शिव प्रेम की डोरी

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** मन संवाद करूं मैं तुमसे, बंधो शिव प्रेम की डोरी से।तुम हो एक छोटे से बालक, बंधो न जोरा-जोरी से॥ डर से नहीं बदलते हो तुम प्रेम-तर्क से बदले हो,प्रेम के भूखे जन्म-जन्म से तड़प- कसक से बदले हो।। तुम्हें न भय जंजीरों का, खुश होते माँ की लोरी से,तुम हो एक छोटे से बालक, बंधो न जोरा-जोरी से…॥ … Read more

पेड़-पौधे ही सभी का जीवन

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** मेरा पर्यावरण, मेरी जान (विश्व पर्यावरण दिवस विशेष)… पेड़-पौधे ही सभी का जीवन है,जीव-जंतुओं की आक्सीजन है। इसको  बचाना बहुत ही जरुरी है,क्योंकि जीवन की यही कस्तूरी है। हरा-भरा पेड़ तो सुहाना मौसम है,इससे ही तो जिन्दगी का सिस्टम है। बरगद, नीम, तुलसी, पीपल, ऐलोवेरा,पेड़-पौधे गुणकारी पक्षियों का बसेरा। बहुत सारे जीवों … Read more

आज मुझे ही काट रहा

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* मेरा पर्यावरण, मेरी जान (विश्व पर्यावरण दिवस विशेष)… मेरी गोद में खेला तू, मैंने छाँव दी, पानी दिया,  तेरी साँस के लिए मैंने जंगल, नदी, हवा दियाआज तू बड़ा हो गया, तो मुझे ही काट रहा है,  मेरा सीना चीरकर विकास की बात कर रहा है। प्लास्टिक की चादर ओढ़ा दी, धुएं … Read more

प्रतिबिंब

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** सरिता के पानी में झाँकासोचा स्वयं से बात करूँ,क्या है मेरा वर्तमान ?प्रतिबिंब देख कुछ मनन करूँ। पहले से कितना बदल गईमुझमें इतना क्यों अंतर है,प्रतिबिंब देख सोचा मैंनेक्या मेरा ही यह चितवन है। बोला मन दर्पण सुन मुझसे-क्या तुमको सच का ज्ञान नहीं,समय, शरीर और मन हैं अस्थिरइसमें संशय ज़रा नहीं। … Read more

नजरिया बदले मनुष्य

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ हर एक शब्द का अपना दृष्टिकोण होता है, वह अर्थ को भी व्यर्थ में बदलता है। ज़िन्दगी के इन २ पलों में सिर्फ ४ दिन ही मिलते हैं, और यहाँ जीवन, जो कभी भी रुकता नहीं है; वह तो अनंत यात्रा पर ही होता है। हम आज-कल की भाषा में … Read more

‘जल ही जीवन’, फिर भविष्य प्यासा क्यों ?

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* ‘जल ही जीवन’ है यही विश्वास मानव का,बूंद-बूंद का महत्व है आजीवन पानी का जैसे पानी बिना मछली नहीं,वैसे ही पानी बिना जीवन नहीं। चारों तरफ हाहा-कार मचा बिन पानी,बादल जब बरसें तो जग झूमने लगे खुशी-खुशी। नज़र आए चारों तरफ हरियाली ही हरियाली,प्यास बुझा कर नव जीवन प्रदान करती। जीवन … Read more

माता-पिता ‘ईश्वर का वरदान’

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* हमारा भविष्य, ताकत और प्रेरणा (विश्व माता-पिता दिवस विशेष)…. माँ की ममता, पिता का साया,ईश्वर का सबसे सुन्दर वरदानइनका आशीष देता जीवन में,सुख, शांति, सफलता और सम्मान।  अपने सपनों को दरकिनार कर,देते हमको ये नई उड़ानबदले में बस ख्वाहिश इतनी,हमको मिले सुंदर जहान।  माता-पिता की सीख और संस्कार,जीवन जीना सिखलाते हैंधूप अगर जीवन … Read more

माता-पिता कुल श्रेष्ठ हमारे

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** हमारा भविष्य, ताकत और प्रेरणा (विश्व माता-पिता दिवस विशेष)… मात-पिता मेरे भगवान, हमें बनाते शिष्ट बलवानभूत-भविष्य संग वर्तमान, गढ़ें संस्कार हो सामर्थ्यवान। माँ ही पहली शिक्षक मेरी, पालन पोषण जीवन धुरीपिता ही ताकत प्रेरणा पूरी,माँ से संभव स्वप्न अधूरी। पिता भाग्य के प्रथम प्रभारी, माता भविष्य की बड़ी पुजारीदोनों जीवन के बड़े उपकारी, चरण … Read more

काव्य गोष्ठी संग हुआ कल्पकथा मासिक सम्मान समारोह

सोनीपत (हरियाणा)। राष्ट्र, हिन्दी भाषा एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार ने जून २०२६ का मासिक सम्मान समारोह किया। इस अवसर पर २५२वीं साप्ताहिक काव्य गोष्ठी का भी हुई। लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार डॉ. गजेंद्र हरिहरनों ‘दीप’ की अध्यक्षता एवं वरिष्ठ पत्रकार रघुवंशमणि सिंह के मुख्य आतिथ्य में यह हुआ।  परिवार की संवाद … Read more

योगेंद्र नाथ शुक्ल की लघुकथाओं में भाषा-शिल्प की सादगी के साथ गहराई और मौलिकता

इंदौर (मप्र)। लघुकथा लिखना आसान नहीं कठिन और चुनौतीपूर्ण कार्य है। एक गंभीर लघुकथा लिखने में लघुकथाकार को लंबा समय लग जाता है। डाॅ. योगेंद्रनाथ शुक्ल की लिखी लघुकथाओं में भाषा, शिल्प की सादगी के साथ-साथ गहराई और मौलिकता है जो उन्हें विशिष्ट बनाती है।     वरिष्ठ साहित्यकार सूर्यकांत नागर ने यह बात इंदौर प्रेस … Read more