यथार्थ को स्वीकार करने वाली कहानी है ‘लेमिनार फ्लो’

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भोपाल (मप्र)। यह संवेदनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक यथार्थ को स्वीकार करने वाली कहानी है। कथानक बुज़ुर्गों की विडम्बना पर आधारित है। कहानी में जीवन का दर्शन है। ठहरे हुए समय में जीवन कठिन हो जाता है, इसे बहने दो। यही भौतिकी में द्रव्य यांत्रिकी का सिद्धांत भी है।मुख्य अतिथि डॉ. पद्मा शर्मा ने शिरीन भावसार … Read more

शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया और गिरता स्तर

डॉ. रामवृक्ष सिंहलखनऊ (उप्र)******************************* मेरे अनुभव और मतानुसार शिक्षकों, विशेषकर महाविद्यालयीन शिक्षा के स्तर में गिरावट का मुख्य कारण है – शिक्षकों के चयन में धाँधली, भाई-भतीजावाद, प्रतिभा एवं योग्यता की अनदेखी करके केवल अपने चहेतों की नियुक्ति करने का व्यापक प्रचलन। हालांकि, स्नातक स्तर के संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए राष्ट्रीय स्तर … Read more

शान्ति का शुभदीप जलाओ

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* युद्ध और शांति-जरूरी क्या ?… शांति का शुभदीप जलाओ, प्रेम का संदेश जगाओ,मानवता की राहों पर फिर से साहस कदम बढ़ाओ।युद्ध विषम विभीषिका से यही सीख मिलती है दुनिया-नफरत की ज्वाला त्यागकर, करुणा का सागर बहाओ॥ जलते घरों की राख में तुम सिसकियाँ फिर से जगाओ,टूटी छत के नीचे … Read more

दुनिया चाहती अमन

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** युद्ध और शांति-जरूरी क्या ?… पूरी दुनिया चाहती अमन, चैन व शांति,लडा़ई, झगड़ा, युद्ध बिखेरता है अशांतिजो खुद को समझते बादशाह, उनमें ही भ्रांति,स्वाभिमान हर किसी का होता जो लाए क्रांति। हम भारत वंशी जहाँ बुद्ध, जैन, गाँधी का पैग़ाम है शांति,न युद्ध न जंग, न कोई दबाव लक्ष्य … Read more

कन्या पूजन

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* “डॉक्टर साब! क्या पाँच तारीख के पहले आपरेशन नहीं हो सकता ?”“नहीं माताजी नहीं! उसके पहले की मेरी सारी डेट्स बुक हैं। पर आपको पाँच तारीख के बाद क्या प्रॉब्लम है ?”“दरअसल, डॉक्टर साब! पाँच तारीख से नवरात्रि शुरु हो रही है, और मेरे घर में बहुत श्रद्धा से नवरात्रि मनाई … Read more

युद्ध हर दृष्टि से विनाशकारी

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** युद्ध और शांति-जरूरी क्या ? वर्तमान समय में पूरा विश्व, युद्ध की विभीषिका के परिणामों से प्रभावित हो रहा है। हमारे देश भारत में भी कोई ‘लॉकडाउन’ की बात कर रहा है तो कोई एलपीजी गैस, तो कोई पेट्रोल, तो कोई डीजल के लिए कतार में लगा हुआ है। सब तरफ अफवाहों … Read more

‘डॉल मण्डी विशेषांक’ अंक हेतु रचनाएं आमंत्रित

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फतेहगढ़ (उप्र)। ‘प्रबोधिका’ पत्रिका के ‘डॉल मण्डी विशेषांक’ हेतु रचनाएं सादर आमंत्रित हैं। इच्छुक साहित्यकारों को नाम एवं सम्पर्क नम्बर पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. राजकुमार सिंह (९४५२४३६६४६) को प्रेषित करना है। पत्रिका की ओर से डॉ. दिनेश पाठक ‘शशि’ (मथुरा) ने बताया कि विशेषांक (वेश्याओं के जीवन पर एवं देवदासी प्रथा आदि पर आधारित) … Read more

हिन्दी साहित्य में आदिवासी विमर्श पर रचनाएं ३० तक

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प्रयागराज (उप्र)। हिन्दी साहित्य में विविध विमर्श श्रृंखला के अन्तर्गत विश्व हिन्दी साहित्य सेवा संस्थान द्वारा शीघ्र ही एक पुस्तक प्रकाशित की जा रही है। उपरोक्त विषय पर शोधालेख प्रकाशित कराने हेतु विद्वतजन ३० अप्रैल तक शोधालेख भेज सकते हैं। संस्थान के सचिव (९३३५१५५ ९४९) के अनुसार प्रकाशन पूर्णत: निःशुल्क है। पुस्तक की आभासी प्रति … Read more

सामाजिक कलंक है मानव अंग तस्करी

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ लालच का यह खेल देखकर बहुत दुःख होता है। अपनी महत्त्वाकांक्षा के लिए इंसान कितना गिर सकता है, यह सोचकर मन विचलित हो उठता है। देश के नोएडा, दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, मेरठ आदि न जाने कितने शहरों-राज्यों में मानव अंगों की अवैध खरीद-फरोख्त का धंधा जोरों पर है।हाल ही में … Read more

द्रुपदसुता स्वयंवर

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** द्रुपदसुता के स्वयंवर के लिए शर्त रखी थी एक,जल में बिम्ब देख शर से मछली की आँख दे भेदउसी वीर से मैं अपनी पुत्री का विवाह करूँगा,और द्रोण से फिर अपने अपमान का बदला लूँगा। मछली की परछाईं देख कर, किया आँख का भेदन,ब्राह्मण वेश में आया था वो, नाम था उसका … Read more