हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा संग्रह ‘गीत प्रभा’ चयनित

दिल्ली। हिंदी अकादमी, दिल्ली ने साहित्यकार डॉ. कविता सिंह ‘प्रभा’ (दिल्ली) की कृति ‘गीत प्रभा’ (छंदबद्ध गीत संग्रह) का चयन किया है। अकादमी ने यह अपनी प्रकाशन सहयोग योजना (२०२७-२६) के लिए किया है। पूर्व में भी उत्कृष्ट कृतियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित हो चुकी ‘प्रभा’ की उक्त पांडुलिपि को अनुदान हेतु चयनित … Read more

वास्तविक खुशी दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने में

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* मन कुछ कहता है…(‘विश्व इच्छा दिवस’ विशेष)… हर मनुष्य की अपनी-अपनी इच्छाएँ होती हैं। वह अपनी इच्छाओं को समाज में साकार होते देखना चाहता है और उनकी पूर्ति के लिए हर संभव प्रयास करता है। इच्छाएँ केवल व्यक्तिगत नहीं होतीं, बल्कि सामाजिक भी होती हैं। एक व्यक्ति की सकारात्मक इच्छाएँ समाज … Read more

नींव का पत्थर

डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्लइन्दौर (मध्यप्रदेश)***************************************** मजदूर दिवस विशेष…. खाली सड़क पर उसकी साइकिल हवा से बातें कर रही थी। एक धीरे चल रहे स्कूटर से जब वह आगे निकला, तो उसके चेहरे पर चमक आ गई और पाँव जैसे मशीन बन गए।“धीरे चलाओ… कहीं हम दोनों गिर गए तो ?”“चिंता मत कर…. मैं चोट खा … Read more

प्रेम एक आत्मिक बंधन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* प्रेम न तन का मोह मात्र, यह आत्मा का गहन बंधन,श्वांसों में जो बस जाए, बन जाता है अमर स्पंदनलालच-रहित समर्पण जिसमें, हर पीड़ा भी हो वंदन,ऐसा प्रेम जगाए हियतल परम शांति प्रकाशित-चंदन। प्रेम न सीमित देह तक, है यह आत्मा का विस्तार,मौन हृदय की भाषा में, करता है … Read more

मत करना अभिमान

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* सफ़र जिंदगी का नहीं, होता है आसान,कुछ भी पंथ कठिन नहीं, चलने की लो ठान। आए बनकर भूमि पर, हम सभी मेहमान,निज कर्मों से सृष्टि में, सदा बढ़ाओ मान। बच्चे, बूढ़े या युवा, सबको दो सम्मान,यह जीवन दो रोज का, मत करना अभिमान। खुशियाँ बाँटे औरों में, अक्सर जो इंसान,उसके अधरों पर … Read more

मजदूर, मशीन और मर्म का मंथन

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** ‘मजदूर दिवस’ विशेष…. ‘मजदूर दिवस’ बीत गया—एक ऐसा दिन, जब मंचों पर श्रम की महत्ता के गीत गाए गए, भाषणों में गरीब, किसान और मजदूर वर्ग को राष्ट्र की रीढ़ बताया गया और  संवेदनाओं के शब्दों से वातावरण भर दिया गया। सरकारी सभागारों से लेकर निजी संस्थानों तक, हर जगह श्रम … Read more

पुनः मन की सुन लूँ

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ********************************************* मन कुछ कहता है…(‘विश्व इच्छा दिवस’ विशेष)… मन कुछ कहता है…दिमाग की सुने बगैरहोंठों के साथ बिना,आँखों से झलकता हैमन कुछ कहता है…। दुनिया से थक-हार कर,शहरी भाग-दौड़ से दूरजिम्मेदारियों का बोझ ले,अहम की दीवार तोड़मन कुछ कहता है…। मन कुछ कहता है…कहता है लौट चलेंचलें बचपन के गाँव में,माता-पिता … Read more

इतिहास ने खुद को फिर दोहराया

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** किसी और के बाद है अब मथुरा की बारी,पूरा करके रहेंगे, अब न कोई लाचारीएक वर्ग को ये सपना कुछ रास न आया है,देखो आज इतिहास ने खुद को फिर दोहराया है। जिसे सहारा दोगे यहाँ पर, वही करेगा घात,मौका मिलते ही दिखलाएगा, अपनी औकात‘विश्वगुरु’ का सपना रह जाएगा बनकर ख्वाब,उनकी नीच … Read more

कोई तो सुन ले

शीला बड़ोदिया ‘शीलू’इंदौर (मध्यप्रदेश )*********************************************** मन कुछ कहता है… (‘विश्व इच्छा दिवस’ विशेष)… मन कुछ कहता है,बहुत कुछ कहता है ये मनमन ये मन,कुछ कहता है। कोई सुन ले,कोई तो सुन लेक्या कहता है ये मन,मन ये मनकुछ कहता है। बातें हैं, यादें है,सपने हैंकुछ अपने हैं,मन ये मनकुछ कहता है। आँखें बंद कर सोचता,अंधेरों … Read more

दिल करता है

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** मन कुछ कहता है…(‘विश्व इच्छा दिवस’ विशेष)…. दिल करता है, छू लूँ गगन को,दिल करता है, पंछी बन जाऊँ। दिल करता है, पर्वत पर चढूं,दिल करता है, खूब चिल्लाऊँ। दिल करता है, हिल स्टेशन घूमने जाऊँ,दिल करता है, बादलों की सैर कर आऊँ। दिल करता है, चंद्रमा को निहारूँ,चकोर बन कर, सैर … Read more