मेरा मुझमें कुछ नहीं

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मेरा मुझमें कुछ नहीं, सब कुछ तेरी माया,साँसों की हर लय में, तेरा ही स्वर छाया।मैं कौन यहाँ स्वामी, तू ही रचयिता है-तू बीज, तू अंकुर, तू ही हरिताया। बंधन कालचक्र का, थामे पग-पग जीवन,मद मोह मरीचिकाएँ, हरती मन का यौवन।लोभ क्रोध की आँधी में, टूटे विश्वास सदा-तेरी कृपा … Read more

गली-गली धुंध

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** गाँव-गली, शहर-नगर तक छाया धुँआ-धुँध,ठंडे में सन्नाटा पसरा, प्रदूषित ओस की बूँदरुकी रफ्तार ट्रक, बस, कार की, धुंध आँखें मूंद,कश्मीर-हिमाचल की ठंड को छोड़ो बर्फबारी अंधाधुंध। ठिठुरन-जकड़न में जन जीवन, आँखें हुई है कुंद,शीतलहर से सभी त्रस्त थे, खेल रहे हैं बाल मुकुंदखेतों में हरियाली आई, सरसों पीले फूल … Read more

‘सहयोग’ मौन अनुबंध

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** सहयोग वह मौन अनुबंध होता है,वह करुणा की अस्थाई छाया होता है। जो मनुष्य को मनुष्य तो बनाए रखता है,इस सभ्यता के कठोर तट पर। यह कोई दया नहीं होता है,जब इतिहास ने हड्डियों से हथियार पहली बार गढे़ होंगे। तब भी अस्तित्व के पक्ष में,भय के विरुद्ध, किसी ने किसी का … Read more

वेनेज़ुएला संकटःकार्रवाई में नियंत्रण की साम्राज्यवादी सोच

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** वेनेज़ुएला पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है, कि क्या अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था वास्तव में नियम-कानूनों से संचालित होती है या फिर ताकतवर राष्ट्रों की इच्छा ही वैश्विक न्याय का नया मानदंड बन चुकी है। निश्चित तौर पर वेनेज़ुएला पर … Read more

प्रेम चाहता हूँ…

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** प्रेम करना चाहता हूँ-उससे, जो सुकून दे…जिसके पास रूह हो प्यार भरी,जो समझे मन की थाहजो देखे मेरे प्रेम की राह। प्रेम करना चाहता हूँ-उससे, जो तैरे नैनों के सागर में…समझे अँखियों की आशा,हर पल महसूस करे मन की भाषाजो थाम ले बस मेरा हाथ,चले कदम-दर-कदम मेरे साथ। प्रेम करना चाहता … Read more

नया साल नया उत्साह लाया

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ ‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)… हर कोई ज़िन्दगी में सफ़र करता है, क्योंकि जीवन की कहानी भी यही है। चलना ही सच की निशानी है। समय-चक्र भी दिन, महीने, साल के बीत गए। नई उमंग, नए विचार नया-नया लगता है यहाँ संसार। “दादा भाई चलते हैं” कहीं … Read more

कृष्ण की बाल लीलाओं को समर्पित रही कल्पकथा काव्य संध्या

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सोनीपत (हरियाणा)। हिन्दी भाषा और सनातन संस्कृति हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था की २३०वीं आभासी काव्य गोष्ठी भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं को समर्पित रही। इसकी अध्यक्षता हल्द्वानी से प्रबुद्ध साहित्यकार गोपाल कृष्ण बागी ने की। उत्तरकाशी से विद्वत रचनाकार डॉ. अंजू सेमवाल ने मुख्य आतिथ्य का पदभार सम्हाला।संस्था की संवाद प्रभारी श्रीमती … Read more

अपना-पराया

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ दिल सच्चा हो अगर, उसका सब अच्छा होता,ईश्वर पर हो भरोसा, उसका सब अच्छा होता। दिल में हो मुहब्बत, अगर तो कष्ट नहीं होता,ईश्वर पर भरोसा, कोई काम अधूरा कहाँ होता। अजब यह दुनिया है, कोई सच्चा नहीं होता,कृष्ण मिल जाए जग में, इन्सान सच्चा न होता। मन में होता है मेरा … Read more

कण-कण शोणित दूँ मैं माटी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* छोटा-सा जीवन पाया है, कर दूँ चरण समर्पित भारत,कालचक्र के घने तम में, दीप बने मानवता आरत।एक अभिलाष, एक ही आशा, कण-कण शोणित दूँ मैं माटी-लिखूँ स्वर्ण गाथा त्यागों की, अमर बने शुभ दुर्जय भारत॥ थोड़ा-सा यह जीवन पाकर, तन मन अर्पित चरणों भारत,विषम समय के तमस पथों पर, … Read more

लघुकथा अलंकरण सम्मेलन में कईं रचनाकार सम्मानित

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पटना (बिहार)। अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच का अलंकरण सम्मेलन किलकारी भवन के सभागार में आयोजित किया गया। सम्मेलन के उद्घाटन कर्ता बिहार विधान परिषद के उप सभापति प्रो. रामवचन राय रहे।इस अवसर पर आपने कहा कि लघुकथा भी कहानी, उपन्यास का काम करती है। कहानी के भीतर लघुकथा मानो नैनो साइंस की तरह है।मुख्य … Read more