भाषा के माध्यम से ही संस्कृति और सभ्यता जीवित- श्री शेखावत

भारतीय भाषा संगम – २.०  केवड़िया (गुजरात)। भारतीय संस्कृति और भाषाओं के गहरे संबंध हैं। भाषा वह माध्यम है, जिसके माध्यम से संस्कृति और सभ्यता जीवित रहती है और पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती है। भारतीय साहित्य की लिखित एवं श्रुति परंपरा इस देश की अमूल्य धरोहर है।   केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने यह … Read more

डिग्रियों का मेला

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* आजकल की शिक्षा जैसे,एक बड़ा-सा मेला हैजहां बिकता है ज्ञान कम,बस डिग्रियों का रेला है।   किताबें लगती बोझ अब,नोट्स बने भगवानरटकर जो पूरा लिख पाए,वही बड़ा विद्वान।   गुरु भी जकड़े हुए आज,सिलेबस की जंजीरों मेंकिसी तरह बन जाए रिजल्ट कौन पड़े झमेले में ? माता-पिता की बस यही आस,बेटा उनका टॉप कर जाएक्या … Read more

जननी

डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्लइन्दौर (मध्यप्रदेश)***************************************** कुछ लोग कह रहे थे कि ‘शार्ट सर्किट’ से आग लगी और पड़ोसियों का कहना था कि कार की बैटरी अधिक चार्ज हो जाने के कारण आग लगी। पास में केमिकल का गोदाम था। आग ने ३ मकानों को लपेटे में ले लिया था। बड़ा ही हृदय विदारक दृश्य था। … Read more

बांधूँ धागा बरगद तरुवर

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* पति परमेश्वर तेरा पूजन, बांधूँ  धागा बरगद तरुवर,अमर सुहाग सदा मुस्काए, रहे  अटल यह नेह समुंदर। तुम जीवन मधुमीत मिलन हो, सजूँ नाम संजीवन प्रियवर,तेरे संग हर श्वास सुवासित, जैसे चंदन वन मन अंदर। वट-वृक्षों की छाँव तले जब सावित्री ने प्रण दोहराया,सत्यवान के प्रेम तपोबल ने मृत्यु-पथ भी शीश झुकाया। वैसा ही विश्वास हृदय में, वैसी ही निष्ठा का निर्झर,तेरे संग जीवन लगता … Read more

नारी का बदलता स्वरूप

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** वह नारी थी,छुई-मुई की तरह अपने में सिमटने वालीअंकुरित छोटे पौधे की तरह रखती थी मन में अनगिनत स्वप्न। उसने उपर उठने को,गर्दन उठायी ही थी किजीवन में चली जो कठोर हवाएँ, जो गर्माती थी उसके चेहरे को झुलसाती थीउसके अरमानों को हवा में,हल्के सूखे पत्तों की तरह उड़ा ले जाती थी।  पिता के आँगन … Read more

पीली हल्दी

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** पीली हल्दी सोहती,मेंहदी लगे हाथबेटी लाल जोड़े में,छूट रहा है साथ। घर में बेटी खेलती,घर करती आबादटुकड़ा मेरे जिगर का,लेकर चले दमाद। घर-आँगन सूना हुआ,सूना सब संसारआगे-पीछे घूमती,बेटी मेरा प्यार। कठिन समय है ब्याह का,माँ-पापा का प्यार।एक रात में बदलता,बेटी पर अधिकार॥

खुशियाँ बाँटिए

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* सुन लो खुशियाँ बाँटिए, तब पाओ आनंद।समझदार जो वे करें, यह संदेश पसंद॥ सुन लो खुशियाँ बाँटिए, तभी खिलेंगे फूल।हो जाएँगे राह के, दूर आज सब शूल॥ सुन लो खुशियाँ बाँटिए, तभी हाथ में हर्ष।दुआ मिले, शुभकामना, सुखद रहे हर वर्ष॥ सुन लो खुशियाँ बाँटिए, तभी बनेगी बात।अमन-चैन की हाथ में, … Read more

हवा भी छूने लगी नदी का बदन

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* हवा भी हौले से छूने लगी नदी का बदन,लहरों में भी होने लगी हलचल जैसे मेरे दिल ने महसूस की सूरज की पहली किरण,नदी में हलचल उठने लगी सजीव सी। उसका हृदय झंकृत हुआ, हुआ अजीब-सा,ऐसी मचली कि मदमस्त हो गई पागल-सी उसकी धाराएँ कभी लातीं मुस्कान, हँसने-सी,नदी यह चली हवाओं … Read more

‘डॉ. रामकुमार घोटड़ लघुकथा साहित्य सम्मान’ हेतु प्रविष्टि आमंत्रित

पूना (महाराष्ट्र)। ‘डॉ. रामकुमार घोटड़ लघुकथा साहित्य सम्मान’ २०२६ के लिए प्रविष्टि आमंत्रित हैं। वर्ष २०२५ में प्रकाशित लघुकथा विधा से संबंधित पुस्तक के लिए यह दिया जाएगा।        महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा पुणे द्वारा दिए जाने वाले इस पुरस्कार के बारे में अध्यक्ष डॉ. नीला बोर्वणकर ने बताया कि सम्मान के लिए महाराष्ट्र … Read more

….बिके तो सपनों का रक्त बहा

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* ‘नीट’ परीक्षा के प्रश्न बिके तो  सपनों का रक्त बहा,मेहनत करने वाला छात्र भीतर ही भीतर चुप रहा।रातों जागे नयनों प्रतिफल जब सौदे  में बँट जाता-विश्वासों का टूटा दर्पण अभिभावक ने स्वयं सहा॥ कितनी आशाओं के दीप उत्तर-पुस्तक संग बुझते,सच्चे श्रम के कोमल पौध भ्रष्ट हवाओं में झुलसते।धन के आगे ज्ञान झुके तो शिक्षा शव बन जाती … Read more