प्रकृति है नाराज
ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* मानव के व्यवहार से,प्रकृति है बड़ी नाराजगर्मी के प्रकोप से,तप रही है दुनिया आज। मौसम ढा रहा सितम,बढ़ गया लोगों का गमबूँद-बूँद पानी को तरसे,छाया है कैसा यह तम…? पारा बढ़ रहा हर साल,जीव-जंतु है सब बेहालप्रदूषण का रूप हुआ विकराल,आखिर यह है किसकी चाल…? अतिवृष्टि और ठंड की मार,आग के गोले … Read more