परिवर्तन की आहट देती ‘इंडिया नहीं भारत’ पुस्तक विमोचित

केवड़िया (गुजरात)। पराधीनता के प्रतीक ‘इंडिया’ के स्थान पर हमारे देश का नाम भारत रखे जाने का विषय अनेक वर्षों से चर्चा में रहा है। इस संबंध में लेखक द्वय डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’ और डॉ. राजेश्वर कुमार द्वारा ‘इंडिया नहीं भारत’ नामक पुस्तक तैयार की गई है। गुजरात साहित्य अकादमी द्वारा केवड़िया में सरदार … Read more

ममता से प्यारी इज्ज़त

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ अपने ही खून से सींचा था, माँ ने उस भ्रूण को जिया थानौ महीने हाथों से पेट सहलाया था, प्यार किया, दुलार दिया, पूरा ध्यान दिया था। पर जब माँ ने नवजात किन्नर को जन्म दिया, किसे पता था कि कोख से एक ‘किन्नर’ जन्मामाँ की ममता वहीं बिखर गई, असहाय होकर ममता भी मजबूर हो … Read more

‘गुनगुनी धूप’ मानवीय संवेदनाओं की ईमानदार अभिव्यक्ति

hindi-bhashaa

लोकार्पण… इंदौर (मप्र)। ‘गुनगुनी धूप’ मानवीय संवेदनाओं की एक ईमानदार अभिव्यक्ति है। तनुजा जी ने बनावटी शिल्प के बजाय नैसर्गिक सौंदर्य के साथ साधारण जीवन से गहरे कथा-बीज चुने हैं। रचनाएँ अपनी नियति खुद तय करती हैं और लेखक को स्वयं अपनी रचना का पहला निर्णायक होना चाहिए।      मुख्य अतिथि डॉ. सच्चिदानंद जोशी (सदस्य सचिव, … Read more

उड़नछल्लो

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** ये उड़नछल्लो बनकर कहाँ चल दी ? कुछ अता-पता बता कर जाएगी ? पूछूँगी तो कहोगी- क्या अता-पता बताऊँ ?तुम्हारा जमाना गया,अब हमारा जमाना है हम लड़कियाँ क्या किसी से कम हैं ?  हाँ, हाँ, मानते हैं,तुम लड़कियाँ किसी से कम नहीं होअब तो तुम लड़कों के भी कान कतरने लगी होकिसी से कम नहीं…तो इसका … Read more

अम्मा तुम बहुत याद आती हो…

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)…. अम्मा तुम बहुत याद आती हो,एक साल बीत गया…लगता है जैसे कल ही,तो तुमसे बात करी थीकितनी शांत और चैन कीनींद सो रही थीं,मानों कोई तपस्विनीमस्तक पर चंदन का टीका लगा कर,योगनिद्रा में ध्यान लगा रही होअम्मा तुम मुक्त हो गई,सांसारिक बंधनों से, शारीरिक कष्टों सेमृत्यु तो जीवन का शाश्वत … Read more

‘माँ’ एक पवित्र तस्वीर

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)… माँ का मतलब,सिर्फ़ रसोई में खड़ीचूल्हे की आँच पररोटियाँ सेंकती हुई स्त्री नहीं होता, न ही-वह केवलत्योहारों पर चरण छू लेने भर कीएक पवित्र तस्वीर है।  माँ,दरअसल वह अदृश्य संसार हैजिसके भीतर,पूरे परिवार की धड़कनें पलती हैं…जिस दिनघर के सब लोग सो जाते हैं, उस दिन भीमाँ पूरी तरह … Read more

सीप उदर माँ का

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)… सीप उदर माँ का, मोती बनमैं उसकी पहचान बनी,माँ से ही यह जग पाया हैवह मेरा अभिमान बनी। जीने की वह राह बतातीवह मेरा आधार बनी,थाप हृदय पर उसके धुन कीवह मेरा अधिकार बनी। ममता, प्रेम, दया, करुणा कीमाँ प्यारी झंकार बनी,शीतल प्राण-वायु जीवन कीवह मेरा … Read more

जिसने सब-कुछ दिया…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)… हर समय जो साथ रहती है,जो अपने बच्चों के लिए सब कुछ सहती है वो ‘माँ’ है। ममता का बंधनजो कभी खत्म नहीं होता,हम चाहे कितने बड़े हो जाएं,पर माँ के लिए हम बच्चे ही रहते हैं। नौ महीने ‘कोख’ में रखजिसने अपने जीवन का सब-कुछ … Read more

काव्य एवं लेख संग्रह लोकार्पित

hindi-bhashaa

मुम्बई (महाराष्ट्र)। मीरा रोड (पूर्व) स्थित विरंगुला केंद्र में शनिवार को हुए समारोह में लेखिका रीता दास राम की कृति (काव्य संग्रह) ‘अर्थबोध के सान्निध्य में’ और लेख संग्रह ‘हमारा समाज और हम’ (वैभव प्रकाशन) का लोकार्पण किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि विजय कुमार ने की।  जनवादी लेखक संघ, ‘अनभै’ पत्रिका और … Read more

माहभर किया कल्पकथा साहित्य संस्था ने सम्मान समारोह एवं काव्य गोष्ठी

सोनीपत (हरियाणा)। सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार द्वारा मई माह में २०२६ सम्मान समारोह एवं २४८वीं कल्पकथा काव्य गोष्ठी के आयोजन किए गए। साहित्यकार डॉ. गजेंद्र हरिहरनों ‘दीप’ की अध्यक्षता एवं समाजसेवी पत्रकार रघुवंशमणि सिंह के मुख्य आतिथ्य में यह आयोजन किया गया।    संस्था की संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति सिंह ने … Read more