विकास की वातानुकूलित आत्महत्या
डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** मनुष्य बड़ा बुद्धिमान प्राणी है। इतना बुद्धिमान, कि उसने अपने जीवन को आरामदायक बनाने के लिए ऐसी-ऐसी चीज़ें बना डालीं, जिनसे अंततः उसका जीवन ही असुविधाजनक होने लगा। यह वही प्राणी है, जो पहले पेड़ के नीचे बैठकर ठंडी हवा खाता था, फिर उसने पेड़ काटकर वहाँ इमारत बनाई, इमारत गर्म … Read more