चाय का जादू चल जाता

डॉ. कुमारी कुन्दनपटना(बिहार)****************************** व्यवहार में चाय (राष्ट्रीय चाय दिवस विशेष)… मई-जून का गर्म महीना,गर्म हवा भी खूब सतातीउफ्, ओह सब हुए विकल,तन को चाहे झुलसाती। नींबू पानी और गन्ने का ज्यूस,छाछ, शिकंजी सबको भातीसबके अपने-अपने गुण हैं,पर संतुष्टि चाय से आती। हाड़ कंपाती ठंढक हो, फिर,जैसे बिस्तर पर आँख खुलीबड़ी मन को राहत दे जाती … Read more

बस चाय मिल जाए…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ व्यवहार में चाय (राष्ट्रीय चाय दिवस विशेष)… हर कोई इसका है दिवाना,मेल-मिलाप का ‘सीधा’-सरल खजानाइसके लिए कोई नहीं करता मना,बस चाय मिल जाए, सुबह-शाम-दोपहर…। एक ‘प्याली’ इसकी, पीते ही सुकून आ जाए,घर हो, बाजार या आफिस-दुकान, हर जगह मिल जाएचाय व्यवहारिक जीवन में, आपसी तालमेल है बढ़ाए,बस चाय मिल जाए, … Read more

बमों की बौछार-बातों की बाज़ीगरी से वैश्विक व्यवस्था पर प्रहार

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** २८ फरवरी २०२६ की रात जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त हवाई हमले शुरू किए, तो यह पूरी वैश्विक व्यवस्था के लिए भूकंप था। हमले ईरानी सैन्य और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए, जिनमें सर्वोच्च नेता अली खामनेई और अन्य ईरानी अधिकारी मारे गए, और बड़ी संख्या … Read more

मन रे तू काहे न धीर धरे

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* जब-जब जीवन राह गहन विपदाओं का तम छाए,टूटे स्वप्न-वेदना अंतर्मन को खूब सताए।धैर्य दीप बन जलता तो संकट खुद ही हट जाए,मन रे मन रे तू काहे नहीं, काहे न धीर धरे॥ सुख-दुख दोनों जीवन के हैं दो पल के आने-जाने,आज धूप तीखी ज्वाला, कल छाया शीतल पाने।जो स्थिर … Read more

‘अयोध्या पर्व’ में बही ‘वयम’ की काव्य सरिता

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नई दिल्ली। श्री अयोध्या न्यास द्वारा आयोजित धर्म, संस्कृति और लोक परम्परा के उत्सव ‘अयोध्या पर्व-२०२६’ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (जनपथ, दिल्ली) में साहित्यिक संस्था वयम् की काव्य गोष्ठी का एक और उत्कृष्ट कार्यक्रम हुआ। वरिष्ठ साहित्यकार बालस्वरूप ‘राही’ की अध्यक्षता में इसमें काव्य की पावन सरिता बही, जिसमें देश के युवा व वरिष्ठ … Read more

इतिहास में तथ्यों की प्रामाणिकता जरूरी-डॉ. सिंह

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भोपाल (मप्र)। ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ कविता में लिखे गए उपन्यास हैं। रामायण योजनाबद्ध तरीकों से लिखा गया सुसंगठित समाज है, जबकि महाभारत में आपको भटक जाने का पूरा-पूरा खतरा है। यदि लेखक इतिहास की तरफ जाता है। इतिहास को शामिल करता है तो तथ्यों की प्रमाणिकता जरूरी है। वरिष्ठ कवि-आलोचक डॉ. विजय बहादुर सिंह ने … Read more

‘सृजनाभिनंदनम् ४’ में विशिष्ट अतिथि निदेशक डॉ. मीनू पांडेय

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भोपाल (मप्र)। वाङ्गय कला संगम (गुरुग्राम, हरियाणा) द्वारा ‘कृतिभिनंदनम् ४’ (साहित्य सिनेमा थिएटर कला) का आयोजन २५ अप्रैल को प्रातः १० बजे दिल्ली स्थित हिंदी भवन (११, विष्णु दिगम्बर मार्ग (राउज एवेन्यू), निकट बाल भवन) में रखा गया है। संगम के संस्थापक-अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार सिंघल व संरक्षक डॉ. राकेश छोकर ने बताया कि विशिष्ट … Read more

गुण और गुनाह दोनों की ही कीमत

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** संतरंगी दुनिया-२०…         यदि आप अपनी पत्नी को खुश रखना चाहते हैं तो अपने पर्स का मुँह खुला रखें और अपना मुँह बंद रखें। वक़्त बदल गया है, पहले लड़कियाँ सफेद घोड़े पर राजकु‌मार की कल्पना किया करती थी, आजकल बीएमडब्ल्यू में गधा भी आ जाए … Read more

कैसी है जीवन की पहेली ?

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** कैसी है ये जीवन की पहेली,सब साथ में फिर भी अकेली। दिल कहीं भी लगता नहीं,भीड़ में भी होती हूँ अकेली। न झूठ बोलूँ और न करूँ फ़रेब,खाली नहीं रहती कभी जेब। दिखावा भी हमें आता नहीं,चापलूसी कभी सीखी नहीं। जो हूँ, जैसी हूँ होता है नाज,इसलिए मेरा कोई नहीं आज। यूँ … Read more

चाय के दीवाने थे

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* व्यवहार में चाय (राष्ट्रीय चाय दिवस विशेष)…. चाय की दुकान पर अक्सर चर्चे होते थे,हम दोनों भी चाय के दीवाने थेप्रतिदिन मिलने के बहाने थे,सर्दियों के मौसम में। सुबह-सुबह एक ही डिमांड थी,कहाँ है अदरक वाली चाय ?रिमझिम-रिमझिम बारिश में होती,मेरे हाथों में अदरक वाली चाय। और दिल में होती याद … Read more