जीवन की दौड़…

प्रो. लक्ष्मी यादवमुम्बई (महाराष्ट्र)**************************************** जीवन की इस दौड़ में राही…तुझे अकेला चलना है। कहने को तो साथ हम हैं,तुझे किस बात का ग़म हैलेकिन इस जीवन की राह में…राही तुझे…

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सृजन का ऐसा मार्ग बनाना चाहिए, जो भारतीय संस्कृति की पुनः प्रतिष्ठा कर सके

सम्मेलन... इंदौर (मप्र)। हमें व्यक्तिगत लाभों से उठकर सृजन का ऐसा मार्ग बनाना चाहिए, जो भारतीय संस्कृति की पुनः प्रतिष्ठा कर सके। जब तक हम बौद्धिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं…

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साँसों का साथी…

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़)********************************************* वक्त साँसों का साथी उम्र भर बनके रहता,पर बुरा वक्त को ही आदमी दु:ख में कहता। कुछ बयां कर न सकता, पर करम कुदरती हैं,हर…

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‘पुस्तक बचाओ अभियान’ के लिए भेंट का आग्रह

दौसा (राजस्थान)। कई मित्र सफाई में साहित्य की अच्छी किताबें बेच देते हैं, उनसे निवेदन है कि साहित्य को जीवित रखने हेतु पुस्तकालय निर्माण यानि 'पुस्तक बचाओ अभियान' में सहभागी…

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मुहाफ़िज़

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* मुहाफिज़ पड़ा सो रहा रौशनी का।बड़ा दायरा हो रहा तीरगी का। फरेबो दगा आम इतना चलन में,भरोसा नहीं रह गया अब किसी का। दमन…

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शहर में मार्च में लघुकथा का राष्ट्रीय अधिवेशन

इंदौर (मप्र)। इंदौर में अगले महीने लघुकथा का राष्ट्रीय अधिवेशन होगा। इसमें देशभर से लघुकथाकारों और इस विधा के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाएगा।विचार प्रवाह मंच मंच की नई कार्यकारिणी…

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दानवीर कर्ण

रत्ना बापुलीलखनऊ (उत्तरप्रदेश)***************************************** निर्मल नीर के सरोवर तीर,बैठ तरूवर की छायाकर्ण कर रहा था ध्यान,त्याग वसुधा की माया। तभी दैदिप्यमान रवि,फैल गया चहुँ ओरस्वंय दिनकर खड़े,सामने उसके ठौर। दिनकर बोले-'हे…

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अध्यनरत विद्यार्थियों के लिए पुस्तक भेंट

रोहतक (हरियाणा)। रोहतक में प्रवास के दरमियाँ महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय का परिभ्रमण करके पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. सतीश मालिक से लेखक अभिषेक कुमार (आजमगढ़, उप्र) ने शिष्टाचार मुलाकात की और उन्हें…

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एक दुर्भिक्षुक

सच्चिदानंद किरणभागलपुर (बिहार)**************************************** सुचिभेद्य अंधकार को,भेदित‌ कर कलांतरसे दुर्भिक्ष को क्या पता ?कब कहां आराम है,या हो कोहराम…दुर्दिन के साए में,लिपटे खोज रहा!अपनी फूटी किस्मत पररो-रो पेट की,‌क्षुब्ध क्षुधा‌ मिटाने…

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बात उसी की होती है

अरुण वि.देशपांडेपुणे(महाराष्ट्र)************************************** घर बाहर हर ज़ुबान पर,बात उसी की होती हैघर आँगन में जब उसकी,चहल पहल-सी होती हैखुशबू-सी खिल उठती है। पैरों में जो पायल उसके,छुन-छुन आवाज करती हैमानो भोर…

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