जनकनंदिनी की महिमा से गुंजायमान हुई काव्यगोष्ठी

सोनीपत (हरियाणा)। प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार (सोनीपत) के सौजन्य से २४६वीं साप्ताहिक काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। ‘जय माँ जानकी’ विषय पर हुए इस कार्यक्रम की अध्यक्षता उप्र की सुप्रसिद्ध साहित्यकार योगेश्वरी भारद्वाज ‘रेखा’ ने की। मुख्य अतिथि साहित्यकार दिनेश कुमार दुबे(छत्तीसगढ़) की … Read more

आँसू बहा लेता हूँ मैं

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ दर्द बहुत है तेरे जाने के बाद,हर पल दुखों का साया नजर आता हैटूट चुका हूँ मैं इतना, समझ में कुछ नहीं आता है,अब बस तेरी यादों में ‘आँसू’ बहा लेता हूँ मैं…। तेरे साथ बीते वह पल भी अजीब थे,छोटी-छोटी ‘उंगलियों’ को पकड़ कर चलता थासाथी तू मेरा स्वाभिमान … Read more

मौसम का सितम

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* मौसम सितम का हाल है ये,हर दिन रंग बदलते रहतेकभी प्रचंड ताप, गर्मी बढ़ाता,कभी रह-रहकर पानी बरसाताकभी आँधी लाकर मन-मौजीपन करता,कभी ओले, तो कभी तूफान लाता। जीना मुहाल हुआ है व्यक्ति का,गर्मी इतनी बढ़ी कि तापमान ४५ डिग्री जा पहुँचालगे जैसे अंगारों पर चल रहे हों,तापमान बढ़ता ही जा रहाअब कितने … Read more

रक्षा करें, लें संकल्प

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* हरा-भरा पर्यावरण, धरती का श्रृंगार।वृक्षारोपण मिल करें, दें जीवन उपहार॥ रक्षण धरती प्रकृति की, हम सबका दायित्व।हरियाली हो हर जगह, तभी सृष्टि अस्तित्व॥ धरा धाम जीवन धुरी, सहे सभी संताप।करें नमन पृथिवी दिवस, गिरि तरु नदियाँ आप॥ मिट्टी जल वन वायु से, चलता जीवन चक्र।इनके बिन जीवन जगत, इन … Read more

पत्नी

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** रात के ११ बज गए थे। गायत्री किचन में बर्तन धो रही थी, महिम अपने बिस्तर पर लेटा हुआ करवटें बदल रहा था।   वह मन ही मन में सोच रहा था, कि मेरी पत्नी को कितनी मेहनत करनी पड़ती है। सुबह के ५ बजे की उठी हुई अभी भी लगी हुई है। बेचारी … Read more

कलयुग की यही विडम्बना

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ मनुष्य न समझे मनुष्य को,रहें दूर सब अपनों से, करते आपस में भेद सदा। छोटे-छोटे स्वार्थ लिए,भाई, भाई को समझे नहीं,नारी को बहन न माने —कितनी नजरें फरेबी हैं!मन को देखे कौन यहाँ,सबकी बस तन पर नजर है। अपने ही अपनों के हित मेंतनिक नहीं संकोच करते,औरों के सपनों कीबलि चढ़ाने से … Read more

चाय है लाज़वाब

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** चाय तो चाय है, ये तो लाजवाब है,सेहत में बेमिसाल है, स्वाद में बेहिसाब है। सिर दर्द हो या बेदिली, सबका एक जवाब है,चाय लाजवाब है, चाय ही तो चाय है। अंग्रेजी में ग्रीन टी, हिन्दी में हरी चाय,मसाले वाली चाय, नींबू की खट्टी- मीठी चाय। अदरक वाली चाय, असम वाली चाय,तनाव … Read more

आस्था

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ******************************************** मन में आस्था भाव रख, करें ईश की भक्ति।दुर्गुण सारे दूर हों, बढ़े आत्म की शक्ति॥बढ़े आत्म की शक्ति, मुक्ति का द्वार खुलेगा।मिटे पाप संताप, आत्म आनंद मिलेगा॥कर लो स्वयं उपाय, इसी मानव जीवन में।जीवन है दुष्प्राप्य, भाव यह रखना मन में॥ रखके आस्था भाव जो, करता है शुभ कर्म।मिले सफलता … Read more

कवि गोष्ठी में साहित्यकारों ने बिखेरी सृजनात्मक ऊर्जा

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बोकारो (झारखण्ड)। बोकारो इस्पात संयंत्र के जनवृत ५ स्थित बोकारो इस्पात पुस्तकालय में साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से वातावरण को सरस बना दिया। मुख्य अतिथि शैलेश मिश्रा और विशिष्ट अतिथि आलोक कुमार रहे।   अतिथियों ने साहित्य को समाज का दर्पण बताते हुए रचनाकारों को अपनी प्रतिभा निखारने के … Read more

‘संवेदना’ मानवीय भावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति-डॉ. जयश्री शर्मा

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जयपुर (राजस्थान)। ‘संवेदना’ केवल एक काव्य संग्रह नहीं, बल्कि मानवीय भावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति है। ऐसी कृतियाँ समाज को संवेदनशील बनाने के साथ-साथ नई पीढ़ी को साहित्य के प्रति प्रेरित करती हैं।    यह बात वरिष्ठ साहित्यकार शशि मंगल के काव्य संग्रह ‘संवेदना’ का विमोचन साहित्यिक समारोह में करते हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं डॉ. … Read more