अपना धर्म निभाते हैं…

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)…. मेहनत की रोटी खाते हैं,हम पसीना खूब बहाते हैंसबका साथ निभाते हैं,हम गीत खुशी के गाते हैं‘मजदूर दिवस’ हम मनाते हैं…। मकानों की नींव हमसे है,बालू-सीमेंट के गारे हमसे हैहम ही तो ताजमहल बनाते हैं,हाथों में छाले पड़ जाते हैं‘मजदूर दिवस’ … Read more

सम्मान के अधिकारी हैं, दो

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)…. संघर्ष रात-दिन किया, मगर वो मौन रहा,अपनी पीड़ा को कभी किसी से नहीं कहापरिवार का पालन करने को, दिन- रात काम में जुटा रहा,तपती हुई भीषण गर्मी में वो ईंट और गारा ढोता रहा। भीषण शीत-ताप सह, भवन बनाने में संलग्न … Read more

मासूम का करुण क्रंदन

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** यूक्रेन और रूस के बीच छिड़े युद्ध में राजधानी कीव में फंसी जूही अपने ३ महीने के बच्चे को अपनी छाती से चिपकाए हुए बैठी हुई थी। गरजती-बरसती मिसाइल और बम के धमाकों की आवाजों से वहाँ बैठे सभी लोगों के चेहरे पर भय और खौफ का आतंक छाया हुआ था। तभी धमाके की … Read more

कैसा ये इंसान ?

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* सिसकती मानवता,दम तोड़ती संवेदनाएंहृदय हीन मानव,इन्हें कैसे इंसान कहें ? आँखों में हवस,दिल में हैवानियतदरिंदगी का आलम,इन्हें कैसे इंसान कहें ? पहचान इंसान की इंसानियत,मानव की मानवता से,ये भी जो भूल बैठा आज,इन्हें कैसे इंसान कहें ? जानवर अवाक हैं,आँखों में प्रश्न हैं।क्या अंतर है हम दोनों में,इन्हें कैसे इंसान कहें ??

छालों की चुप्पी — सम्मान की पुकार

कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,हैदराबाद (तेलंगाना)*************************************************** मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)…. धूप जली, तन जला, फिर भी चला — वो चला,राह कठिन, पग थके, मन न डरा — वो चला। हाथों में छाले लिए, स्वप्न पाले लिए,दर्द छिपा, हँस पड़ा, अश्रु टाले लिए। ईंट पर ईंट रख, जग सँवारा सदा,खुद … Read more

कहानी प्रतियोगिता के पुरस्कार बाँटे 

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दिल्ली। २ मई को दिल्ली के मंडी हाउस स्थित रबीन्द्र भवन में साहित्य अकादमी के सभागार में विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान के तत्वावधान में अनीता प्रभाकर स्मृति कहानी प्रतियोगिता–२०२५ के तृतीय संस्करण के अंतर्गत ‘पुरस्कार वितरण समारोह एवं कहानी पर चर्चा’ का आयोजन किया गया। अध्यक्षता अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ … Read more

हमेशा सच के साथ चलिए

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** सतरंगी दुनिया-२२… ज़िंदगी को ठंड और घमंड दोनों से बचाकर रखना चाहिए, क्योंकि दोनों ही परिस्थितियों में आदमी अकड़ जाता है। हम लोग घर के दरवाजे पर शुभ-लाभ लिखते हैं। केवल शुभ-लाभ लिखने से कुछ नहीं होगा। शुभ विचार रखिए अपने लिए भी और दूसरों के लिए भी, फिर … Read more

गंगोत्री से गंगासागर तक ‘कमल’ दस्तक

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** भारतीय लोकतंत्र के विशाल परिदृश्य में समय-समय पर ऐसे क्षण आते हैं, जो केवल चुनावी परिणाम नहीं होते, बल्कि वे इतिहास की दिशा को बदलने वाले संकेत बन जाते हैं। वर्ष २०२६ के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम ऐसा ही एक निर्णायक मोड़ लेकर आया है, जिसने देश के राजनीतिक … Read more

‘अपराजेय’ कोई नहीं, इसलिए जन-हित न भूलिए

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** जैसे खेल में बहुत कुछ तय होने पर भी अनेक बार नया इतिहास रचा जाता है, ऐसे ही राजनीति में भी सबका समय आता है और जनादेश किसी को सत्ता देता है, तो किसी के किलों की दीवारें दरक जाती है। अर्थात साफ है कि राजनीति में कोई ‘अपराजेय’ नहीं होता। … Read more

हमें विचारशील बनाती हैं किताबें -संतोष चौबे

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भोपाल (मप्र)। दिमाग को क्रियाशील बनाए रखने के लिए किताबें पढ़ना बहुत आवश्यक है। वर्तमान समय में बाजार ने टेक्नोलॉजी के माध्यम से हमारी एकाग्रता को पूरी तरह से भंग कर हमारे दिमाग को गुलाम बना लिया है। अब बाजार अपने तरीकों से हमें संचालित कर रहा है। ऐसे में हमारे जीवन में किताबों का … Read more