‘बढ़ते कदम’ लघुकथा प्रतियोगिता:प्रथम पुरस्कार डॉ. रमेश (मुम्बई) को

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भोपाल (मप्र)। लघुकथा शोध केंद्र समिति द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की लघुकथा प्रतियोगिता ‘बढ़ते कदम’ के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से कुल ३०६ प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रथम पुरस्कार (२१०० ₹) ‘अपनी जमीन से कटना’ के लिए डॉ. रमेश (मुम्बई) को दिया जाएगा। समिति की अध्यक्ष कांता … Read more

प्राकृतिक आकर्षण

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* मादक है मधुमास, प्रीति की ऋतु है आई।पुष्पित हुआ कछार, मिलन की बेला छाई॥अधरों पर है गीत, मीत उर को है भाया।है वसंत का ताप, पवन अनुराग नहाया॥ प्रकृति हुई भरपूर, चेतना मन में आई।भ्रमर स्नेहमय आज, वनों ने आभा पाई॥मौसम का नवरूप, सुहावन है अमराई।अनुबंधों के नेग,कोकिला रस बरसाई॥ है … Read more

वही सच जान पाता है

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** हराया है तूफ़ानों को, मगर अब ये क्या तमाशा है,हवा करती है जब हलचल, बदन ये कांप जाता है। है सूरज रौशनी देता, सभी ये जानते तो हैं,है आग दिल में बसी कितनी, न कोई भाँप पाता है। है ताकत प्रेम में, पिघला दे पत्थर लोग कहते हैं,पिघल जाता है जब … Read more

सपनों में उड़ने वालों…

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** सपनों की दुनिया में उड़ने वालों,जरा धरती पर पैर रख कर चलो। माना कि सपनों में सुख है बहुत,मगर थोड़े से दु:ख भी सहते चलो। सुख और दु:ख दोनों ही तो बहनें हैं,इन बहनों पर प्यार लुटाते चलो। धरती पर फूल के साथ काँटें भी हैं उगते,जरा काँटों का भी लुत्फ उठाते … Read more

दर्द सहना होता है

कल्याण सिंह राजपूत ‘केसर’देवास (मध्यप्रदेश)******************************************************* यूँ ही कोई कुंदन नहीं बन जाता है, धधकती आग में गलना होता हैदेवताओं के सिर पर बैठना, कहाँ हर फूल का नसीब होता है। गले का हार बनने के लिए भी हर, फूल को जिगर में घुसी सुई का दर्द सहना होता हैसभी शिखर पर बैठे को देखते हैं, … Read more

जीवन कठपुतली का खेल

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** यह संसार सिर्फ़ एक मेला है,हर प्राणी यहाँ अकेला है।सुख-दु:ख सब है इस जीवन में-बस कठपुतली का खेला है॥ सबसे एक विनय हमारी है,भाषा की प्रगति ज़िम्मेदारी है।संग साथ-साथ चलते रहना-नवयुवकों की अब बारी है॥

चाईनीज माल

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** राकेश एक प्रतिभाशाली छात्र था। हर कक्षा में मेरिट में आता था।कॉलेज की पढ़ाई में भी उसका नाम प्रावीण्य सूची में आया और उसको अपनी पढ़ाई विदेश में करने के लिए छात्रवृति मिली। राकेश पढ़ाई के लिए चीन चला गया। शिजू नामक एक चायनीज छात्रा भी उसके साथ पढ़ती … Read more

कर दो तृप्ति

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* अधरों ने कहा अधरों से,जरा ठहरो ! क्यों तुमने यूँ तड़पाया मुझेअधर कहीं एक होते नहीं,जब तक ना दोनों मिलें। अपने अधर से तुम्हारे अधर,मिल कर पा जाते तृप्तिप्यासे हैं मेरे अधर बहुत,अधरों से छू कर कर दो तुम तृप्ति। तब मैं न रहूं तुम न रहो,रह जाए सिर्फ मेरे तुम्हारेदरम्यान … Read more

चलना धीमी गति से…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ सड़क पर चलना धीमी गति से,तेज रफ़्तार किसी का साथ नहीं देतीजीवन है अनमोल ध्यान दो भाई,सड़क पर रखो नजर, क्योंकि नजर हटी दुघर्टना घटी। सड़क पर चलना धीमी गति से,रास्ता यूँ ही कट जाएगा, मंजिल पर पहुंच जाएगाक्योंकि जीवन है बड़ा अनमोल,इसलिए सड़क पर सर्कस मत करो भाई। सड़क … Read more

‘छू लिया आसमां’ अपराध, प्रेम और विश्वासघात का जटिल ताना-बाना

सपना सी.पी. साहू ‘स्वप्निल’इंदौर (मध्यप्रदेश )******************************************** समीक्षा…. साहित्य की दुनिया में कुछ लेखक ऐसे होते हैं जो मनोरंजन ही नहीं करते, बल्कि पाठकों को सामाजिक हकीकत से भी रूबरू कराते हैं। लियाकत मंसूरी एक ऐसा ही नाम बन चुके हैं, जिन्होंने रोमांचक लेखन शैली से हिंदी क्राइम थ्रिलर पाठकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई … Read more