नभ तक उत्सव की छटा
प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)************************************** रोशनियों के पत्र हैं, अब दीपों के नाम।पत्रों के मजमून में, खुशियों के पैग़ाम॥ फिर मुस्कानें पल रहीं, प्रमुदित है संघर्ष।महक रहे नव आस से, दिवस, मास, नित वर्ष॥ उल्लासित होने लगे, सारे ही कंदील।विश्वासों की महफिलों, लगतीं मीलों मील॥ नभ तक उत्सव की छटा, धरती पर आनंद।मायूसी का दौर अब, … Read more