युद्ध:हर कोई अड़ा

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** युद्ध और शांति-जरूरी क्या ?… अपने हित साधन में कोईतानाशाह जिद पर अड़ा है,जगह-जगह पर युद्ध छिड़ा हैयूक्रेन से रूस भिड़ा है,चार वर्ष से लगातारयूक्रेन रूस में युद्ध छिड़ा है,मैं क्यों युद्ध विराम करूँ ?इस जिद पर हर कोई अड़ा है। वह युद्ध अभी थमा नहीं किनये युद्ध कई शुरु हो गए,अफगानिस्तान … Read more

युद्ध से हर ओर विघटन, शांति ही प्रगति

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* युद्ध व शांति-जरूरी क्या ?.. युद्ध एक विनाशकारी घटना है और इसका विपरीतार्थक शब्द शांति है। युद्ध विनाश, दु:ख और पीड़ा लाता है, जबकि शांति सुख, समृद्धि और विकास का मार्ग दिखाती है। युद्ध से मानवता को अपार क्षति होती है। यह मानवता को तार-तार कर देता है, जबकि शांति समाज … Read more

शांति की कामना

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** युद्ध और शांति-जरूरी क्या ? क्यों विनाशक शक्ति काउपयोग करता जा रहा,युद्ध का उन्माद यहप्रतिदिन ही बढ़ता जा रहा। क्यों ये उन्मादी कदमआगे बढ़ाता जा रहा,अपने हाथों ही प्रलय केबीज बोता जा रहा। विश्व जनमत को भी येअस्वीकार करता जा रहा,सभ्यता के नाम कासंहार करता जा रहा। प्राणी वहाँ भयभीतजलवायु प्रदूषित हो … Read more

तेरे आँसू मैं लेकर के तुझे मैं हास देता हूँ-प्रो. खरे

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मंडला (मप्र))। काव्य सम्मेलन…. संस्था अभिनव काव्यांश मंच द्वारा आभासी रूप से कवि सम्मेलन का आयोजन लक्ष्मी शिमला शर्मा के संयोजन में किया गया। मंडला (मध्यप्रदेश) के वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. शरद नारायण खरे की अध्यक्षता में यह हुआ।दीप्ति राजौरा के विशेष सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में सिद्धेश्वरी सराफ, रजनी कटारे, माधवी गम्भीर,अर्चना द्विवेदी और … Read more

बाजार में ईमान बेच रहा

कल्याण सिंह राजपूत ‘केसर’देवास (मध्यप्रदेश)******************************************************* पहले दिल की ज़ुबां को,बिन कहे नजरों से हीसमझ जाते थेप्रेम में ऐसी मौन प्रगाढ़ता होती थी। हर स्पर्श निष्कपट था,हर साँस में पवित्रता का,एहसास होता थामन से मन का जुड़ना,ऐसा रिश्ता होता था। कहाँ गए वो दिन,जब दिल ही मंदिर होता था ?जहाँ प्रेम की पूजा होती थी,और ईमान … Read more

डाक विभाग द्वारा राजभाषा हिन्दी की जान-बूझकर अनदेखी

सेवा में, माननीय गवर्नर, भारतीय रिजर्व बैंक, केन्द्रीय कार्यालय भवन, शहीद भगत सिंह मार्ग, मुम्बई – ४००००१ विषय: डाक विभाग द्वारा नेट बैंकिंग सेवा में राजभाषा हिन्दी की जान-बूझकर की जा रही अनदेखी, भाषाई भेदभाव एवं पिछले ९ वर्षों की शिकायतों पर हठधर्मिता के विरुद्ध शिकायत। संदर्भ (विगत ९ वर्षों का संघर्ष): 🔹नवीनतम शिकायत: DPOST/E/२०२६/०००२२०४ … Read more

लखनऊ में सजी काव्य गोष्ठी

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लखनऊ (उप्र)। साहित्यिक सरोकारों से भरी एक यादगार काव्य गोष्ठी राजधानी लखनऊ में आयोजित की गई। एकता नगर (बालागंज) में कवि श्रीकृष्ण द्विवेदी ‘द्विजेश’ के आवास पर यह आयोजन हुआ, जिसका श्रेय राजेन्द्र शुक्ल ‘सहज’ एवं संस्था सर्वजन हिताय साहित्यिक समिति को है।कार्यक्रम में राजेश विक्रांत विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए और नए … Read more

दीप-सा जले

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचनाशिल्प: २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २… कर्महीन भावहीन, नीति रीति से विहीन, कर्म जो करे मनुष्य, व्यर्थ जीव जानिए। नित्य ही करें सुकर्म, जीव का यही सुधर्म, दीप-सा जले सदैव, प्रीत रीत मानिए। सत्य का करें प्रकाश, छूट जाय झूठ … Read more

मानवता के लिए युद्ध ठीक नहीं

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ युद्ध और शांति-जरूरी क्या ? वैश्विक स्तर पर जो युद्ध चल रहा है, उसे देखते हुए तीसरे ‘विश्व युद्ध’ का खतरा मंडरा रहा है। अमन, चैन सौहार्द और भाईचारे से मानवीय मूल्यों का स्तर बना रहता है, पर हिंसा मार-काट के बीच ‘युद्ध’ ठीक नहीं कहा जा सकता है। इस … Read more

पर्यावरण की पुकार

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ वक़्त कैसा आ गया अब धरा पर,हवा भी डरने लगी अपनी ज़िंदगी सेधरती भी अब निराशा रहने लगी है,गगन में तारे भी आँसू बहाने लगे हैं। जो ना कर सके हमारी रक्षा,पर्यावरण की तो कहाँ कहींधरती पर चिड़ियों की चहचहाहट रहेंगी,किसी दिन सब खत्म हो जाएगी। हवा भी सिसकियाँ अब लेने लगी … Read more