विधु की शोभा निराली

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड)********************************** अमृत की रात…(शरद पूर्णिमा विशेष)…. शरद की पावन पूर्णिमा है,     विधु भरे सोलह कलायें।होगी कौमुदी सुकोमल पर,    किरणें व्याधि को जलायें॥आज विधु की शोभा निराली,सबके उर को हर लेगी।मनहर जुन्हाई क्षीरिका में,अमिय अमोलक भर देगी॥ उस पायेश का पान करके,   व्याधियाँ निर्मूल होंगी।तन में भरेगा बल अमिय का,     दौर्बल्यता धूल होंगी॥हो … Read more

रावण मारें हम भीतर का

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)************************************** भीतर का रावण (विजयादशमी विशेष) … लेकर नाम राम प्रियवर का।रावण मारें हम भीतर का॥ धर्म के पथ पर हम जाएँ,सदाचार को अपनाएँ।सकल कलुषता को धोकर,उज्ज्वल मन का जगत बनाएँ।हर पल भाये आज सहर का,रावण मारें हम भीतर का…॥ पुतले का तो व्यर्थ दहन हैसबसे पापी सबका मन है।झाँके क्यों नहिं … Read more

ज्योति जलेगी अब तो…

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)************************************* माँ की कृपा के रंग (नवरात्रि विशेष)… धर्म-सुरक्षा, न्याय बचाने के प्रति गुर्राई है।महिषासुर का वध करने को, दुर्गा माँ आई है॥ अंधकार में उजियारे की, ज्योति जलेगी अब तो,रीति-नीति की पावन बेला, नित्य जगेगी अब तो।वृत्ति तामसिक पराभूत हो, मंगल गाएगी,सद्भावों की पावन बेला, सबको भाएगी।छटा निराली शोभित होकर, अब … Read more

आओ! मातारानी के द्वार चलें

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)************************************** माँ की कृपा के रंग (नवरात्रि विशेष)… न और उदास हों, न अब और स्वयं को खलें।मिलेगा सुफल, आओ! मातारानी के द्वार चलें॥ अंधकार में और न भटकें, पावन पथ पर कदम बढ़ाएँ,कंटक राहों के मत देखें, पुष्पों से  उपवन महकाएँ।अब तो रीति-नीति के नग़मे, अपने अधर सजाएँ,मानवता के काम करें … Read more

जंगल की छटा निराली

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )****************************************** जंगल की तो बात निराली, सबके मन को भाये है‌।इसके हर कोने में देखो, पेड़ों के ही साये हैं॥ निकली है पर्वत से नदियाँ, कल-कल बहती रहती है,दुर्गम पथ पर चलते-चलते, एक कहानी कहती है।सूरज का प्रकाश अब देखो, पेड़ों से छनकर आये हैं,जंगल की तो बात निराली, सबके … Read more

मौन रहकर भी वो..

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)************************************** प्यार की लहरों में बहता डूबता वो जा रहा है।मौन रहकर भी वो कोई, गीत पावन गा रहा है॥ धड़कनों की आहटों से साज़ सजने लग गए हैं।उर में है नव राग,नेहिल भाव जगने लग गए हैं।है सुकोमल ताल, भीतर चेतना को भा रहा है,मौन रहकर भी वो कोई, गीत पावन … Read more

आँसू की मत बात हो

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)*************************************** चाहे मेरी जीत हो, होंठों पर तो गीत हो।जीवन तेरी प्रीति हो, खुशियों की तो रीति हो॥आँसू की मत बात हो, जीने की सौगात हो।मीठी-मीठी बात हो, दूरी पर ही रात हो॥ गहरा-गहरा काल है, देखो पैनी चाल है।जीवन तो बदहाल है, होता कहर बवाल है॥आँखें नित गमगीन हैं, साँपों की … Read more

सच्चा वादा-मानवता-पथ

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)**************************************** झूठे वादे कभी न करते, उनका खिलता जीवन। व्यथा, वेदनाएँ मिट जातीं, भरे हर्ष से तन-मन॥ सच्चा वादा मानवता-पथ, रीति-नीति सिखलाए,साँच-झूठ में भेद बताता, जीवन-सुमन खिलाए।सच्चाई को जो अपनाते, उनका महके आँगन। व्यथा, वेदनाएँ मिट जातीं,भरे हर्ष से तन-मन…॥ सच वादों की महिमा न्यारी, चमत्कार होता है,अनुपालन है जहाँ न्याय का, वहाँ सुयश … Read more

व्यथा, वेदनाएँ मिट जातीं

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)****************************************** अनाचार से जो भिड़ते हैं, उनका खिलता जीवन। व्यथा, वेदनाएँ मिट जातीं, भरे हर्ष से तन-मन॥ सदाचार है मानवता-पथ, रीति-नीति सिखलाए,साँच-झूठ में भेद बताता, जीवन-सुमन खिलाए।सदाचार को जो अपनाते, उनका महके आँगन,व्यथा, वेदनाएँ मिट जातीं, भरे हर्ष से तन-मन…॥ सदा कर्म की महिमा न्यारी, चमत्कार होता है,अनुपालन है जहाँ न्याय का, वहाँ … Read more

राधा-कृष्ण की अलौकिक प्रेम-लीला

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* राधा के दृग में प्रेम-ज्योति, श्याम अधर मुरली प्यारी,कुंज-निकुंज महके जैसे खिल उठी हो फुलवारी।हिय निकुंज प्रेम वह जिसमें स्वार्थ कहीं भी न ठहरे,जिसकी शक्ति से हार गई जग की हर अंधियारीf॥ श्याम-संग राधा खड़ी साहस की अमर कहानी,प्रेम जहाँ सम्मान सुरक्षित, पूजित होती नारी।अन्यायों के सिंहासनों को प्रेम सदा झुकवाता,करुणा, सत्य, समत्वबोध से होती  विजयज्ञ हमारी॥ मुरली मधुरा तान सुनाकर मोहन जग समझाते,राधा बनकर प्रेम-समर्पण के नव … Read more