दीप-सा जले

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचनाशिल्प: २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २… कर्महीन भावहीन, नीति रीति से विहीन, कर्म जो करे मनुष्य, व्यर्थ जीव जानिए। नित्य ही करें सुकर्म, जीव का यही सुधर्म, दीप-सा जले सदैव, प्रीत रीत मानिए। सत्य का करें प्रकाश, छूट जाय झूठ … Read more

मानवता के लिए युद्ध ठीक नहीं

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ युद्ध और शांति-जरूरी क्या ? वैश्विक स्तर पर जो युद्ध चल रहा है, उसे देखते हुए तीसरे ‘विश्व युद्ध’ का खतरा मंडरा रहा है। अमन, चैन सौहार्द और भाईचारे से मानवीय मूल्यों का स्तर बना रहता है, पर हिंसा मार-काट के बीच ‘युद्ध’ ठीक नहीं कहा जा सकता है। इस … Read more

पर्यावरण की पुकार

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ वक़्त कैसा आ गया अब धरा पर,हवा भी डरने लगी अपनी ज़िंदगी सेधरती भी अब निराशा रहने लगी है,गगन में तारे भी आँसू बहाने लगे हैं। जो ना कर सके हमारी रक्षा,पर्यावरण की तो कहाँ कहींधरती पर चिड़ियों की चहचहाहट रहेंगी,किसी दिन सब खत्म हो जाएगी। हवा भी सिसकियाँ अब लेने लगी … Read more

बचपन और आम का स्वाद

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* बचपन की गर्मियाँ आज भी मन में मीठी स्मृतियों की तरह बसी हुई हैं। जैसे ही विद्यालय की छुट्टियाँ होतीं, मन खुशी से झूम उठता था। तपती दोपहरी में भी हमें कोई थकान नहीं होती थी, क्योंकि आम के बागों की सैर हमारा इंतज़ार कर रही होती थी।गाँव के … Read more

परिवर्तन नियम

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** गर्मी, सर्दी और ये बारिशक्रम से सब परिवर्तन होते,नियम प्रकृति का सत्य यही है,जिस पर सब विधिवत चलते। परिवर्तन है सत्य यहाँ परकुछ तो रोज-रोज होता,इनके बीच झूलता जीवनअनुभव से अनुभव बढ़ता। बीते वर्ष सुहाने क्षण वोहृदय पटल पर एक-एक छाए,तोड़ पुराने बंधन सारेआगे को सब बढ़ते जाएँ। रखना सौम्य भाव सब … Read more

सेहत दौलत है बड़ी

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)****************************************** अच्छी सेहत है अगर, तो मिलता आनंद।ताक़त मिले शरीर को, सुस्ती सारी बंद॥ सेहत दौलत है बड़ी, रखना इसे सँभाल।लापरवाही जो करें, उनके संग बवाल॥ सेहत तो वरदान है, धारण कर संकल्प।नहीं बिगड़ने दो कभी, जीवन है अति अल्प॥ अच्छी सेहत तब बने, जब अच्छा आहार।योग और कसरत करो, तो जय-जय-जयकार॥ … Read more

निशा भास्कर की रचनाओं में समकालीन कविता का नया तेवर-सिद्धेश्वर

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पटना (बिहार)। महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा प्रवर्तित मुक्त छंद का मूल उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करना था, न कि काव्यात्मकता का लोप करना। जब नई पीढ़ी के रचनाकार पुनः छंद और लय की ओर उन्मुख होते दिखाई दे रहे हैं, तो यह हिंदी कविता के उज्ज्वल भविष्य का सकारात्मक संकेत है।इसी सकारात्मक … Read more

कोरियन नाटक: भारतीय मनोरंजन की दिशा पर पुनर्विचार आवश्यक

ललित गर्गदिल्ली*********************************** विश्व के मनोरंजन जगत में पिछले कुछ वर्षों में यदि किसी देश ने टेलीविजन और वेब सीरिज के माध्यम से पूरी दुनिया को सबसे अधिक प्रभावित किया है, तो वह दक्षिण कोरिया है। कोरियन नाटक (ड्रामा) केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक प्रभाव, सामाजिक शिक्षा, भावनात्मक परिपक्वता और जीवन मूल्यों के प्रस्तुतिकरण का सशक्त … Read more

नहीं समझा मेरे त्याग को

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** अब तक तो सबकी खुशियों की खातिर जीती आई थी,सबकी खुशियों की खातिर अपनी खुशी मारती आई थी। किंतु किसी ने कभी नहीं समझा मेरे इस त्याग को,सोच लिया अब स्वयं बनाना होगा अपने भाग्य को। जब मैंने अपनी इच्छा से जीने की कुछ कोशिश की,बर्दाश्त ना हुआ लोगों को, कानों में … Read more

श्रीकृष्ण की भावामृत धारा में अवगाहित हुई कल्पकथा काव्य गोष्ठी

सोनीपत (हरियाणा)। हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था द्वारा २४३वीं साप्ताहिक पौराणिक एवं भक्ति प्रसंग आधारित काव्यगोष्ठी का आयोजन माधव स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण विषय पर अत्यंत श्रद्धा एवं भावमाधुर्य के साथ हुआ। इस अनुपम आयोजन में भक्ति, दर्शन और काव्य का अद्वितीय समन्वय दृष्टिगोचर हुआ, जहाँ प्रत्येक रचना … Read more