आगे ना जाने क्या होगा… ?
डॉ. कुमारी कुन्दनपटना(बिहार)****************************** जिन्दगी एक वसंत (स्पर्धा विशेष)… हे सखी, पतझड़ बीता वसंत आया,पर पूर्ववत् उल्लास ना लायाशहर में आया सिसक-सिसक के,क्यों गाँव में चली हवा मचल के। कटते जा रहे, सब वन-उपवन,जलती धरा और बढ़ती तपनप्लास्टिक से फैल रहा प्रदूषण,बिगड़ रहा है प्रकृति सन्तुलन।अगर सचेत ना मानव होगा,तो आगे ना जाने क्या होगा… ? … Read more