प्रकृति का आनंद

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** मैं चली अकेली,समुद्र के किनारे-किनारेरास्ता लम्बा अवश्य,किंतु लक्ष्य तय करना है। लकड़ी का सहारा,पथ परिक्रमा का साथीढलता सूरज निगाह रखता,पग में कहीं छाले न पड़ जाएइसलिए जल की लहरें कर देतीपग को शीतल। प्रकृति और इंसान का खेल,वर्षों से चला आ रहाजिसमें लोग साथ चलकर,ले रहे प्रकृति का आनंद।यही तो ईश्वर … Read more

‘बढ़ते कदम’ समारोह ८ को, पुस्तक लोकार्पण संग लघुकथा पाठ भी

hindi-bhashaa

भोपाल (मप्र)। लघुकथा शोध केंद्र समिति (भोपाल) एवं दिल्ली शाखा द्वारा अखिल भारतीय लघुकथा-पर्व ‘बढ़ते कदम’ का आयोजन किया जा रहा है। इस समारोह में भारतीय साहित्य के प्रतिष्ठित हस्ताक्षर बलराम जी अध्यक्षता करेंगे।सहयोगी संस्थान विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान (दिल्ली) से प्राप्त जानकारी के अनुसार मंचासीन अतिथियों में अतुल प्रभाकर, लक्ष्मीशंकर वाजपेयी, डॉ. अशोक भाटिया, डॉ. … Read more

कल्पकथा काव्य महाकुंभ होली महोत्सव में उड़े काव्य के रंग

hindi-bhashaa

सोनीपत (हरियाणा)। प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था द्वारा हिन्दी साहित्य की सेवा एवं सांस्कृतिक चेतना के संवर्धन हेतु पाँच दिवसीय (दस सत्रीय) कल्पकथा काव्य महाकुंभ-होली महोत्सव का सफल आयोजन किया गया। इसमें देश-विदेश के १५० से अधिक काव्य मनीषियों ने कार्यक्रम … Read more

तुम क्या कर सकते हो ?

डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्लइन्दौर (मध्यप्रदेश)***************************************** “अच्छा एक बात बताओ, तुम प्रेम की दीवानगी में मेरे लिए क्या कर सकते हो ?”“शायरी की भाषा में कहूं तो… आसमान का चाँद और सितारे तोड़कर तुम्हारी जींस और अपर में टाँक सकता हूँ!”“वाह… वाह! क्या बात है! अच्छा इसके अलावा…?”“इसके अलावा… तुम इस सारे ब्रह्मांड में मुझे सबसे … Read more

नारी दुर्गा स्वरूप

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** नारी अब केवल कोमल काया नहीं रह गई है,वह शक्ति का अद्भुत भंडार हो गई है। ममता, करुणा, प्रेम की मूर्ति के साथ-साथ,वह जीवन का आधार भी बन गई है। जब वह संसार में माँ का रोल निभाती है,तो अपने आँचल में पूरे जग को समेट लेती है। अपने सपनों को तो … Read more

होली का त्योहार रंगीला

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** होली का त्योहार रंगीला,लाल हरा नीला और पीला। होली का त्योहार रंगीला,बच्चों का संसार रंगीला। खुशियाँ लाए रंग-बिरंगी,पिचकारी में रंग पीला-नारंगी। दूसरों पर सब रंग उड़ेला,खुशी से मिलकर लगाए मेला। चेहरे पर जब गुलाल लगाए,शिकवा-शिकायत भूल जाए। असत्य पर सत्य की विजय,झूठ-फरेब से होती पराजय। ये त्योहार हमें यही सिखाए,दोस्त-दुश्मन गले मिल … Read more

अद्भुत सजा राम दरबार

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** जिस दिन राजतिलक होना था, बना उसी दिन वन का योग,सत्ता का कोई लोभ नहीं था, कभी नहीं चाहा उपभोग। इसीलिए तो राज्य को पाकर भी माता का वचन निभाया,रीत निभाने को रघुकुल की, राम ने वन का वास अपनाया। राजतिलक होना था जिस दिन, उसी दिवस वनवास था पाया,वैरागी के मन … Read more

कहे होलिका दहन-रंग दिलों में घुल रहे

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* आज होलिका दहन है, धर्म कर रहा राज।न्याय, सत्य मंगल लिए, मानवता का काज॥ जली होलिका पापमय, जीत गए प्रहलाद।हर दिल से मिटता रहा, सदा-सदा अवसाद॥ भव्य होलिक दहन है, नरसिंह की जयकार।रंग दिलों में घुल रहे, होली का त्योहार॥ कितना मन भाने लगा, अब यह मोहक पर्व।मान होलिका दहन का, … Read more

बिहार:सत्ता परिवर्तन विकास या विचलन!

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मोड़ उस समय सामने आया, जब राज्य के लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतिश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाने का निर्णय स्वीकार किया और इसके लिए नामांकन भी दाखिल कर दिया। उनके नामांकन के अवसर पर देश के गृह मंत्री का पटना … Read more

‘लघुकथा’ किसी क्षण को पकड़ कर अनुभूति से लिखी जाने वाली विधा

सीहोर (मप्र)। लघुकथा किसी क्षण को पकड़ कर अनुभूति से लिखी जाने वाली विधा है, जिसका आकार, प्रकार, भाषा, अनुभूति में लिप्त होती है। यह शब्दों का खेल नहीं, संकेत की भाषा है जो अंत में अपने पाठकों के दिल में छाप छोड़ जाती है।यह बात वरिष्ठ लघुकथाकार विजय सिंह चौहान (इंदौर) ने वक्ता के … Read more