हम वास्तव में स्वतंत्र हैं ?

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)… आज हमारा देश स्वतंत्र है,पर क्या हम वास्तव में स्वतंत्र हैं ?कहने को आज लोकतंत्र है,पर क्या हम वास्तव में स्वतंत्र हैं ? मेरे ख्याल से तो नहीं, बिलकुल नहीं,हम आज भी परतंत्र हैंभले ही अंग्रेजों से मुक्ति मिल गई,हम आज भी नहीं स्वतंत्र … Read more

पुण्य धरा है हिन्द

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)… आन बान अरु शान, तिरंगा मान हमारा।हमको इस पर गर्व, हमें प्राणों से प्यारा।तीन रंग का मेल, शान से यह लहराता।चक्र सुशोभित मध्य, सभी के मन को भाता॥ केसरिया है रंग, शौर्य को ये बतलाता।श्वेत रंग है मध्य, हृदय में शान्ति बढ़ाता।हरित वर्ण … Read more

बसंतोत्सव में बही काव्यगंगा

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प्रयागराज (उप्र)। माघ मेला प्रयागराज में श्री देवराहा बाबा सेवाश्रम शिविर में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें देर रात तक काव्य गंगा प्रवाहित होती रही। सभी कवियों को अंगवस्त्र, श्री देवरहा बाबा साहित्य और सम्मान राशि देकर अभिनंदित किया गया।सेवाश्रम के संस्थापक श्री गुरुदेव भगवान की जन्म जयंती पर बसंतोत्सव पर डॉ. शंभूनाथ त्रिपाठी … Read more

पुस्तकें व्यक्तित्व के साथ चरित्र निर्माण का भी सशक्त माध्यम-प्रो. पाल

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कुरुक्षेत्र (हरियाणा)। पुस्तकें केवल जानकारी का स्रोत नहीं, बल्कि व्यक्तित्व एवं चरित्र निर्माण का सशक्त माध्यम भी हैं। आज के डिजिटल युग में भी पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है। साहित्य दर्शन, विज्ञान और सम-सामयिक विषयों से संबंधित पुस्तकों का भी अध्ययन करें, ताकि व्यापक और संतुलित दृष्टिकोण बन सके।यह विचार विवि के कुलसचिव … Read more

हिन्दी में देश की संवेदनाएँ और करुणा की अभिव्यक्ति-राज्यपाल

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बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन महाधिवेशन… पटना (बिहार)। देश में सभी भारतीय भाषाओं की उन्नति हो, यह आवश्यक है, किंतु एक स्वतंत्र राष्ट्र के लिए आवश्यक है कि देश की एक भाषा को इस तरह अवश्य विकसित किया जाए, जिसमें पूरा देश संवाद कर सके और हिन्दी यह कार्य कर रही है। इसमें देश की संवेदनाएँ … Read more

याद ही रह जाती

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** कौन-सी बात कैसीकब-कहाँ हो जाती है,कभी सोचा नहीं जोबात सुनी जाती है। जैसी चाही थी कभीदेखी न वैसी दुनिया,छोड़ कर जो गया बसयाद ही रह जाती है। अपना जब छोड़ कोईजाता है इस दुनिया से,कैसे खुद की हँसीहोठों से चली जाती है। जिसको देखा था अभीकल तलक हँसते-गाते,आज मिट्टी वो बनेआह निकल … Read more

अभिभावक समझें-बच्चा प्रतिष्ठा का साधन नहीं, स्वतंत्र व्यक्तित्व

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** जीवन को दिशा देने वाली शिक्षा यदि भय, हिंसा और दमन का पर्याय बन जाए तो वह सभ्यता की सबसे बड़ी विडम्बना कही जाएगी। हाल के वर्षों में पढ़ाई के नाम पर बच्चों पर बढ़ते दबाव, घर और शाला में हिंसक व्यवहार तथा प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ ने शिक्षा की आत्मा पर … Read more

‘पंजाब केसरी’ अमर बलिदान तुम्हारा

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* अग्नि-स्फुलिंग बन जाग उठे, जब लाला जी रण में आए,जुल्मों की हर काली रात, लौ दीप-शिखा बन चहुँ छाए।जन-जन के अन्तर्मन जागी, स्वतंत्र चेतनता की धारा-भारत माता के चरणों में, बस शीश सदा ही झुक जाए॥ लाठी-घावों को सहकर भी, दृढ़ पग लाला आगे बढ़ते,सत्य-अहिंसा की ढाल लिए, क्रांतिवीर … Read more

यूजीसी:देश पराया

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* मेरी सब्र की उम्मीद का पैमाना, धीरे-धीरे टूट रहा है,नक्कारखाने में आवाज़ तूती की, कोई भी न सुन रहा हैनहीं जरूरत देश को मेरी, ऐसा मुझको लग रहा है,चला जाऊंगा परदेस एक दिन, ख्याल दिल में उठ रहा है। सवर्ण होना गुनाह है मेरा, मुझे देश समझा रहा है,अज्ञानी को दे … Read more

‘गणतंत्रोत्सव’ पर हुई राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत रचनाओं की प्रस्तुति

सोनीपत (हरियाणा)। पावन ‘गणतंत्र दिवस’ की पूर्व संध्या पर कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार के तत्वावधान में २३३ वीं कल्पकथा साप्ताहिक आभासी काव्यगोष्ठी ‘गणतंत्रोत्सव’ अत्यंत गरिमामय एवं राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत वातावरण में हुई। यह साहित्यिक आयोजन सतत् राष्ट्रभावना की दिव्य प्रवाहधारा के साथ चलता रहा। परिवार की संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह ने बताया कि … Read more