हूँ माँ की लिखावट

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)… माँ एक छोटा-सा, प्यारा-सा अंश निराला,जिसमें समाया अनुपम ब्रह्मांड निरालामाँ को अपनी ममता-प्रेम लुटाने में नहीं होती थकावट,मैं माँ के लिए क्या लिखूँ, मैं हूँ माँ की लिखावट…। माँ भोली है, अद्भुत छवि वाली है,माँ की मूरत जैसे दूसरी कोई नहीं होने वाली हैसजल नयनों … Read more

अर्जुन चौहान की ग़ज़लें समकालीन समाज का जीवंत दस्तावेज़-सिद्धेश्वर

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पटना (बिहार)। समकालीन हिंदी कविता में यदि किसी विधा ने सबसे अधिक लोकप्रियता, व्यापकता और जनस्वीकृति अर्जित की है, तो वह निस्संदेह ग़ज़ल है। फिल्मी गीतों से लेकर कवि सम्मेलनों, मंचीय प्रस्तुतियों, सोशल मीडिया और पत्र-पत्रिकाओं तक ग़ज़ल आज सबसे अधिक पढ़ी और सुनी जाने वाली काव्य-विधा बन चुकी है। अर्जुन चौहान की ग़ज़लें समकालीन … Read more

करती उजाला पुस्तक

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* पुस्तक दीप-सी हर मन में उजाला करती है,ज्ञान का सूरज जीवन में सवेरा भरता हैपन्नों में छुपा है चतुर्युगों का गू़ढ़ अनुभव,पाठक का हर संशय पल में दूर करती है। हर किताब ज्ञान नया संसार खड़ा करती है,सूखी सोच में भी भावों पुण्य जल भरती हैशब्दों में रचा हुआ … Read more

आदमी क्या कर रहा है ?

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* अमलतास के लटकते झुम्बरों के बीच कुछ सोनचिरैया छिप-छिपकर रस चूस रही है। स्वर्णिम गजरों की घनी पंखुरियों में आपस में लुका-छिपी खेलते कुछ गाती कुछ रस पीती, चहकती हुई मस्तियाँ कर रही है। भली सुबह भंवरों का आया एक झुंड अमलतास के फूलों से रसपान कर अभी कुछ देर पहले … Read more

करना नहीं पाखंड

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* असली बनकर ही रहो, करना नहीं पाखंड।वे ही पाखंडी बनें, जिनके संग घमंड॥ मत करना पाखंड तुम, वरना हो अवसान।विनत भाव धारण करो, होगा तब उत्थान॥ मूर्ख करे पाखंड नित, ऐंठ दिखाए ख़ूब।आने वाले काल में, वह जाएगा डूब॥ बनो संत सच्चे सदा, नहीं करो पाखंड।वरना गिरना जान लो, कोई नहीं … Read more

रोशनी अपनों से है

कल्याण सिंह राजपूत ‘केसर’देवास (मध्यप्रदेश)******************************************************* अंधियारे में रोशनी चिरागों से होती है,ज़िंदगी में रोशनी सच्चे अपनों से होती है। माना झूठा, फरेबी, भ्रष्ट, बेईमान है संसार,पर कुछ तो सच्चे-अच्छे दोस्त भी हैं यार। बुझा दो उन चिरागों को,जो स्वार्थ, द्वेष और कपट से जलते हैं। जोत से जोत जलाओ उन चिरागों की,जो सद्भावना, वफादारी, कर्तव्य के … Read more

राष्ट्रहित के आह्वान में भी राजनीति क्यों ?

ललित गर्गदिल्ली*********************************** आज पूरी दुनिया एक ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां युद्ध, आर्थिक अस्थिरता, ऊर्जा संकट और वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं ने मानव सभ्यता को नई चुनौतियों के सामने खड़ा कर दिया है। खाड़ी देशों में लंबे समय से चल रहे संघर्ष और युद्ध की विभीषिका ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरे तक प्रभावित … Read more

परिवर्तन की आहट देती ‘इंडिया नहीं भारत’ पुस्तक विमोचित

केवड़िया (गुजरात)। पराधीनता के प्रतीक ‘इंडिया’ के स्थान पर हमारे देश का नाम भारत रखे जाने का विषय अनेक वर्षों से चर्चा में रहा है। इस संबंध में लेखक द्वय डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’ और डॉ. राजेश्वर कुमार द्वारा ‘इंडिया नहीं भारत’ नामक पुस्तक तैयार की गई है। गुजरात साहित्य अकादमी द्वारा केवड़िया में सरदार … Read more

ममता से प्यारी इज्ज़त

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ अपने ही खून से सींचा था, माँ ने उस भ्रूण को जिया थानौ महीने हाथों से पेट सहलाया था, प्यार किया, दुलार दिया, पूरा ध्यान दिया था। पर जब माँ ने नवजात किन्नर को जन्म दिया, किसे पता था कि कोख से एक ‘किन्नर’ जन्मामाँ की ममता वहीं बिखर गई, असहाय होकर ममता भी मजबूर हो … Read more

‘गुनगुनी धूप’ मानवीय संवेदनाओं की ईमानदार अभिव्यक्ति

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लोकार्पण… इंदौर (मप्र)। ‘गुनगुनी धूप’ मानवीय संवेदनाओं की एक ईमानदार अभिव्यक्ति है। तनुजा जी ने बनावटी शिल्प के बजाय नैसर्गिक सौंदर्य के साथ साधारण जीवन से गहरे कथा-बीज चुने हैं। रचनाएँ अपनी नियति खुद तय करती हैं और लेखक को स्वयं अपनी रचना का पहला निर्णायक होना चाहिए।      मुख्य अतिथि डॉ. सच्चिदानंद जोशी (सदस्य सचिव, … Read more