बाल मन के बदलाव और कारण पर ध्यान केंद्रित करना होगा हमें

परिचर्चा…. इंदौर (मप्र)। इंदौर (मप्र)। बाल मन का बदलना है तो इसे हम आरोप की तरह क्यों लेते हैं, क्या हम इसे उपहार की तरह नहीं ले सकते ? अगर बाल मन नहीं बदलेगा, तो क्या हम बदलेंगे ? हाँ, चिंतन का विषय यह है कि जिस गति से आज के बच्चों का मन बदल … Read more

कल्पकथा काव्य गोष्ठी में उड़ी हास्य की फुहार, व्यंग्य के तीर

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पानीपत (हरियाणा)। कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार द्वारा २३७वीं साप्ताहिक आभासी काव्य गोष्ठी आयोजित की गई, जो हास्य व्यंग्य के हँसगुल्लों का गुलदस्ता सिद्ध हुई। इसमें मुख्य अतिथि मेघा अग्रवाल रहीं।संस्था की संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह ने बताया कि कार्यक्रम में हर सृजनकार ने अलग रंग बिखेरा और हर पंक्ति ने श्रोताओं को ठहाके लगाने … Read more

नारी की पहचान रंगों में

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** रंगों की उन्मुक्त हवाएँजब आती हैं,फागुन का संदेश,फिर वो लाती हैंआँगन-आँगन जब गूँज उठते हैं,उमंग, स्नेह और हँसी के फव्वारे विशेष। पर होली इस बार कुछ कहती,नारी की पहचान रंगों में भी हो जातीवह गालों पर गुलाल से ज्यादा,अपने सपनों को रंगतीकोमल मुस्कान को दृढ़ बनाती,मीरा-सा अटूट विश्वास है‌ रखतीदुर्हर मन में … Read more

वैवाहिक समारोह में बढ़ता दिखावा नुकसानदायी

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ भारतीय संस्कृति में विवाह एक पवित्र, अटूट और आध्यात्मिक संस्कार है, जो २ आत्माओं और परिवारों को सात जन्मों के लिए जोड़ता है। विवाह में अग्नि को साक्षी मान कर सप्तपदी और सात वचन ही विवाह की स्थिरता का मुख्य स्तंभ होता है, जो वर-वधू को जीवनभर साथ निभाने का वादा कराते … Read more

मुझे नहीं फ़िक्र मेरे प्रियतम

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* मेरे सपनों में जो आते, वही हैं मेरे प्रियतम,हूँ मैं एकमात्र उनकी, वह मेरा यह अधिकार सदा, अब परस्पर ही प्रियतम। वे मिलें या न मिलें, इसकी चिंता नहीं है अब मेरे प्रियतम,प्राणों का सौदा हो गया अब क्षण में, कुछ ऐसे ही मेरे प्रियतम। अब मैं जीती हूँ सिर्फ उनके … Read more

कुछ तो बात होगी

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** फूलों की खुशबू मेंतितलियों ने बताई होगी,हवा प्रेम की चली तब होगीकलियों को बालों में,जब उसने वेणी लगाई होगी।खिल जाएंगी कलियाँ भीसूरज ने किरण दिखाई होगी,नादान भौंरे कर रहे बेवजह शोरये नज़ारे देख तितलियाँ भीमुस्काई होंगी।रंग-बिरंगे रंगों में रंगा उपवन,मानों अभी से होली आई होगी॥ परिचय-संजय वर्मा का साहित्यिक नाम ‘दॄष्टि’ … Read more

‘मुफ्त रेवड़ी’ पर सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी बड़ी चेतावनी

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** भारतीय लोकतंत्र की विडम्बना यह है कि चुनाव आते ही जनसेवा का स्वरूप बदलकर जनलुभावन राजनीति में परिवर्तित हो जाता है। राजनीतिक दलों ने मुफ्त की योजनाओं को चुनावी सफलता का छोटा रास्ता बना लिया है। मतदाताओं को तात्कालिक आर्थिक लाभ देकर मत हासिल करने की प्रवृत्ति लगातार मजबूत हो रही है। … Read more

नई पीढ़ी को भाषा पर अधिकार रखना चाहिए-प्रो. सिंह

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उज्जैन (मप्र)। नई पीढ़ी को भाषा पर अधिकार रखना चाहिए। अपने विषय को दूसरे विषयों के साथ जोड़ कर हम और आगे बढ़ सकते हैं। इनमें प्रयोजनमूलक हिंदी, पत्रकारिता, साक्षात्कार, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया इत्यादि शामिल हैं।यह बात मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति प्रो. अशोक सिंह ने श्री नरेश मेहता का स्मरण करते हुए अपने वक्तव्य में कही। … Read more

मेरा कान्हा गुलाब का फूल

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** मेरा कान्हा तो है गुलाब का फूल,देखो जब उसके मुख सृष्टि समूल। कान्हा जैसा प्यारा कोई नहीं है,सबके कष्टों को तो सुनता वही है। उसकी प्यारी बाँसुरी की वो धुन,जो भी सुनता हो जाता है मुग्ध। जब वो माखन लिपटाए अपने मुख,देख यशोदा मैया को अपार मिले सुख। गैया चराए मेरा नन्हा-सा … Read more

आन बचाने टकराते

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* माटी की लाज बचाने को, रण-पथ अविरत बढ़ते जाते,हँसते-हँसते प्राणों अर्पण, भारत वंदन शीश झुकाते।घर-आँगन सूना रह जाता, आँसू मौन भक्ति रस बहते-वीर-सपूतों अमर शहादत, स्वर्ण अतीत विजय लिख जाते॥ ध्वजा तिरंगा आन बचाने, आँधी तूफ़ानों टकराते,वक्षस्थल पर गोली सहकर, ख़ुद सीमा से नहीं हटाते।लखि पुलवामा रोती ममता, शहीद … Read more