सबसे प्यारा परिवार

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** कितना अच्छा कितना प्यारा परिवार हमारा,सबसे प्यारा, सबसे अच्छा है परिवार न्यारा। इसमें तो बसता है, प्यारा संसार हमारा,सबसे प्यारा, सबसे दुलारा परिवार सहारा। सबसे छोटा होता है, सबका प्यारा दुलारा,सबकी आँखों का वो, तो होता है इक तारा। सबसे बड़ा होता, हर किसी की छत्र-छाया है,परिवार में रीढ़ की, वो हड्डी … Read more

सिर्फ कहने भर का साथ

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** भीड़ में खड़े लोग,अक्सर भरोसे की बातें करते हैंवे कहते हैं—“हम तुम्हारे साथ हैं।” लेकिन यह साथ,सिर्फ शब्दों की सतह पर ठहरा रहता हैजब जीवन की सड़क,अचानक पत्थरों से भर जाती है। जब भीतर का साहस,धीरे-धीरे टूटने लगता हैतब वही लोग,अपनी आँखें दूसरी ओर मोड़ लेते हैं। दु:ख के समय,सबसे अधिक सुनाई … Read more

घोषणा-पत्र की राजनीति पर लोकतांत्रिक लगाम आवश्यक

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति जनता का विश्वास है। चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का माध्यम नहीं होते, बल्कि जनता और राजनीतिक दलों के बीच एक नैतिक अनुबंध भी होते हैं। जब कोई राजनीतिक दल चुनाव के समय घोषणा-पत्र जारी करता है, तब वह जनता के सामने अपने विचार, नीतियाँ और … Read more

प्रेम की पराकाष्ठा ‘राधा-कृष्ण’

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* राधा अन्तर्मन में दीप जलाकर श्याम सुधा बरसाती है,मुरली की मधुरिम तानों में नित प्राण-पुष्प महकाती हैवृन्दावन की रज में डूबा हर कण प्रेम-पुजारी बनता,कृष्ण नयन की चंचल छाया जग में नेह जगाती है। यमुना तट पर रास रचाकर मधुबन सुगीत सुनाता है,राधिका का अनुराग सलोना कान्हा हृदय लुभाता … Read more

बहन की पहचान

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ झारखंड की एक छोटी-सी बस्ती में एक टूटा-फूटा घर था। उस घर में २ छोटे-छोटे बच्चे रहते थे — गगन और तावारी। ‘गगन’ छोटा भाई था, ‘तावारी’ बड़ी बहन।  अचानक एक हादसे ने दोनों के सिर से माँ-बाप का साया छीन लिया। दोनों अनाथ हो गए।       तावारी बचपन से ही घर-घर जाकर … Read more

हूँ माँ की लिखावट

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)… माँ एक छोटा-सा, प्यारा-सा अंश निराला,जिसमें समाया अनुपम ब्रह्मांड निरालामाँ को अपनी ममता-प्रेम लुटाने में नहीं होती थकावट,मैं माँ के लिए क्या लिखूँ, मैं हूँ माँ की लिखावट…। माँ भोली है, अद्भुत छवि वाली है,माँ की मूरत जैसे दूसरी कोई नहीं होने वाली हैसजल नयनों … Read more

अर्जुन चौहान की ग़ज़लें समकालीन समाज का जीवंत दस्तावेज़-सिद्धेश्वर

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पटना (बिहार)। समकालीन हिंदी कविता में यदि किसी विधा ने सबसे अधिक लोकप्रियता, व्यापकता और जनस्वीकृति अर्जित की है, तो वह निस्संदेह ग़ज़ल है। फिल्मी गीतों से लेकर कवि सम्मेलनों, मंचीय प्रस्तुतियों, सोशल मीडिया और पत्र-पत्रिकाओं तक ग़ज़ल आज सबसे अधिक पढ़ी और सुनी जाने वाली काव्य-विधा बन चुकी है। अर्जुन चौहान की ग़ज़लें समकालीन … Read more

करती उजाला पुस्तक

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* पुस्तक दीप-सी हर मन में उजाला करती है,ज्ञान का सूरज जीवन में सवेरा भरता हैपन्नों में छुपा है चतुर्युगों का गू़ढ़ अनुभव,पाठक का हर संशय पल में दूर करती है। हर किताब ज्ञान नया संसार खड़ा करती है,सूखी सोच में भी भावों पुण्य जल भरती हैशब्दों में रचा हुआ … Read more

आदमी क्या कर रहा है ?

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* अमलतास के लटकते झुम्बरों के बीच कुछ सोनचिरैया छिप-छिपकर रस चूस रही है। स्वर्णिम गजरों की घनी पंखुरियों में आपस में लुका-छिपी खेलते कुछ गाती कुछ रस पीती, चहकती हुई मस्तियाँ कर रही है। भली सुबह भंवरों का आया एक झुंड अमलतास के फूलों से रसपान कर अभी कुछ देर पहले … Read more

करना नहीं पाखंड

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* असली बनकर ही रहो, करना नहीं पाखंड।वे ही पाखंडी बनें, जिनके संग घमंड॥ मत करना पाखंड तुम, वरना हो अवसान।विनत भाव धारण करो, होगा तब उत्थान॥ मूर्ख करे पाखंड नित, ऐंठ दिखाए ख़ूब।आने वाले काल में, वह जाएगा डूब॥ बनो संत सच्चे सदा, नहीं करो पाखंड।वरना गिरना जान लो, कोई नहीं … Read more