‘मुट्ठी भी मिट्टी’ कहानी बताती है कि हम कितने खोखले-डॉ. गजभिये

भोपाल (मप्र)। ‘मुट्ठी भी मिट्टी’ अति आधुनिक युग की कहानी है। इसमें कोई दो राय नहीं कि आधुनिक व्यवस्था में मनुष्य की भावनाएं मरती जा रही हैं। महानगरों में जीवन सिमट गया है। आधुनिक समाज व्यवस्था में यदि आपके पास पैसे नहीं हैं तो पीने का पानी भी नहीं मिलेगा। इस कहानी में प्रकृति का … Read more

स्वर्ग है शाश्वत सुख और दिव्य चेतना का लोक

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* भारतीय वैदिक, पौराणिक एवं आध्यात्मिक परम्परा में ‘स्वर्ग’ केवल एक भौतिक स्थान नहीं, अपितु पुण्य, सदाचार, धर्म, न्याय, प्रेम और दिव्य चेतना का परम प्रतीक माना गया है। यह वह अलौकिक लोक है, जहाँ दुःख, क्लेश, रोग, शोक, भय और अभाव का प्रवेश नहीं होता। स्वर्ग को देवताओं का … Read more

सपने हौसलों से पूरे होते

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** हौसलों में है तेरे अभी दम बहुत,तू न थकेगा कभी, न रुकेगा कभीजब तलक मन में रहती है दुर्बलता,दु:ख में होता है दु:ख, सुख में है ममता। जग में सुख भी सदा रहने वाला नहीं,दु:ख भी जीवन में रहता हमेशा नहींछाया से माया से दोनों होते सदा,आते-जाते ही रहते हैं सुख और … Read more

पटना उच्च न्या. में हिंदी का संघर्ष अब पहुंचा सीबीआई के द्वार

पटना (बिहार)। न्याय में हिंदी के लिए संघर्षरत अधिवक्ता इंद्रदेव प्रसाद ने बताया कि बार-बार मना करने के बाद भी वे हिंदी में ही आवेदन दाखिल करते आ रहे हैं, जिसका उद्देश्य हिंदी को उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों की भाषा बनाना है, जिसे लुका-छिपा कर उनके विरुद्ध कुछ झूठा आरोप गढ़ा गया है और … Read more

घर लौटने की आख़िरी रोशनी

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** उसके भीतरएक उम्र नहीं,कई-कई उम्रें टूटती रहती हैंबिना किसी आवाज़ के। चेहरे पर सामान्य दिनों की धूल जमी रहती है,पर आत्मा मेंलगातार गिरते रहते हैंकुछ अदृश्य मकान। मैंने देखा है,कुछ लोग पूरी ज़िंदगीसिर्फ़ लौटने की इच्छा में जीते हैं। वे अपने भीतरएक पुराना आँगन बचाए रखते हैं,जहाँ माँ की पुकार अब भी … Read more

आदि अनंत महाकल्प मैं

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** हर समस्या का विकल्प मैं, हर निदान का संकल्प मैंलाचारों का एक वृक्षकल्प मैं, निर्भय हूँ, सत्य हूँ ब्रह्मकल्प मैं। न्याय हूँ, साकार हूँ प्रतिकल्प मैं, अन्याय का प्रतिकार, नरकल्प मैंराक्षसों का नाश हूँ, ग्रहकल्प मैं, पारदर्शी प्राण हूँ, तरुकल्प मैं। जागता मैं देश हूँ, न मृतकल्प मैं, स्वस्थ हूँ, आश्वस्त, न रोगीकल्प मैंकर्म … Read more

शिव प्रेम की डोरी

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** मन संवाद करूं मैं तुमसे, बंधो शिव प्रेम की डोरी से।तुम हो एक छोटे से बालक, बंधो न जोरा-जोरी से॥ डर से नहीं बदलते हो तुम प्रेम-तर्क से बदले हो,प्रेम के भूखे जन्म-जन्म से तड़प- कसक से बदले हो।। तुम्हें न भय जंजीरों का, खुश होते माँ की लोरी से,तुम हो एक छोटे से बालक, बंधो न जोरा-जोरी से…॥ … Read more

पेड़-पौधे ही सभी का जीवन

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** मेरा पर्यावरण, मेरी जान (विश्व पर्यावरण दिवस विशेष)… पेड़-पौधे ही सभी का जीवन है,जीव-जंतुओं की आक्सीजन है। इसको  बचाना बहुत ही जरुरी है,क्योंकि जीवन की यही कस्तूरी है। हरा-भरा पेड़ तो सुहाना मौसम है,इससे ही तो जिन्दगी का सिस्टम है। बरगद, नीम, तुलसी, पीपल, ऐलोवेरा,पेड़-पौधे गुणकारी पक्षियों का बसेरा। बहुत सारे जीवों … Read more

आज मुझे ही काट रहा

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* मेरा पर्यावरण, मेरी जान (विश्व पर्यावरण दिवस विशेष)… मेरी गोद में खेला तू, मैंने छाँव दी, पानी दिया,  तेरी साँस के लिए मैंने जंगल, नदी, हवा दियाआज तू बड़ा हो गया, तो मुझे ही काट रहा है,  मेरा सीना चीरकर विकास की बात कर रहा है। प्लास्टिक की चादर ओढ़ा दी, धुएं … Read more

प्रतिबिंब

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** सरिता के पानी में झाँकासोचा स्वयं से बात करूँ,क्या है मेरा वर्तमान ?प्रतिबिंब देख कुछ मनन करूँ। पहले से कितना बदल गईमुझमें इतना क्यों अंतर है,प्रतिबिंब देख सोचा मैंनेक्या मेरा ही यह चितवन है। बोला मन दर्पण सुन मुझसे-क्या तुमको सच का ज्ञान नहीं,समय, शरीर और मन हैं अस्थिरइसमें संशय ज़रा नहीं। … Read more