मुंशी प्रेमचंद की समकालीन प्रासंगिकता:बदलते भारत में साहित्य की नैतिक चेतना

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************** भारतीय साहित्य के इतिहास में मुंशी प्रेमचंद का स्थान केवल एक महान कथाकार या उपन्यासकार के रूप में नहीं है, बल्कि वे भारतीय समाज की आत्मा के सबसे विश्वसनीय व्याख्याकार भी हैं। उन्होंने साहित्य को मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का उपकरण माना। प्रेमचंद का साहित्य भारतीय समाज की … Read more

विकास और सिसकते पहाड़, चेतना होगा

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)********************************* भारत के पर्वतीय राज्यों जैसे- उत्तराखंड, हिमांचल प्रदेश, झारखंड, अरुणांचल प्रदेश, सिक्किम, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड, अरावली क्षेत्र (राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली) छत्तीसगढ़ के पठारी क्षेत्र, उड़ीसा के पूर्वी घाटी तथा दक्षिण भारत के पश्चिमीघाट के क्षेत्र आज जिस भू-स्खलन, दरकती पहाड़ियाँ, बाढ़, मिट्टी के कटाव, नदी तल के खिसकने और प्राकृतिक असंतुलन से जूझ … Read more

धुंधलाती गुरु-गरिमा को पुनः स्थापित करने का महापर्व

ललित गर्गदिल्ली******************************* जीवन निर्माता… (गुरु पूर्णिमा विशेष-२९ जुलाई)… भारतीय संस्कृति का प्राण यदि किसी एक तत्व में समाहित है, तो वह है-गुरु। गुरु केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाली चेतना है। वह मनुष्य के भीतर सोई हुई संभावनाओं को जगाता है, उसके व्यक्तित्व को संस्कारित करता है और उसे … Read more

जल संकट: असंतुलित प्रबंधन से अस्तित्व पर मंडराता खतरा

ललित गर्गदिल्ली******************************* जल केवल प्रकृति का उपहार नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के अस्तित्व का आधार है। पृथ्वी पर जीवन की कल्पना जल के बिना असंभव है, फिर भी विडंबना यह है कि जिस जल को हमारी संस्कृति ने देवत्व प्रदान किया, उसी के प्रति हमारा व्यवहार सबसे अधिक लापरवाह है। आज देश और दुनिया की … Read more

कमियाँ मिटाकर लौटाना होगा विश्वास

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)**************************************** ‘नीट’ विवाद-आंदोलन…    भारत के लिए कहा जाता है कि यहाँ युवा ही भविष्य है, पर ‘नीट’,  पेपर लीक और आंदोलनों के बीच सबसे बड़ा सवाल है कि – “क्या मेहनत अब भी सबसे बड़ा आधार है ?” यह कहना तर्कसंगत है, कि भारत में प्रतियोगी परीक्षाएं केवल एक परीक्षा नहीं, … Read more

स्वतंत्रता और मर्यादा का संतुलन आवश्यक

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रत्येक लोकतांत्रिक राष्ट्र की आधारशिला है। यह प्रत्येक नागरिक को अपने विचार, भावनाएँ, मत तथा रचनात्मक अभिव्यक्ति को निर्भय होकर व्यक्त करने का अधिकार प्रदान करती है। इसी स्वतंत्रता के कारण समाज में नवीन विचारों का आदान-प्रदान होता है, लोकतंत्र सशक्त बनता है तथा सामाजिक, सांस्कृतिक … Read more

सार्थक चिंतन की ओर बढ़ें

राधा गोयलनई दिल्ली*************************************** यह तो हमें ही तय करना है, कि हम केवल चिंतन की चिंता करते रहें या उस पर कुछ अमल भी करें ? जो करना है, उसकी केवल चिंता करने से तो काम नहीं होगा। काम तो अमल करने से ही होगा। कुछ लोग ऐसे हैं, जो समस्या पर सिर्फ चिंता ही … Read more

मन से अमीर रहिए

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)******************************************** सतरंगी दुनिया-३३… हमारे समाज को सब पता है कि कौन किसके साथ घूम रहा है, किसकी बहू, बेटी कहाँ जा रही है, और किसके बेटे का कहाँ लफड़ा है ?, लेकिन किसके घर आज खाना नहीं बना, ये समाज को नहीं पता और न ही जानना चाहते हैं। शेर … Read more

स्वप्रेरित प्रकटीकरण से होगा लोकतंत्र अधिक पारदर्शी

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************** सूचना का अधिकार अधिनियम… भारतीय लोकतंत्र ने ‘सूचना का अधिकार अधिनियम’ २००५ के माध्यम से नागरिकों को शासन में भागीदारी का एक ऐसा संवैधानिक औजार प्रदान किया, जिसने पहली बार यह स्पष्ट किया कि सरकारी सूचनाएँ सरकार की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि जनता की धरोहर हैं। यह कानून केवल सूचना प्राप्त … Read more

युवाओं को को बचना होगा नशे के जाल से

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** आजकल युवाओं में धूम्रपान और अन्य तरह के नशे का आकर्षण चिंताजनक रूप से  बढ़ता जा रहा है। इन किशोर एवं युवा बच्चों को इस तरह की हर चीज एक क्लिक पर मिल जाती है। ऐसी स्थिति में उनके मन में धैर्य और संयम जैसे शब्दों का उनके शब्दकोष में कोई स्थान नहीं होता। जरा-सी निराशा … Read more