‘वात्सल्य ज्योत्सना पर्व’ में साहित्य-सेवा संग ‘राधा रस रश्मियाँ’ विमोचित

सोनीपत (हरियाणा)। प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की असीम कृपा से संचालित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार द्वारा संस्थापक श्रीमती राधाश्री शर्मा के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में ‘वात्सल्य ज्योत्सना पर्व’ का आयोजन किया गया। दोनों माध्यम से अत्यंत गरिमा और साहित्यिक उल्लास के साथ यह आयोजन भक्ति, सेवा, संस्कृति एवं साहित्य के समन्वित स्वरूप का … Read more

लकीरें हाथ की

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** लकीरें हाथ की अपनेये मानव खुद सजाता है,ये दोनों हाथ की ताक़तसफल जीवन बनाता है। लिखा है जो लकीरों मेंभाग्य में जो समाया है,उसी के हाथ में सब हैकहानी ख़ुद रचाता है। अपनी शक्ति के बल सेहिमालय पर पहुँचता है,बनाता रेत में गुलशननहीं फ़रियाद करता है। छोड़ पढ़ना भाग्य में लिखी,हाथ की … Read more

स्वार्थी होती ज़िन्दगी

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* स्वार्थी होती जा रही है आज सभी की ज़िन्दगी,माता-पिता साथ नहीं रहते, फिर भी प्रेम की कमीअकेले-अकेले रह रहे हैं लोग सभी,फिर भी रिश्तों की डोर टूटती जा रही है कहीं। हाय-हाय में डूबा है हर इंसान,स्वार्थ के पीछे भाग रहा है सारा जहानकमाते बहुत हैं, फिर भी संतोष नहीं,असंतोष बढ़ता … Read more

हाय रे! प्रसाधन कक्ष….

राधा गोयलनई दिल्ली******************************************     “ओए, जल्दी बाहर निकल। मुझे भी जाना है।”    ” अरे, रुक जा ना। पहले पेट तो साफ हो लेने दे, तभी तो बाहर निकलूँगा।”    ” जल्दी कर, मुझे भी बहुत तेज प्रैशर लगा हुआ है।”   “मुझे ब्रश करना है। ऑफिस जाने को देर हो रही है।”    “अरे … Read more

आया पुरुषोत्तम मास

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* आया पुरुषोत्तम मास, पुण्य की पावन बेला,भक्ति-भाव से भर उठता जन-जन का हर मेलानाम-स्मरण, सत्कर्मों से जीवन होता उज्ज्वल,हरि-कृपा बरसाती धरती, अम्बर व अलबेला। दान, धर्म, जप, तप से मन का नित कल्मष धुलता,सद्विचार का दीपक अंतर्मन में है जलतालोभ, मोह, अहंकार सभी चरणों में झुक जाते,पुरुषोत्तम की महिमा से भाग्य नया फिर फलता। गीता, … Read more

सामने आते ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ के दुष्परिणाम

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** भारत सहित विश्व के अनेक देशों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ का चलन तेजी से बढ़ा है। आधुनिक जीवन-शैली, शहरीकरण, आर्थिक स्वतंत्रता, शिक्षा के विस्तार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बढ़ती अवधारणा ने इस व्यवस्था को समाज के एक वर्ग में स्वीकार्यता दिलाई है। ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ का मूल विचार … Read more

क्या ‘अंग्रेजी’ की पढ़ाई भारतीय भाषाओं को लील जाएगी ?

प्रवीण कुमार जैनमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* मेरी ये चिंताएँ केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक कड़वा धरातलीय सत्य हैं। जिन बिंदुओं को मैंने रेखांकित किया है, वे भारतीय समाज के ‘सांस्कृतिक आत्मसमर्पण’ की ओर संकेत कर रहे हैं। जिस गति से महानगरों में परिवारों ने मातृभाषा को ‘पिछड़ेपन’ की निशानी मानकर त्याग दिया है, वह स्थिति वास्तव … Read more

‘मुट्ठी भी मिट्टी’ कहानी बताती है कि हम कितने खोखले-डॉ. गजभिये

भोपाल (मप्र)। ‘मुट्ठी भी मिट्टी’ अति आधुनिक युग की कहानी है। इसमें कोई दो राय नहीं कि आधुनिक व्यवस्था में मनुष्य की भावनाएं मरती जा रही हैं। महानगरों में जीवन सिमट गया है। आधुनिक समाज व्यवस्था में यदि आपके पास पैसे नहीं हैं तो पीने का पानी भी नहीं मिलेगा। इस कहानी में प्रकृति का … Read more

स्वर्ग है शाश्वत सुख और दिव्य चेतना का लोक

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* भारतीय वैदिक, पौराणिक एवं आध्यात्मिक परम्परा में ‘स्वर्ग’ केवल एक भौतिक स्थान नहीं, अपितु पुण्य, सदाचार, धर्म, न्याय, प्रेम और दिव्य चेतना का परम प्रतीक माना गया है। यह वह अलौकिक लोक है, जहाँ दुःख, क्लेश, रोग, शोक, भय और अभाव का प्रवेश नहीं होता। स्वर्ग को देवताओं का … Read more

सपने हौसलों से पूरे होते

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** हौसलों में है तेरे अभी दम बहुत,तू न थकेगा कभी, न रुकेगा कभीजब तलक मन में रहती है दुर्बलता,दु:ख में होता है दु:ख, सुख में है ममता। जग में सुख भी सदा रहने वाला नहीं,दु:ख भी जीवन में रहता हमेशा नहींछाया से माया से दोनों होते सदा,आते-जाते ही रहते हैं सुख और … Read more