Read more

कला, साहित्य और विद्यार्थी बनाम शिक्षक एवं पाठशाला

शीला बड़ोदिया ‘शीलू’इंदौर (मध्यप्रदेश )********************************************** मेरे भाग्य विधाता (शिक्षक दिवस विशेष )… भारतीय हिंदू धर्म और संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत गुरुकुल में ६४ कलाएं सिखाई जाती थी। वर्तमान समय में हम समझें और जानें भी कि ये कलाएं हमारे जीवन के हर पहलू से जुड़ी थी, जिनका हमारे जन्म से लेकर मृत्यु तक … Read more

समझें कृष्ण का प्रकृति प्रेम

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)****************************** जलवायु परिवर्तन, तापमान में वृद्धि, अनियमित मानसून, सूखते जलस्त्रोत और लुप्त होती  जैव-विविधता के रूप में पर्यावरण की मुश्किलें आज हमारी चर्चा का मुख्य विषय बन चुकी हैं। ऐसी स्थिति में भगवान् कृष्ण का जीवन दर्शन हमें सिखाता है कि प्रकृति के साथ संतुलन बना कर जीवन जीना किसी तरह का त्याग नहीं है, … Read more

शिक्षा नियुक्ति ही नहीं, मुक्ति का माध्यम बने

ललित गर्गदिल्ली***************************** शिक्षक दिवस (५ सितम्बर) विशेष… शिक्षक दिवस केवल शिक्षकों के सम्मान का अवसर नहीं, बल्कि भारत की शिक्षा-दृष्टि, शिक्षक की भूमिका और भावी पीढ़ी के निर्माण पर गंभीर आत्ममंथन का दिन है। किसी राष्ट्र का भविष्य केवल उसके विद्यालयों की संख्या, भवनों की भव्यता, पुस्तकों की उपलब्धता या परीक्षाओं के परिणामों से निर्धारित … Read more

काले कानूनों से कब मिलेगी पूरी मुक्ति ?

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)*********************************** अंग्रेज चले गए, भारत स्वतंत्र हो गया, लेकिन औपनिवेशिक दौर के अनेक कानून आज भी किसी न किसी रूप में मौजूद हैं। १५ अगस्त १९४७ को भारत ने राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त की, पर स्वतंत्रता के बाद अनेक पुराने कानून जारी रहे और समय-समय पर उनमें संशोधन हुए। समस्या तब पैदा होती … Read more