वो नदी के किनारे

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* वो बचपन की यादें, नदी के किनारे।कहाँ गये वो, रोशनी के नजारे॥ गर्मी का मौसम, वो नदिया की धारा,गाँवों की नदियों का, सुंदर नजारा।उतर आये पानी में, लेकर सहारे,वो बचपन की यादें, नदी के किनारे…॥ बातों ही बातों में हँसते-हँसाते,अठखेलियाँ करके गाने सुनाते।गले से लगाते ये,बाँहें पसारे,वो बचपन की … Read more

ढूंढे आश्रय जीव

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* ढूंढे आश्रय जीव, सूर्य भी खूब  तपाता।सूखे ताल तडाग, ताप बढ़ता ही  जाता॥सूने गलियाँ गाँव, आसमां धरती  तपते।उमस बढ़ी चहुँओर, छाँव को खग मृग तकते॥ सूखे नदिया ताल, वृक्ष सब झुलस  रहे  हैं।बिन पानी सब सून, सभी जन तड़प रहे हैं॥जीव सभी बेहाल, स्वेद तन से  बहता है।बिन आश्रय अरु नीर, जीव सब कुछ सहता है॥ तीव्र हुई अब धूप, लगे ज्यों आग  बरसती।कब बरसेंगे मेघ, धरा भी खूब तरसती॥काट दिए सब वृक्ष, मनुज छाया को तरसे।आश्रय बची न ठौर, मेघ भी कैसे  बरसे॥ परिचय-पेशे से अर्द्ध … Read more

आँखों में धूल झोंक जगत

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* आँखों में धूल झोंक जगत को, कितने लोग इतराते हैं, मीठी बोली की चाशनी लेकर, भीतर विष बरसाते हैंसत्य खड़ा चौराहे पर चुपचाप है तमाशा देख रहा, ऊँची दुकानें फीके पकवान, फिर  भी मेले लगाते हैं। नाक कटाकर भी कुछ जन तो, बस अपनी धाक जमाते हैं, घर का भेदी बनकर अपने, दीवारों  को ढहवाते हैंस्वार्थ नदी बनकर बहता है मानस के सूखे आँगन में, थाली में छेद वही करते जो रोटी रोज़ ही खाते हैं। दाल न गलती जब मेहनत … Read more

गांधी नगर में हुआ रजत जयंती सम्मान समारोह व कवि सम्मेलन

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गांधी नगर (गुजरात)। हिन्दी साहित्य अकादमी गांधी नगर एवं अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य संस्थान गुजरात (अहमदाबाद) के संयुक्त तत्वावधान में रजत जयंती सम्मान समारोह एवं राष्ट्रीय हिन्दी कवि सम्मेलन ब्रह्माणी कृपा मेमोरियल हॉल (कड़ी सर्व विश्वविद्यालय, गांधी नगर) में आयोजित किया गया। अध्यक्षता संस्थान के संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. चन्द्रपालसिंह यादव ने की।    इस कार्यक्रम … Read more

जय का वरण

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* विपदाओं से लड़कर, जय को तुम पा जाओ।मंज़िल होगी पास, सफलता गह हर्षाओ॥ विपदाएँ तो नित ही मंगलगान सुनाती हैं,संघर्षों के भावों को, वे रोज़ जगाती हैं।जीवन हो खुशहाल, यही सबकी है चाहत,जो डर जाता उसको ही, वे रोज़ सताती हैं।साहस से प्रियवर तुम तो पूरे भर जाओ,मंज़िल होगी पास, सफलता … Read more

कल्पकथा की ‘संवाद यात्रा’ ने गोरखपुर में जगाई साहित्यिक राष्ट्र चेतना

सोनीपत (हरियाणा)। प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की बहुआयामी ‘संवाद यात्रा’ का भव्य आयोजन गोरखपुर की पावन धरती पर रामा कृष्णा गेस्ट हाउस (राम जानकी नगर, गोरखनाथ) में गरिमामय वातावरण के मध्य हुआ। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. श्याम बिहारी मिश्र के संयोजन में इस त्रिदिवसीय साहित्यिक एवं … Read more

विकास की वातानुकूलित आत्महत्या

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** मनुष्य बड़ा बुद्धिमान प्राणी है। इतना बुद्धिमान, कि उसने अपने जीवन को आरामदायक बनाने के लिए ऐसी-ऐसी चीज़ें बना डालीं, जिनसे अंततः उसका जीवन ही असुविधाजनक होने लगा। यह वही प्राणी है, जो पहले पेड़ के नीचे बैठकर ठंडी हवा खाता था, फिर उसने पेड़ काटकर वहाँ इमारत बनाई, इमारत गर्म … Read more

जीत का नशा…

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** मि. गुप्ता ने अपने इकलौते बेटे आरव को बचपन से ही एक ही बात घुट्टी की तरह पिलाई थी, कि जीवन में तुम्हें सदा प्रथम आना है। जीत का नशा मीठा ज़हर होता है। और मिस्टर गुप्ता ने यही अपने लाल को घोल कर पिलाया था।    साइंस एक्जिबिशन के कॉम्पीटिशन में आरव का प्रोजेक्ट … Read more

कलम तोड़ना

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* कलम तोड़ना हो सके, जब सच का आवेग।सच्चा ही तो दे सके, दुनिया को शुभ नेग॥ कलम तोड़ना नित फले, जो जग को सौगात।जिससे शोभित दिन सदा, और दिव्य हो रात॥ कलम तोड़ना हो सुखद, मंगलकारी गीत।आओ! हम गतिमय रहें, बनें धर्म के मीत॥ कलम तोड़ना हित रचे, नष्ट करे जो … Read more

‘डिजिटल युग में हिंदी लघुकथा’ विषय पर हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी

अजमेर (राजस्थान)। शब्दभूमि प्रकाशन द्वारा ‘डिजिटल युग में हिंदी लघुकथा’ विषय पर राष्ट्रीय आभासी संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी में देशभर के साहित्यकारों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने हिंदी लघुकथा, डिजिटल माध्यमों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव पर विचार व्यक्त किए।     इसमें संचालिका गायत्री उपाध्याय ने कहा कि डिजिटल मंचों ने हिंदी लघुकथा को नए पाठक … Read more