स्वागत करें प्रिय वसंत का
पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ ज़िंदगी एक वसंत… (वसंत पंचमी विशेष)… प्रिय वसंत, तुम कब सेबर्फीले हो गए हो ?‘ग्लोबल वार्मिंग’ से घबराकर,कुहासे को साथ में लेकरओस की चादर ओढ़ कर,धुंध और बादलों के रथ परहोकर सवार,सूरज को डरा करउसकी उष्ण किरणों को धमकाकर,बर्फीली हवा के झोंके सेक्या तुम अपना रास्ताभटक गए हो…! कहाँ खो गए हो … Read more