आस्था

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ******************************************** मन में आस्था भाव रख, करें ईश की भक्ति।दुर्गुण सारे दूर हों, बढ़े आत्म की शक्ति॥बढ़े आत्म की शक्ति, मुक्ति का द्वार खुलेगा।मिटे पाप संताप, आत्म आनंद मिलेगा॥कर लो स्वयं उपाय, इसी मानव जीवन में।जीवन है दुष्प्राप्य, भाव यह रखना मन में॥ रखके आस्था भाव जो, करता है शुभ कर्म।मिले सफलता … Read more

कवि गोष्ठी में साहित्यकारों ने बिखेरी सृजनात्मक ऊर्जा

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बोकारो (झारखण्ड)। बोकारो इस्पात संयंत्र के जनवृत ५ स्थित बोकारो इस्पात पुस्तकालय में साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से वातावरण को सरस बना दिया। मुख्य अतिथि शैलेश मिश्रा और विशिष्ट अतिथि आलोक कुमार रहे।   अतिथियों ने साहित्य को समाज का दर्पण बताते हुए रचनाकारों को अपनी प्रतिभा निखारने के … Read more

‘संवेदना’ मानवीय भावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति-डॉ. जयश्री शर्मा

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जयपुर (राजस्थान)। ‘संवेदना’ केवल एक काव्य संग्रह नहीं, बल्कि मानवीय भावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति है। ऐसी कृतियाँ समाज को संवेदनशील बनाने के साथ-साथ नई पीढ़ी को साहित्य के प्रति प्रेरित करती हैं।    यह बात वरिष्ठ साहित्यकार शशि मंगल के काव्य संग्रह ‘संवेदना’ का विमोचन साहित्यिक समारोह में करते हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं डॉ. … Read more

लेखन के लिए अनुभव, अनुभूति और कल्पना का सहारा लें: ममता कालिया

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दिल्ली। जीवन में जो जितने अधिक धक्के खाता है, उतना ही अधिक और बेहतर लिख सकता है। जिसका जीवन गमले के पौधे के समान व्यतीत होता है, उसके पास लिखने को बहुत कम होता है। ऐसा व्यक्ति केवल अपने अंतर्मन की बातें ही लिख पाता है।  साहित्य अकादमी भारत सरकार से सम्मानित प्रसिद्ध कथाकार ममता … Read more

पृथ्वी-सुता माँ जानकी

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ पृथ्वी के गर्भ से आईं माँ जानकी,जनक जी की दुलारी थीं माँ जानकी।कितनी प्यारी, जनक-दुलारी माँ जानकी! एक दिन राम मिले, फूल तोड़ते उपवन में,नैन से नैना यूँ लड़े, जैसे फूलों के बाग मेंसभा जब लगी, राम निहारें सिया को, सिया निहारें राम को,सभा में सब निहारें सिया-जानकी के रूप कोएक धनुष … Read more

तू ही मेरे मन का मोहन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* तू ही मेरे मन का मोहन, तू ही मेरा श्रृंगार है,नीरव नयनों निखरा तेरा अनिर्वचनीय इकरार है।मंदाकिनी मृदु स्मृति में महकता है तेरा अभिसार,अधरों की अरुणिम किरणों बस प्रेम-पुलकित उद्गार है। श्यामल श्याम छवि छू जाए, चेतन चिर विहार है,राधा-रोम-रोम में रमता रसमय तेरा संभार है।मुरली-मंत्रित मधुप मनों में … Read more

सत्य की पुकार

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* मेरे भीतर का संत मुझसे कुछ कहता है,कहता है-उठो देखो नया सूरज निकला हैशास्त्र का प्रकाश फैला है, शास्त्र पढ़ो,शास्त्रों को गुनों, सुनो और समझोशास्त्र जीवन का निर्माण करते हैं, सँवारते हैं,वे उजाले का सबको नित दान करते हैंसत्य लेकर संघर्ष करो, तो मंज़िल पाओगेनित सुख-आनंद के नग़मे, नित गाओगे। सूरज … Read more

प्रेम-भावनाओं का केंद्र बिंदु ईश्वर ही

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* ‘प्रेम’ भावनाओं का केंद्र बिंदु है। ईश्वर भावनाओं से ही प्राप्त होते हैं। ईश्वर धन, दौलत और सम्पत्ति से प्रसन्न नहीं होते; धन-दौलत से अहंकार उत्पन्न होता है, और अहंकार ईश्वर को अप्रिय है।यह विचारणीय प्रश्न है, कि प्रेम कैसे प्राप्त हो। प्रेम में हार-जीत नहीं होती, केवल प्रेम होता है। … Read more

इम्तिहान से कम तो नहीं

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* माना कि उम्र का फासला है बहुत,दिलों की नजदीकियाँ लेकिन अभी कमसिन है। दिनभर की मशीनी भाग-दौड़ में,कुछ पल तेरे साथ सुकून के यक़ीनन तो है। बेखबर है कि कब तक एक-दूजे का साथ दे पाएंगे,कुछ रिश्तों के नाम नहीं होते, बस तरन्नुम-सा है। दुनिया की खंजर निगाहों से बचना मुमकिन … Read more

वृंदावन साहित्य समारोह में ११ पुस्तक विमोचित

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वृंदावन (उप्र)। सोशल एंड मोटिवेशनल ट्रस्ट द्वारा वृंदावन की पावन धरती पर कवियों के काव्य समागम का कार्यक्रम किया गया। संस्था के संस्थापक रवीन्द्रनाथ सिंह व राष्ट्रीय अध्यक्षा ममता सिंह के साथ प्रथम सत्र में मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के पश्चात अर्चना झा की सरस्वती वन्दना से कार्यक्रम की शुरुआत हुई।    विशिष्ट अतिथि पूर्व … Read more