आदेश जैन को दिया राष्ट्रभाषा सम्मान

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नागपुर (महाराष्ट्र)। प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा के संस्थापक कवि संगम त्रिपाठी व प्रदीप मिश्र ‘अजनबी’ (दिल्ली महासचिव) के मार्गदर्शन में नागपुर आकाशवाणी विभावरी के उद्घोषक, विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन के संयोजक व साहित्यिक मंच के संस्थापक आदेश जैन को सम्मानित किया गया। प्रेरणा राष्ट्रभाषा सम्मान में स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र आदि आदेश जैन को मेघा अग्रवाल … Read more

मेरी प्यारी माँ

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** एक चिट्ठी अब, मेरी माँ के नाम,जो करती रहती, घर के पूरे काम। सुबह से लेकर, रात तक लगातार,फिर करती है, मेरी माँ तब आराम। माँ से आती है, ममता की खुशबू,मेरी माँ बस, तू ही तू होती हर सू। तेरे आँचल में है, अपना बसेरा,तेरे सिवा नहीं है, कोई अब मेरा। … Read more

अगर ये  पंछी न होते तो…

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* पूर्वांचल पर भोर की लालिमा धूमिल हुई, तब उजियारे की नई आभा लेकर सूरज की कोर उभरने लगी है। भीषण गर्मी के दिन हैं, फिर भी सुबह की ठंडी हवा के झोंके कुछ यूँ छू रहे हैं, जिससे तन-मन प्रसन्न हुआ जा रहा है।   सामने इमली के पेड़ों में छिपकर एक भरद्वाज का … Read more

बिन श्रमिक विकास नहीं

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*************************************** मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)… जग के सपने साकार करते,दिन-रात करके दौड़ा करतेछैनी-हथोड़ा-फावड़ा थामते,इतर, उज्जवल रस भरते। पत्थर तोड़ते राह बनाते,मेहनत करके पसीना बहातेमेहनतकश, वतन सजाते,फिर भी जग से उपेक्षित रहते। सुबह सवेरे खेत जोतते,भूख-प्यास अनायास त्यागतेजग की खातिर अनाज उगाते,मेहनत फल, अंश मात्र … Read more

केवल रोटी…

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)… रचनाशिल्प:१०, ८, ८, ६ भूखा रहता है, दुख सहता है, केवल रोटी, पाना है।सुख से रहे स्वजन, शांत रहे मन, इसको जीवन, माना है॥ गिरता पड़ता है, फिर लड़ता है, श्रम से न कभी, वह थकता।रखता है हिम्मत, रही न … Read more

मजदूर नहीं, धरती की शान

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)… मजदूर नहीं, धरती की शान हैं,मजदूर नहीं, हम भी धरती के इंसान हैं। माना अपनी ज़िंदगी के कहाँ मालिक हम हैं,खुश हो जाते कम में भी, पर बहुत गम हैं। माथे पर पसीना आँखों में सपने हजार हैं,मिट्टी लगी है मुठ्ठी … Read more

गोष्ठी के साथ संग्रह ‘अजनबी शहर में’ पर हुई सार्थक चर्चा

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बंगलुरु (कर्नाटक)। शहर की अग्रणी साहित्यिक संस्था साहित्य साधक मंच का मासिक सारस्वत कार्यक्रम वरिष्ठ ग़ज़लकार सुरेंद्र कोहली सूरी की अध्यक्षता एवं वरिष्ठ कवि डॉ. जयसिंह अलवरी के मुख्याआतिथ्य में हुआ। कवि अर्जुन सिंह धर्मधारी एवं वरिष्ठ कवयित्री गिरिजा कुलश्रेष्ठ ने विशिष्ट अतिथि के रूप में गरिमा बढ़ाई।   प्रथम सत्र में गिरिजा कुलश्रेष्ठ द्वारा रचित … Read more

संघर्ष को कब दोगे सम्मान ?

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)…. श्रमिक मेहनत लगन और परिश्रम से,कर रहा अपना कामतुम उसे कम मत समझो, उसका संघर्ष मौन जरूर है। वह करता रहता मजदूरी,जीवन-यापन के लिएरुकना नहीं उसका काम,आज उसका संघर्ष मौन जरूर है। हाथों में छाले, पैरों में दर्द,लेकिन हिम्मत उसमें … Read more

मन कहता है…

राजबाला शर्मा ‘दीप’अजमेर(राजस्थान)******************************************* मन कुछ कहता है…(‘विश्व इच्छा दिवस’ विशेष)… मन की बातें सुनूँ कहाँ तक ?जाने वो क्या-क्या कहता है।अंतहीन आशाएं लेकर,हर पल निर्झर-सा बहता है॥ कहता कभी चाँद पे डोलूँ,पाखी-सा पंखों को खोलूँरहूँ घूमता आसमान में,मलयानिल साँसों में घोलूँ।बात किसी की न ये माने,अपनी मस्ती में रहता है।अंतहीन आशाएं लेकर,हर पल निर्झर-सा…॥ बात … Read more

अजीब है दुनिया

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** सतरंगी दुनिया-२१… अपनी ज़िंदगी को खुली किताब मत बनाइए, क्योंकि लोगों को पढ़ने में नहीं, बल्कि पन्ने फाड़ने में मजा आता है। खिचड़ी की विशेषता देखिए- अगर बर्तन में पकती है तो बीमार को ठीक कर देती है और दिमाग में पके तो इंसान को बीमार कर देती है।  … Read more