“…तुमने उसे बचाया क्यों नहीं ?”

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** मेरा पर्यावरण, मेरी जान (विश्व पर्यावरण दिवस)… एक समय के बाद,धीरे-धीरे थकने लगती है पृथ्वी भीनदियाँअपनी पारदर्शी स्मृतियाँ खोने लगती हैं, पहाड़ों की छाती परखनन के गहरे घाव उभर आते हैंऔर जंगल,जो कभी पक्षियों की भाषा में साँस लेते थेमशीनों के शोर में,अपनी हरियाली भूलने लगते हैं।  हमने विकास के नाम पर,बहुत कुछ … Read more

कहती वसुधा 

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* मेरा पर्यावरण, मेरी जान (विश्व पर्यावरण दिवस विशेष)… करती है वसुधा पुकार,मत करो मेरा आवरण तार तार। ताल तलैया सागर नदिया,यह हैं मेरे सुंदर गहनेमत करो नष्ट इनको तुम सब,विनती है मेरी बारम्बार।करती है वसुधा पुकार,मत करो मेरा आवरण तार-तार…॥ झाड़-पेड़, पर्वत और टीले,यह सब हैं मेरी संताननष्ट करो ना स्वार्थ की … Read more

माता-पिता सबसे महान

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** हमारा भविष्य, ताकत और प्रेरणा (विश्व माता-पिता दिवस विशेष)…. माता-पिता से ही,हमारी पहिचान हैमाता-पिता भगवान,से भी महान हैं। माता-पिता ही हमारा,भविष्य बनाते हैंखुद भूखे रह कर भी,हमें खिलाते हैं। माता-पिता भगवान के,प्रतिनिधि बनकर आते हैंऔर हमारा जीवन,अच्छे से सवांरते हैं। माता-पिता का अहसान,हम कभी नहीं चुका पाएँगेएक जन्म क्या … Read more

मेरे भगवान

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* हमारा भविष्य, ताकत और प्रेरणा (विश्व माता-पिता दिवस विशेष)… माँ की लोरी में नींद है, पिता की डाँट में प्यार हैमेरे सारे सवालों का,बस यही संसार है।   न मंदिर गया कभी, न मस्जिद गया कभीन गुरुद्वारे में मत्था टेका कभी,न कोई तीर्थ पर गया कभीजिस आँगन में वो हैं, बस वही मेरा खुदा … Read more

हम वह अंतिम पीढ़ी हैं..

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ********************************************* प्राचीनता में पले-बढ़े,आधुनिकता के रंगों में रंगेहम वह बीच की कड़ी हैं,दोनों को जिसने देखा-समझा,हम वह अंतिम पीढ़ी हैं। हमने डिबिया लालटेन देखा,साइकिल का कमाल देखापाँच-दस पैसे का धमाल देखा,आज फ्रिज का पानी पीने वालेकल मटके का भी कमाल देखा। गुरु को भगवान समझने वाले,शिक्षा का होते व्यापार देखाप्राचीन रीति-रिवाज … Read more

संगोष्ठी : हिंदी नवजागरण और ‘उदन्त मार्तण्ड’ पर हुआ मंथन

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कोलकाता (पश्चिम बंगाल) | कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज एवं भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद के संयुक्त तत्वावधान में ‘हिंदी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के विकास में पत्रकारिता का योगदान’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। अध्यक्षता प्रो. मोहन ने की।  संगोष्ठी में प्रो. विनोद कुमार मिश्र, डॉ. प्रेमशंकर, राज मिठौलिया, प्रो. सत्या उपाध्याय एवं प्रो. संजीव … Read more

अद्भुत गूलर का फूल

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** नीम, पीपल और बरगद की त्रिवेणी की बात तो सबने ही सुनी होगी। इन पूजनीय वृक्षों की श्रंखला में एक और दैवीय वृक्ष है- गूलर (सिकामोर)। यह नवग्रहों के वृक्षों में एक प्रमुख वृक्ष है। दर्शन दुर्लभ होने के अर्थ में ‘गूलर का फूल होना’ मुहावरे को बचपन से प्रयोग करते रहे हैं।   … Read more

ईश्वर का उपहार

डॉ. कुमारी कुन्दनपटना(बिहार)****************************** हमारा भविष्य, ताकत और प्रेरणा (विश्व माता-पिता दिवस विशेष)… जीवन की शुरुआत है होती,कहते जिसे प्यारा सा परिवारमाता-पिता का साथ है मिलता,समझो है ये ईश्वर का उपहार। जन्म से ही वो परवाह करतेकुछ अनहोनी ना हो, डरतेबच्चों की खुशी की खातिर,अपनी खुशी त्याग भी देते। नि:स्वार्थ और बिना शर्त का,दिल का सच्चा प्यार … Read more

कहर हर आँगन टूटेगा

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** मेरा पर्यावरण, मेरी जान (विश्व पर्यावरण दिवस)… पेड़ों की हरियाली रोती, सूनी होती जा रही,धरती माँ की कोमल चुनर, धूल में खोती जा रही। नदियाँ थीं जो जीवनदायिनी, अब मैली कहलाती हैं,मानव की लापरवाही से, अपनी पीर सुनाती हैं। कटते वन, उजड़ते उपवन, पक्षी घर को तरस रहे,अपने ही स्वार्थों में … Read more

पर्यावरण का वायुदूत हूँ

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** मेरा पर्यावरण, मेरी जान (विश्व पर्यावरण दिवस)…. कवि नहीं मैं काव्य मरघट का, पुराना भूत हूँ, खेत, पेड़, जंगल, वन, पहाड़ से अभिभूत हूँ। पर्यावरण संरक्षण का रक्षक एवं एक दूत हूँ, पेड़ों की कटाई से बेहद क्षुब्द और क्रोधित हूँ। पृथ्वी श्रृंगार व प्रकृति हरियाली से मोहित हूँ, पर्यावरण से छेड़छाड़ … Read more