मातृभाषा से बढ़कर दुनिया में कोई भाषा नहीं होती-डॉ. गुप्ता

अंतरमहाविद्यालय मातृभाषा कविता प्रतियोगिता… दिल्ली। मातृभाषा कितनी भी वैज्ञानिक या अवैज्ञानिक क्यों न हो, मातृभाषा से बढ़कर दुनिया में कोई भाषा नहीं होती। भारत की सभी भाषाएं विश्व की श्रेष्ठतम भाषाएं हैं, क्योंकि इनका मूल स्रोत विश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक भाषा संस्कृत है। अपने मोबाइल में भले ही हुए अंग्रेजी की रोमन लिपि भी रखें, … Read more

प्रो. शरद नारायण खरे को मिला ‘राष्ट्रीय साहित्य सम्मान’

मंडला (मप्र)। माँ शारदा साहित्यिक मंच (भोपाल) द्वारा श्री मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति इंदौर के शिवाजी भवन में ‘कवितांजलि समारोह-२०२६’ आयोजित किया गया। साहित्यिक उपलब्धियों के आधार पर इसमें कुछ साहित्यकार चयनित कर सम्मानित किए गए। इसमें साहित्य अकादमी मप्र से भी पुरस्कृत मंडला के वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. शरद नारायण खरे को भी चुना … Read more

नहीं मानना हार

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** सुन लो बच्चों ध्यान सेनहीं मानना हार,बोर्ड परीक्षा देनी हैहो जाओ तैयार। जीवन तुम्हें बनाना सुंदरतनिक परिश्रम करना,ध्यान से पढ़ना पाठ तुमनहीं तुम्हें है डरना। रात को सोने से पहलेएक बार सब पढ़ लेना,प्रातः उठ कर फिर तुमउसे रिवाइज कर लेना। पेपर मिलते ही पहलेतुम ईश्वर को याद करो,पहले प्रश्न सभी पढ़ … Read more

एपस्टीन फाइल्स

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* बेगुनाह चीखें जब गूँज उठी,परतें-दर-परतें उधड़ गईनरभक्षियों की ‘एपस्टीन फाइल्स’,कालिख बन जग में पसर गई। ये वीभत्स तमाशा कहाँ हुआ ?शीशे-सा कानों में उतर गयाधरती सुन जैसे चटक गई,मन पीड़ा से शर्मसार हुआ। कई चेहरों से नक़ाब उड़े,काले मुखड़े एकसाथ दिखेजो लगते थे प्रेरक सबको,वो गंदी नाली के कीट लगे। भोगों … Read more

काव्य संध्या में एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी

hindi-bhashaa

हरियाणा। सामयिक परिवेश की हरियाणा इकाई में वसंतोत्सव आधारित आभासी काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें रचनाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी। मुख्य अतिथि डॉ. सुनील कुमार उपाध्याय रहे।संस्था की संस्थापिका ममता मेहरोत्रा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सभी को वसंत की शुभकामनाएं दी। सरस्वती वंदना डॉ. सुमन मेहरोत्रा ने सुमधुर … Read more

उतर आया मधुमास

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* आ गया बसंत प्रिय सखी, खोलो मृदुल नयन,छलक रहे जाम सृष्टि में, जरा करो आचमनकोमल-सी हँसी तुम्हारी जैसे कोमल किरण,गालों पर बिखरी लाली, उजला-सा अंतर्मन। अधर पर ले मुस्कान, छुओ बसंतिया तन-मन,मुस्कान सुन तुम्हारी, पुलकित भी होगा गगनहोंठों पर ये प्रिय तुम्हारे, उतर आया मधुमास,गुलमोहर की लाली लेकर, बहुत बने है … Read more

बाल मन के बदलाव और कारण पर ध्यान केंद्रित करना होगा हमें

परिचर्चा…. इंदौर (मप्र)। इंदौर (मप्र)। बाल मन का बदलना है तो इसे हम आरोप की तरह क्यों लेते हैं, क्या हम इसे उपहार की तरह नहीं ले सकते ? अगर बाल मन नहीं बदलेगा, तो क्या हम बदलेंगे ? हाँ, चिंतन का विषय यह है कि जिस गति से आज के बच्चों का मन बदल … Read more

कल्पकथा काव्य गोष्ठी में उड़ी हास्य की फुहार, व्यंग्य के तीर

hindi-bhashaa

पानीपत (हरियाणा)। कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार द्वारा २३७वीं साप्ताहिक आभासी काव्य गोष्ठी आयोजित की गई, जो हास्य व्यंग्य के हँसगुल्लों का गुलदस्ता सिद्ध हुई। इसमें मुख्य अतिथि मेघा अग्रवाल रहीं।संस्था की संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह ने बताया कि कार्यक्रम में हर सृजनकार ने अलग रंग बिखेरा और हर पंक्ति ने श्रोताओं को ठहाके लगाने … Read more

नारी की पहचान रंगों में

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** रंगों की उन्मुक्त हवाएँजब आती हैं,फागुन का संदेश,फिर वो लाती हैंआँगन-आँगन जब गूँज उठते हैं,उमंग, स्नेह और हँसी के फव्वारे विशेष। पर होली इस बार कुछ कहती,नारी की पहचान रंगों में भी हो जातीवह गालों पर गुलाल से ज्यादा,अपने सपनों को रंगतीकोमल मुस्कान को दृढ़ बनाती,मीरा-सा अटूट विश्वास है‌ रखतीदुर्हर मन में … Read more

वैवाहिक समारोह में बढ़ता दिखावा नुकसानदायी

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ भारतीय संस्कृति में विवाह एक पवित्र, अटूट और आध्यात्मिक संस्कार है, जो २ आत्माओं और परिवारों को सात जन्मों के लिए जोड़ता है। विवाह में अग्नि को साक्षी मान कर सप्तपदी और सात वचन ही विवाह की स्थिरता का मुख्य स्तंभ होता है, जो वर-वधू को जीवनभर साथ निभाने का वादा कराते … Read more