प्रेम-भावनाओं का केंद्र बिंदु ईश्वर ही

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* ‘प्रेम’ भावनाओं का केंद्र बिंदु है। ईश्वर भावनाओं से ही प्राप्त होते हैं। ईश्वर धन, दौलत और सम्पत्ति से प्रसन्न नहीं होते; धन-दौलत से अहंकार उत्पन्न होता है, और अहंकार ईश्वर को अप्रिय है।यह विचारणीय प्रश्न है, कि प्रेम कैसे प्राप्त हो। प्रेम में हार-जीत नहीं होती, केवल प्रेम होता है। … Read more

बमों की बौछार-बातों की बाज़ीगरी से वैश्विक व्यवस्था पर प्रहार

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** २८ फरवरी २०२६ की रात जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त हवाई हमले शुरू किए, तो यह पूरी वैश्विक व्यवस्था के लिए भूकंप था। हमले ईरानी सैन्य और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए, जिनमें सर्वोच्च नेता अली खामनेई और अन्य ईरानी अधिकारी मारे गए, और बड़ी संख्या … Read more

प्रकृति के महत्व को समझें, समझाएं

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** ‘पृथ्वी दिवस’ विशेष… हम सबको आने वाली पीढ़ी को पृथ्वी के महत्व को समझाना और बताना आवश्यक है। प्रकृति और पृथ्वी के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए २२ अप्रैल को ‘पृथ्वी दिवस’ (अर्थ डे) मनाया जाता है। हमें इसे एक दिन के स्थान पर परंपरा या आदत की तरह से मनाने … Read more

सपनों का बोझ या व्यवस्था की नाकामी!

ललित गर्गदिल्ली*********************************** कुरुक्षेत्र स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में २ महीने में ४ छात्रों द्वारा आत्महत्या की घटनाएं केवल एक संस्थान की त्रासदी एवं नाकामी नहीं हैं, बल्कि पूरे भारतीय समाज, शिक्षा व्यवस्था और हमारी सामूहिक संवेदनहीनता पर लगा गहरा प्रश्नचिह्न हैं। ये घटनाएं हमें झकझोरती हैं, कि आखिर वह कौन-सी परिस्थितियाँ हैं, जिनमें देश की … Read more

माँ-बहनों का सम्मान करो, वही असली पूजा

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** हमें कई बार वैष्णो देवी जाने का मौका मिला। दर्शन के पश्चात सात कन्याओं को पूजने के बाद भोजन करवाया जाता है। हर बार मैंने देखा कि दुकान वाला चुपचाप आकर उन लड़कियों से हलवा-पूरी ले जाता था, केवल पैसे लड़कियों के पास रह जाते थे। लड़कियों की अलग-अलग २-३ पालियाँ बनी … Read more

सोशल मीडिया: मिथक, विश्वास और भड़काव का महाजाल

पूनम चतुर्वेदी शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************** भारत एक ऐसी भूमि है, जहाँ आस्था केवल मंदिर की घंटियों या अज़ान की आवाज़ तक सीमित नहीं रही। वह अब स्मार्टफोन की स्क्रीन पर भी उतर आई है — कभी पूजा-पाठ के वीडियो के रूप में, कभी धार्मिक संदेशों की झड़ी के रूप में, और कभी ऐसे दावों के रूप … Read more

अलग अंदाज ने बनाया आवाज़ की दुनिया की मलिका

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ ‘गीत-संगीत की अमिट पहचान’ (स्व. आशा भोसले विशेष)… जब हिंदी फिल्मों में महान विभूतियों का दौर था, गीत-संगीत गायन में एक से बढ़कर एक उदाहरण श्रेष्ठता की पायदान पर थे। ऐसे समय आशा भोसले को बड़ी बहन की परछाईं माना जाता था। तब उन्होंने अपने अंदर छुपी प्रतिभा और अद्भुत … Read more

स्वर गंगा की चंचल लहरें थीं आशा जी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* ‘गीत-संगीत की अमिट पहचान’ (स्व. आशा भोसले विशेष)…     भारतीय संगीत आकाश का एक तेजस्वी नक्षत्र अस्त हो गया। आशा भोसले के निधन के साथ ही वह स्वर-युग समाप्त हो गया, जिसने दशकों तक श्रोताओं के हृदयों को मधुरता, चंचलता और भावों की अनंत गहराई से आलोकित किया।सन् १९३३ … Read more

ईरान युद्ध:अमेरिका व इजराइल का पीछे हटना विश्व के लिए जरूरी

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में पश्चिम एशिया एक बार फिर उस संवेदनशील मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है, जहाँ किसी भी प्रकार का सैन्य टकराव केवल क्षेत्रीय संकट नहीं रह जाता, बल्कि उसके प्रभाव पूरी दुनिया की शांति, अर्थव्यवस्था और मानव सुरक्षा पर पड़ते हैं। ईरान से जुड़े सैन्य तनाव और … Read more

गूँजती रहेगी सुरों की ‘आशा’

ललित गर्गदिल्ली*********************************** ‘गीत-संगीत की अमिट पहचान’ (स्व. आशा भोसले विशेष)… भारतीय संगीत का आकाश आज कुछ अधिक मौन, कुछ अधिक रिक्त प्रतीत होता है। स्वर की वह चंचल चिड़िया, जन-जन को चमत्कृत करने वाली आवाज जिसने दशकों तक हर हृदय में मधुरता के बीज बोए, आज भले ही भौतिक रूप से हमारे बीच न हो, … Read more