जब सिपाही ही चोर हो…

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** ‘जब सिपाही ही चोर हो’ यह वाक्य केवल एक मुहावरा नहीं, बल्कि किसी भी राष्ट्र-राज्य की आत्मा पर लगा वह गहरा घाव है, जो उसके संस्थागत ढांचे, नैतिक आधार और लोकतांत्रिक विश्वास को भीतर से क्षत-विक्षत कर देता है। आधुनिक राष्ट्रों की स्थिरता का आधार केवल उनकी सैन्य शक्ति, आर्थिक क्षमता … Read more

दिनकर प्रतीक सम्मान: श्रेष्ठ कविता संग्रह की प्रविष्टि आमंत्रित

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उज्जैन (मप्र)। व्यंग्य विधा के सशक्त हस्ताक्षर दिनकर सोनवलकर एवं सार्थक साहित्य लेखन कर अपने सम्पूर्ण जीवन को अनुकरणीय बनाने वाले प्रतीक सोनवलकर की स्मृति में दिनकर सृजन संस्थान द्वारा प्रत्येक वर्ष दिनकर प्रतीक सम्मान प्रदान किया जाएगा। इस सम्मान में हिंदी कविता के क्षेत्र में प्रकाशित श्रेष्ठ काव्य पुस्तक की प्रविष्टि १५ मई २०२६ … Read more

युद्ध विध्वंस

शीला बड़ोदिया ‘शीलू’इंदौर (मध्यप्रदेश )*********************************************** युद्ध और शांति-जरूरी क्या ?… युद्ध विध्वंस,बिखर गया सबउड़ा दी नींद। गोलियाँ सहे,आसमान जरियाहोते धमाके। गया अमनउजड़ा है चमनसब वीरान। आँखों में खौफ,आवाज़ें हैं डरातीबेचैन मन। चीख-पुकार,विलुप्त भूख-प्यासबेबस मनु। टूटी दीवारें,तबाही ही तबाहीकैसा मंजर ? लहू-लुहान,हृदय-विदारकविक्षत शव। मानव बना,मानव का दुश्मनविध्वंसक क्यों ? दया-करुणा,दुनिया से लुप्तप्रेम है कहाँ ? परिचय-शीला … Read more

धरती धरोहर

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** धरोहर में मिली थी हमेंमुस्कुराती हरी-भरी धरती,निर्मल वातावरण और प्राकृतिक संपदा से हमें संपन्न करती। प्रकृति के असीम उपवन कोस्वार्थ वश हमने क्षीण किया,हरितिमा की करुण पुकार कोनीरवता में परिवर्तित किया। विकास के उन्मत्त रथ परविनाश का ध्वज लहराया,कौन समझे यह मौन वेदनास्वार्थ ने सबको चुप कराया। न सोचा नवागंतुकों के विषय … Read more

किशोर आक्रामकता पर अंकुश आवश्यक

ललित गर्गदिल्ली*********************************** भारतीय किशोरों में बढ़ रही हिंसक प्रवृत्ति एवं क्रूर मानसिकता चिन्ताजनक है, नए भारत एवं विकसित भारत के भाल पर यह बदनुमा दाग है। कुछ समय से किशोरों में बढ़ती हिंसा की प्रवृत्ति निश्चित रूप से डरावनी, मर्मांतक एवं खौफनाक है। चिंता का बड़ा कारण इसलिए भी है, क्योंकि जिस उम्र में किशोरों … Read more

प्रकृति से ही प्रेरणा, उल्लास

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* प्रकृति ने ऐसी चाल चली,सूखी डाली फिर से लहलहाईहरियाली-सी छा गई,फूल खिले रंग-बिरंगे। खुशबू फैली चारों ओर निराली,वह पुरवाई भी तरसाईबागों में कलियाँ जब मुस्काईं,फिर मन झूमे, तन हँसे। अंग-अंग में सिहरन आए,लहलहाती तरुणाईरंग-बिरंगे सपनों ने डाले,खो गई ऐसी अलसाई। सबने जानी मदमाती, शर्माती,मुस्काती मस्तानी वसंत ऋतु आईआज अमराइयों में भी,महक … Read more

कमलेश पाठक को दिया ‘साहित्य भूषण सम्मान’

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दिल्ली। बीपीए फाउंडेशन व इंडिया नेटबुक्स द्वारा दिल्ली स्थित होटल में साहित्यकार सम्मान उत्सव आयोजित किया गया। वरिष्ठ कवयित्री व विविध भारती की पूर्व कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती कमलेश पाठक को प्रख्यात कथाकार हरिसुमन विष्ट, प्रख्यात व्यंग्यकार राजेश कुमार व नेटबुक्स की स्वामी डॉ. मनोरमा कुमार द्वारा इस समारोह में साहित्य भूषण सम्मान से सम्मानित किया … Read more

उच्च न्यायालय के फैसले अब हिंदी में भी

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प्रयागराज (उप्र)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने १६०वें स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर नई पहल शुरू की है। अब उच्च न्यायालय के फैसलों का हिंदी अनुवाद भी उपलब्ध कराया जाएगा। यह व्यवस्था १७ मार्च २०२६ से प्रयागराज स्थित प्रधान पीठ और लखनऊ खंडपीठ पर लागू कर दी गई है। अब ३ पृष्ठ या उससे … Read more

डॉ. हरीशकुमार सिंह को अ.भा. हिंदी साहित्य व्यंग्य लेखन पुरस्कार

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उज्जैन (मप्र)। साहित्य गरिमा पुरस्कार समिति (हैदराबाद) द्वारा वर्ष २०२५ का अखिल भारतीय श्री आचार्य कृष्णदन हिंदी साहित्य व्यंग्य लेखन पुरस्कार व्यंग्यकार और स्तम्भकार डॉ. हरीशकुमार सिंह को दिया जाएगा। समिति द्वारा डॉ. सिंह की कृति ‘चयनित व्यंग्य रचनाएँ’ का राष्ट्रीय स्तर पर चयन करते हुए यह निर्णय लिया गया है। पुरस्कार में ११ हजार … Read more

ज़िंदगी एक किताब

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* ज़िंदगी स्वयं की लिखी एक अनूठी किताब,प्रत्येक दिन हम संघर्ष करतेहर दिन एक नया पृष्ठ जोड़ते जाते,हर पृष्ठ अपनी-अपनी दास्तान सुनाते। कोई खुशियों का उपहार लाता,कोई दुखों का पहाड़ लाताकुछ दिल के टूटे अरमान, ख़्वाहिशें लाता,कुछ पृष्ठ बहुत सारी यादें, नए अनुभव को लाता। ज़िंदगी की किताब कभी दर्द,कभी वेदना, कभी … Read more