जंगल की छटा निराली
डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )****************************************** जंगल की तो बात निराली, सबके मन को भाये है।इसके हर कोने में देखो, पेड़ों के ही साये हैं॥ निकली है पर्वत से नदियाँ, कल-कल बहती रहती है,दुर्गम पथ पर चलते-चलते, एक कहानी कहती है।सूरज का प्रकाश अब देखो, पेड़ों से छनकर आये हैं,जंगल की तो बात निराली, सबके … Read more