जब सिपाही ही चोर हो…
डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** ‘जब सिपाही ही चोर हो’ यह वाक्य केवल एक मुहावरा नहीं, बल्कि किसी भी राष्ट्र-राज्य की आत्मा पर लगा वह गहरा घाव है, जो उसके संस्थागत ढांचे, नैतिक आधार और लोकतांत्रिक विश्वास को भीतर से क्षत-विक्षत कर देता है। आधुनिक राष्ट्रों की स्थिरता का आधार केवल उनकी सैन्य शक्ति, आर्थिक क्षमता … Read more