नई पीढ़ी को भाषा पर अधिकार रखना चाहिए-प्रो. सिंह

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उज्जैन (मप्र)। नई पीढ़ी को भाषा पर अधिकार रखना चाहिए। अपने विषय को दूसरे विषयों के साथ जोड़ कर हम और आगे बढ़ सकते हैं। इनमें प्रयोजनमूलक हिंदी, पत्रकारिता, साक्षात्कार, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया इत्यादि शामिल हैं।यह बात मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति प्रो. अशोक सिंह ने श्री नरेश मेहता का स्मरण करते हुए अपने वक्तव्य में कही। … Read more

मेरा कान्हा गुलाब का फूल

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** मेरा कान्हा तो है गुलाब का फूल,देखो जब उसके मुख सृष्टि समूल। कान्हा जैसा प्यारा कोई नहीं है,सबके कष्टों को तो सुनता वही है। उसकी प्यारी बाँसुरी की वो धुन,जो भी सुनता हो जाता है मुग्ध। जब वो माखन लिपटाए अपने मुख,देख यशोदा मैया को अपार मिले सुख। गैया चराए मेरा नन्हा-सा … Read more

आन बचाने टकराते

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* माटी की लाज बचाने को, रण-पथ अविरत बढ़ते जाते,हँसते-हँसते प्राणों अर्पण, भारत वंदन शीश झुकाते।घर-आँगन सूना रह जाता, आँसू मौन भक्ति रस बहते-वीर-सपूतों अमर शहादत, स्वर्ण अतीत विजय लिख जाते॥ ध्वजा तिरंगा आन बचाने, आँधी तूफ़ानों टकराते,वक्षस्थल पर गोली सहकर, ख़ुद सीमा से नहीं हटाते।लखि पुलवामा रोती ममता, शहीद … Read more

जय भारत

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचनाशिल्प:विधान-३२ मात्राएँ–१०, ८, ८, ६…. जय भारत वंदन, भू रज चंदन,गौरवशाली, है गाथा।हिंद की है शान, तिरंगा मान,रखता ऊँचा, ये माथा।हिमशैल है भाल, करे प्रतिपाल,रक्षा करते, हैं प्रहरी।सागर है रक्षक, अरि का भक्षक,रक्षा खाई, है गहरी॥ जय भारत माता, जग विख्याता,करती सबकी, रखवाली।जय वीर प्रसविनी, भारत जननी,देती सबको, खुशहाली।बहती है गंगा, … Read more

रंगों का त्योहार

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** रंजिशें जो थी बरस में,वह मिटाने आ गयाहोली का त्यौहार देखो,रंग लेकर आ गया। बड़ा ही विमोहक ये,भावमय त्योहार हैगृह, नगर और ग्राम बस,उल्लास ही उल्लास है। हर तरफ़ है रंग वर्षा,ढोलकों की थाप हैकुमकुमों की मार से,सुरभित गोरी के गाल हैं। आज दिन रोते हुए को,भी हँसा देते हैं लोगभंग का … Read more

जीवन में सामंजस्य की महत्ता समझिए

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** हम सामाजिक प्राणी हैं और समाज का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। यदि जीवन में सफल होना और खुशी से भरपूर जीवन जीना चाहते हैं, तो हमें एक-दूसरे से सामंजस्य बनाकर चलना बहुत जरूरी है। फिर चाहे वह हमारा कार्यस्थल हो अथवा घर परिवार, अन्य सम्बन्धी या आस-पड़ोस। संयुक्त परिवार हो … Read more

‘साहित्य संस्था संगम’ में रजनी कटारे ‘हेम’ की २ कृति विमोचित

जबलपुर (मप्र)। साहित्य अकादमी म.प्र. (संस्कृति परिषद , म.प्र.) के तत्वावधान में सभी संस्थाओं का एक ही मंच पर संवाद और परिचय के अद्भुत कार्यक्रम श्रीजानकीरमण कालेज में आयोजित किया गया। इसमें साहित्य सृजनकारी मंच की संस्थाप और वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती रजनी कटारे ‘हेम’ (जबलपुर) की २ कृति ‘हेम पुष्प बल्लरी’ (काव्य संग्रह) एवं ‘प्रभु … Read more

अहसास के पन्ने

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* रवि को लिखने की आदत बचपन से थी। उसकी जेब में हमेशा एक छोटी-सी डायरी रहती, जिसके पन्नों पर वह अपने अहसासों को दर्ज करता। शहर की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में उसे अक्सर लगता-लोग बोलते बहुत हैं, सुनते कम; दिखते बहुत हैं, महसूस कम करते हैं।कॉलेज के आख़िरी साल … Read more

बेचैनी क्यों है इतनी ?

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* बेचैनी क्यों है इतनी, जब हर समस्या का हल है,आज परेशान हो जितना, उतनी ही खुशियां कल है। सुख दुःख है आनी-जानी, यही सत्य अटल है,चिंताओं में गुम ना होना, मन आवारा बादल है। मत भागो भौतिकता के पीछे हरदम,लुफ्त उठाओ जीवन में हर पल, यही संपत्ति अचल है॥

भारत की नई डिजिटल नीति की असली परीक्षा

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** डिजिटल मीडिया का युग मूलतः ‘गति’ का युग है-खबरें सेकंडों में फैलती हैं, प्रतिक्रियाएँ मिनटों में बनती हैं, और जनमत कई बार घंटे भर में दिशा बदल लेता है। इसी तेज़ रफ्तार के बीच अब एक नई शक्ति निर्णायक बनकर उभरी है-कृत्रिम मेधा के सहारे बनी सामग्री, खासकर ‘डीपफेक’ और सिंथेटिक … Read more