मोल समझ लो…
ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* दो जून की रोटी,बड़ी मुश्किल से है आईकड़ी मेहनत की पिता ने,थककर भी न ली अंगड़ाई। खून पसीना बहाकर,जोड़ी पाई-पाईदो जून की रोटी के लिए,हालातों से की लड़ाई। परिवार का करने पोषण,माँ ने बड़ी हिम्मत दिखाईचूल्हे में आग जलाकर,खुशी-खुशी रोटी पकाई। ख़ुद भूखी रहकर,सबको भरपेट खिलाई।किस्मत से मिलती है दो जून की … Read more