तुम जल्दी कैसे सो जाते हो ?

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* तुम इतनी जल्दी कैसेसो जाते हो ?जब मैं तुम्हें पढ़ती हूँ,समझती हूँ, लिखती हूँ। तुम इतनी जल्दी कैसेसो जाते हो ?जब मैं तुमसे बातें करती हूँ,बातों में बहुत कुछ इज़हार करती हूँ। तुम इतनी जल्दी कैसेसो जाते हो ?जब मैं इस अजनबी शहर में,कोसों दूर तुम्हारी यादों के साथ चलती हूँ। … Read more

बूँद-सा बन जा

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** टप-टप टपके राह बनातीबूँद न हारी चलती जाती,धीरे-धीरे वह बलखातीकठिन डगर पर वह मुस्काती। बूँद-बूँद से घट भर जाताबूँद*बूँद भर सिंधु कहाता,लघु को तुम सब लघु मत जानोलघुता ही बढ़ बड़ा हो जाता। नर तू भी बूँद-सा बन जा,नित प्रति कर्म-धर्म तू कर जा।एक दिवस जग जय-जय गाए,तेरा यश नभ तक फैलाए॥

पटरी पर लौटता ३ भाषा फॉर्मूला

प्रेमपाल शर्मा*************************       आश्चर्य है कि दो-तीन विदेशी भाषाएं पढ़ना उन्हें अपने बच्चों पर अतिरिक्त बोझ नहीं लगता, लेकिन अपनी मातृभाषा और भारतीय भाषाएं सीखने के नाम पर वे सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं। यह अनुचित है। सरकार को किसी भी हालत में झुकना नहीं चाहिए।नौवीं कक्षा में दो भारतीय भाषाएँ पढ़ना अनिवार्य।राष्ट्रीय … Read more

पुरस्कार हेतु ८ नवम्बर तक प्रविष्टि अवसर

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अजमेर (राजस्थान)। आचार्य रत्न लाल पालरिया ‘विद्यानुग’ स्मृति अखिल भारतीय स्तर की तेरहवीं  प्रतियोगिता के अन्तर्गत शब्द निष्ठा पुरस्कार-१३ हेतु प्रविष्टियाँ आमंत्रित हैं। प्रविष्टि हेतु नि:शुल्क है, जो ८ नवम्बर २०२६ तक भेजनी है।  शब्द निष्ठा पुरस्कार के संयोजक एवं साहित्यकार डाॅ. अखिलेश पालरिया ने बताया, कि भाग लेने के लिए कोई बंधन नहीं है। … Read more

‘गीतों की गूंज’ पुस्तक विमोंचित

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मुजफ्फरपुर (बिहार)। नवयुवक समिति ट्रस्ट सभा कक्ष (मुजफ्फरपुर) में आचार्यकुल के बिहार राज्य सम्मेलन हुआ। इसमें साहित्यकार अंजनी कुमार पाठक की पुस्तक ‘गीतों की गूंज’ का लोकार्पण आचार्यकुल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व कुलपति आचार्य डॉ. धर्मेंद्र द्वारा किया गया। उन्होंने पुस्तक की सराहना की। पुस्तक में ५६ काव्य गीतों का समावेश है।कार्यक्रम में डॉ. … Read more

कभी नहीं हँसते तिजोरी में बंद ‘नोट’

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)*****************************************      पैसे की चमक के पीछे भागता आज का समाज एक अजीब-सी अंधी दौड़ का हिस्सा बन चुका है। सुबह की पहली किरण से लेकर रात के अंधेरे तक इंसान सिर्फ एक ही धुन में भाग रहा है-पैसा, तरक्की, और सुख-सुविधाएं। इस आधुनिकता की चकाचौंध में हमने भौतिक रूप से … Read more

माता-पिता हैं शक्ति और प्रेरणा

ललित गर्गदिल्ली*********************************** हमारा भविष्य, ताकत और प्रेरणा (विश्व माता-पिता दिवस विशेष)… विश्व के अधिकतर देशों की संस्कृति में माता-पिता का रिश्ता सबसे बड़ा एवं प्रगाढ़ माना गया है। भारत में तो इन्हें ईश्वर का रूप माना गया है। माता-पिता को उनके बच्चों के लिए किए गए उनके काम, बच्चों के प्रति उनकी निस्वार्थ प्रतिबद्धता और … Read more

सूरज उगले आग

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* धरती तपती दाह-सी, सूरज उगले आग।सूख गए हैं अब सभी, हरे-भरे से बाग॥ शीत पवन चलती नहीं, लू का फैला राज।कण-कण में अब बस रहा, ग्रीष्म ऋतु का साज॥ गरम हवा चलती रही, धरती बनी कडाव।पशु पक्षी बेचैन हुए, मिले नहीं अब ठाँव॥ बरस रही है आग अब, आसमान … Read more

खुशियाँ भी आने से डरती

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ कहीं दूर चला गया,वह जो साथी था मेराअब सब ‘सूना’ हो गया,इसीलिए ‘खुशियाँ’ भी आने से डरती है यहाँ…। एक ‘सैलाब’ आया था ज़माने में,सब कुछ बहा कर ले गयाअपने थे, वह अब नहीं दिखाई देते हैं,इसीलिए ‘खुशियाँ’ भी आने से डरती है यहाँ…। ख़्वाब बहुत सजाए थे हमने,पर क्या … Read more

नव युग का अभिनंदन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* युवा भुजाएँ गढ़ रहीं नवयुग का अभिनंदन रे,ज्ञान-विज्ञान लिख रहे श्रम का नव आवर्तन रेसीमाओं पर सतत जागता चहुँमुख साहस स्वर्णिम प्रहरी,विश्वगुरुज्ञान बनने चला है भारत लेकर वंदन रे। हरियाली खेतों लहराएँ पौरुष से स्वर्ण उगाकर रे,रेल, सड़क, आसमान छू रहे चहुंँ विकास दीप जलाकर रे‘चंद्रयान’ की सफल उड़ानों … Read more