हिमालय रक्षक

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)*************************************** है गिरिराज हिमालय बनकर चौकीदार खड़ा,रिपु किंचित आ नहीं सकता रक्षक बन अड़ा। भारत का है गौरव हिमगिरि मंगलगीत सुनाता,वन से भरा हुआ है हरीतिमा को बिखराता। हवा हमें सुहानी देता वनोपज से दुलराता,बना हुआ है प्यारा हरदम सबको ही भाता। पर्यावरण का रक्षक नित ही देता है साँसें,पर अब उसे … Read more

पापा, लौट आओ ना…

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ***************************************** पापा फिर से लौट आओ ना,अपने में मुझे फिर समेट लो नादुनिया की भीड़ में खो गया हूँ मैं, आपके बिना पापा हताश हो गया हूँ मैं।  आपकी फटकार में छिपा था प्यार,आपके वचनों में समाया था संसारआपके जाने के बाद संसार सूना है,हर खुशी अब अधूरी आपके बिना है। बहुत … Read more

नफ़रत की दीवार

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* नफ़रत की दीवार से, गिरा प्रेम का गेह।मन की कटुता छोड़कर, बरसाओ बस नेह॥ नफ़रत की दीवार अब मत रखन  परिवार।मिल-जुलकर सुख बाँटिए, प्रेम  रहे आधार॥ नफ़रत की दीवार जब, बढ़ती बारम्बार।क्षमा-दीपिका फिर जलें, मन का मिटे विकार॥ नफ़रत की दीवार को, प्रेम करे बेकार।मीठी वाणी से सदा, जीतो सबका प्यार॥ नफ़रत की दीवार बिन, जागे नव संसार।मानवता के फूल से, महके खुशी बयार॥ नफ़रत की दीवार से, टूटे सारे … Read more

हर मोड़ पर हम शिक्षक और छात्र भी

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)****************************** मेरे भाग्य विधाता (शिक्षक दिवस विशेष )… भारतीय संस्कृति में गुरु को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है। पारंपरिक रूप से ‘शिक्षक’ शब्द सुनते ही कक्षा की दीवार पर लगा ब्लैकबोर्ड और उस पर चॉक से लिखती हुई किसी शिक्षिका या शिक्षक का चेहरा आँखों के समक्ष उभर आता है।  शिक्षक दिवस भी हम … Read more

कला, साहित्य और विद्यार्थी बनाम शिक्षक एवं पाठशाला

शीला बड़ोदिया ‘शीलू’इंदौर (मध्यप्रदेश )********************************************** मेरे भाग्य विधाता (शिक्षक दिवस विशेष )… भारतीय हिंदू धर्म और संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत गुरुकुल में ६४ कलाएं सिखाई जाती थी। वर्तमान समय में हम समझें और जानें भी कि ये कलाएं हमारे जीवन के हर पहलू से जुड़ी थी, जिनका हमारे जन्म से लेकर मृत्यु तक … Read more

कुछ खट्टी-मीठी यादों के साथ श्रद्धासुमन

राधा गोयलनई दिल्ली************************************ मेरे भाग्य विधाता (शिक्षक दिवस विशेष )… हम भारतीयों के जीवन में गुरु का बहुत महत्व है। गुरु हमें उचित अनुचित का बोध कराते हैं। हर प्रकार की विधा में पारंगत करते हैं- फिर चाहे वो शस्त्र ज्ञान हो या शास्त्र ज्ञान। हमारे जीवन की लघुता को खत्म करके गुरुता से ऊर्जावान … Read more

सावन की रिमझिम रातें

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* सावन की रिमझिम रातें, मन में    रस घोल रही हैं,भीगी-भीगी चाँदनी, चुपके से कुछ बोल रही हैं। बादल की ओट में चंदा, जैसे लजाकर मुस्काए,पुरवाई की उँगली थामे, मन के तार झंकृत हो जाए। नीम तले टप-टप बूँदें, मधुरिम    गीत सुनाती हैं,सूनी पड़ी हुई गलियों में, स्मृतियाँ  लौट आती हैं। भीगी मिट्टी की खुशबू, साँसों में    उतर रही है,मन की सूनी चौखट पर, कोई    आस सँवर रही है। … Read more

विदेशों में भी धूम

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)******************************** हम सब हिन्दुस्तानी है, भाषा हमारी हिन्दी है,हम सब स्वाभिमानी हैं, शान हमारी हिन्दी है। हम सभी सदा एक हों, आन हमारी हिन्दी है,गौरव हमारी हिन्दी है, जान हम सबकी हिन्दी है। इसका प्रसार बढ़ाना है, लोगों को समझाना है,हिंदी में ही बात करें हम, हिन्दी को अपनाना है। चाहे घर हो … Read more

कलम की शक्ति

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************** जिसने आँसू को स्वर देकरपीड़ा को पहचान लिया,जिसने मौन खड़े लोगों कोबोलने का अधिकार दिया। गुमसुम घने अँधेरे पल कोजिसमें नवल प्रकाश दिया,सत्य मार्ग को पोषित करताजिसने सच्चा ज्ञान दिया। अन्याय हो रहे अंधी रातों कोजागृत पहरेदार दिया,जिसने रणभेरी बजते हीयोद्धा को तुरत जगा दिया। कलम उठे तो सत्य लिखे,कलम उठे तो … Read more