उड़ना चाहता हूँ आसमान तक

कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,हैदराबाद (तेलंगाना)*************************************************** मन कुछ कहता है… (‘विश्व इच्छा दिवस’ विशेष)… मन कुछ कहता है…खामोशियों में भी एक शोर रहता हैइच्छाओं के दीप जलते हैं भीतर,हर सपना आँखों में चोर रहता है। कभी उड़ना चाहता हूँ आसमान तक,कभी धरती से जुड़कर ठहर जाता हूँमन के कोनों में अनगिनत ख्वाहिशें,हर रोज़ नई राह पर … Read more

तू तो कमाल

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** चाय तू तो कमाल ही करती है,सुबह की पहली चायहोंठों से कप को लगाते ही,दिल कह उठता है वाह चाय!तेरा तो कोई जवाब ही नहीं,एक कप चाय केवल दूधचाय पत्ती, चीनी का मिश्रण ही नहीं है,वरन् आपसी रिश्तों की शुरुआत हैचाय तू तो कमाल ही करती है…। सुबह-सुबह शरीर में ताजगी भर … Read more

जागो, अंधकार हरो

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* जागो, ज्वाला बन कर अंधकार का आवरण सब हरो,लिखो स्वर्णिम गाथा ऐसी, युग-युग तक स्मृति में धरोमिट्टी की सौंधी खुशबू जीवन का नाता हो गाढ़ा,राष्ट्र-प्रेम की वीणा लेकर हर दिल में तुम भक्ति भरो। सीमा पर जो अडिग खड़े हैं, उनमें साहस शौर्य भरो,डरो नहीं विपदाओं से, सत्य-सुपथ पर … Read more

‘गूँज’ विमोचित, व्यंग्यकार सुनील जैन ‘राही’ विभूषित

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मुम्बई (महाराष्ट्र)। प्रणेता साहित्य न्यास द्वारा शर्मा न्यू आर्ट कॉलेज (शक्तिनगर) में श्री सिसोदिया के कहानी संग्रह ‘गूँज’ के विमोचन के साथ काव्य गोष्ठी भी आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. शंभू पवार ने की। इस गोष्ठी में ‘प्रणेता गौरव सम्मान’ से प्रसिद्ध व्यंग्यकार सुनील जैन ‘राही’ को विभूषित किया गया।साहित्यकार डॉ. हरीश नवल … Read more

हिंदी पत्रकारिता के २०० वर्षों की समृद्ध संग्रामगाथा

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** हिंदी पत्रकारिता की दो सौ वर्षों की यात्रा केवल एक भाषाई या संचार माध्यम का विकास नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज, उसकी चेतना, उसके संघर्षों और उसके लोकतांत्रिक विकास की गहरी और बहुआयामी कथा है। १८२६ में कलकत्ता से प्रकाशित ‘उदन्त मार्तण्ड’ से आरंभ हुई यह परंपरा उस समय की … Read more

ना जाने क्या हो तुम

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ********************************************* ना जाने क्या हो तुम,मेरे जीवन के हिस्से मेंकौन-सा भाग हो तुम,ना जाने मेरे क्या हो तुम। रहती हो अगर सामने,समय दूर हो जाता हैकब दिन हो कब रात,पता नहीं चल पाता है। मेरे घर की हो तुलसी,या जीवन में आई खुशीतुम जो भी हो,तुम्हीं हो मेरी हँसी। मेरे गमों … Read more

अपना कौन, सब अकेले

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ अब मन नहीं करता,किसी को अपना कहने कारिश्ते बेईमान-से लगते हैं,हर बात अपरिचित-सी लगती है। अब तो अपनी परछाई भी,पराई-सी प्रतीत होती हैआइने में अपना ही चेहरा,धुंधला, थका-थका दिखता है। हम भी अब खुद से,अनजाने हो चलेमन अपना नहीं रहा—बस अपने होने का आभास बचा है। पास बैठा इंसान भी,अब मनुष्य नहीं … Read more

कालिदास ने सिद्ध किया कि प्रेम लौकिक जीवन की वस्तु नहीं-डॉ. सिंह

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देहरादून (उत्तराखंड)। कालिदास सही मायने में पूरे संसार में श्रृंगार के महाकवि के रूप में देखे जाते रहे हैं। वे अपनी अद्भुत रचनाओं से भारत के महान कवि तथा नवरत्न कवि के रूप में प्रसिद्ध रहे। कालिदास ने अपनी रचनाओं में लोक जीवन को समुचित रूप से उतारा और उनका लोक व्यवहार भी उत्कृष्ट है। … Read more

डॉ. स्वाति पांडेय ‘प्रीत’ को मिला साहित्य परिषद और कैलाश कल्पित सम्मान

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लखीमपुर खीरी (उप्र)। अ.भा. साहित्य परिषद अवध प्रांत द्वारा लखीमपुर खीरी की साहित्यकार डॉ. स्वाति पांडेय ‘प्रीत’ को उनके साहित्यिक, शैक्षिक और सामाजिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह द्वारका प्रसाद रस्तोगी और रमेश पाण्डेय नें दिया। ‘प्रीत’ को डॉ. हिमांशु सक्सेना ‘अर्श लखनवी’ ने कैलाश कल्पित सम्मान देकर उनके कार्यों की सराहना की। … Read more

आशा, करुणा और मानवीय मूल्यों के पुनर्जागरण का अवसर

ललित गर्गदिल्ली*********************************** ‘विश्व इच्छा दिवस’ (२९ अप्रैल) विशेष…. हर वर्ष २९ अप्रैल को मनाया जाने ‘विश्व इच्छा दिवस’ मानवता के उन कोमल स्पंदनों को अभिव्यक्त करता है, जो हमें एक-दूसरे से जोड़ते हैं। यह संवेदनशीलता, करुणा और आशा का वैश्विक अभियान है। इस दिन का मूल उद्देश्य उन बच्चों के जीवन में खुशी और सकारात्मक … Read more