राष्ट्रध्वज के सम्मान में काव्य गोष्ठी ने छोड़ी देशभक्ति की अमिट छाप

कल्पकथा साप्ताहिक काव्य गोष्ठी… सोनीपत (हरियाणा)। कल्पकथा साहित्य संस्था के तत्वावधान में राष्ट्रभक्ति की भावधारा से ओत-प्रोत २४४वीं साप्ताहिक काव्य गोष्ठी का गरिमामयी आयोजन राष्ट्रध्वज तिरंगा के सम्मान में सफलतापूर्वक किया गया। इस आयोजन ने श्रोताओं के हृदय में देशभक्ति की अमिट छाप अंकित की। अध्यक्षता अर्चना द्विवेदी गुदालु ने की। मुख्य अतिथि में साहित्यकार … Read more

कादम्बरी आर्य तथा घनश्याम भारती को दिया ‘कौशल रमेश सक्सेना साहित्य सम्मान’

hindi-bhashaa

ग्वालियर (मप्र)। हिन्दी का विरलतम काव्योत्सव ग्वालियर में हुआ, जिसमें ‘कौशल रमेश सक्सेना साहित्य-सम्मान’ कादम्बरी आर्य तथा घनश्याम भारती को दिया गया। साहित्यिक विभूतियों संपादक नरेन्द्र दीपक तथा साहित्यकार रवि पाराशर (दिल्ली) की उपस्थिति ने इस समारोह को गौरवान्वित किया।साहित्य साधना संसद का१९२५-२६ का संयुक्त काव्योत्सव‘कौशल रमेश सक्सेना साहित्य सम्मान’ आयोजन होटल सीता मैनोर के … Read more

महान फिल्मकार ऋत्विक घटक पर आधारित २ पुस्तक विमोचित

hindi-bhashaa

मुम्बई (महाराष्ट्र)। जनवादी लेखक संघ एवं स्वर संगम फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में १२ अप्रैल को इंदिरा गाँधी हास्पिटल स्थित विरूंगला केन्द्र (मीरा रोड, मुम्बई) में महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम किया गया। इसमें बांग्ला सिनेमा के महान फिल्मकार ऋत्विक घटक पर गहन चर्चा हुई तथा २ पुस्तकों का विमोचन किया गया।संघ की तरफ से संजय भिसे … Read more

माँ की थी वह प्यारी

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** माँ की थी वह प्यारी लल्लीनहीं कबूतर चिड़िया बिल्ली,तितली-सी वह घूम के आतीमाँ उसको रहती सहलाती। चीर-हरण एक बार हो गयाकृष्ण न आए मौन सो गया,दु:ख देने वाला था अपनाटूटा उसका सारा सपना। व्यथा हृदय की कही न जाएविकल वेदना बहती जाए,प्रलय मेघ पहचान बन गईमातृ-नेह निर्वाण बन गई। प्रभु मेरे अब … Read more

पंछी की पुकार

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** प्यासे पंछी की पुकार, दाना-पानी की बौछार,दाना चुग पानी पी कर, पंछी उड़ते पंख पसार। छत गलियारा खेत खलिहान, उड़ जाते पंछी नादान,जहां भी दिखता पानी दाना, उड़ कर आते ये विहंग। सुबह होते कलरव करते खग, जिससे जागे सारा जग,चहचहाहट प्यारी लगती, अंधियारा दूर भागे अब सब। एक गौरैया प्यासी आई, … Read more

पेड़ बनो

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* बन सको तो पेड़ बनो,सीखो इनसे देनापरहित में जिसने सदा,सीखा सब कुछ अपना देना। अपनी शाखों में पंछियों को,देते स्नेह बसेराइनकी शीतल छाँव तले,कितनों ने डाला डेरा। जब तक रहता अस्तित्व इनका,प्राण-वायु ये देतेतपती धूप में राहगीरों को,शीतल छाया देते। क्षमा भावना इनसे सीखो,पत्थर खाकर भी फल देतेमीठे फल से भूख मिटाते,शीतल … Read more

शान्ति स्थापित, लोक मंगल

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*************************************** युद्ध और शांति: जरूरी क्या ?.. युद्ध संहार सदा सर्वदा,होती न शान्ति, परिणाम भयावहयुद्ध वैमनस्य, विरोध परिणाम,युद्ध विनाश, विनाश भयावह। मौत का तांडव दुरूह विचार,बेमौत तांडव,निरीह विचारचहुं ओर लोथ संकट संचार,कहे मानव, शक्ति प्रचंड विचार। गोद सूनी आँखें नम सिंदूर मिटा,पूछें, मासूम साया जो छूटाअपनो की माला, मोती टूटा,अमर रहे, … Read more

हनुमान जी करते नित कल्याण

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* हनुमान जयंती विशेष…. रामेष्ट हनुमान जी, करते नित कल्याण।जीवन सब कष्ट हर, मारें तीखे बाण॥ रामेष्ट हनुमत प्रखर, हर लेते हर पीर।बहुत गुणी थे मान्यवर, रहें सदा ही धीर॥ अंधकार का कर हरण, बाँटें नित आलोक।रामेष्ट हनुमान जी, नष्ट करें सब शोक॥ रामेष्ट हनुमान जी, सचमुच दयानिधान।भय, भूतों को मारकर, रखें … Read more

निर्मल उन्मुक्त बचपन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* हरे-भरे मैदान में बच्चे दौड़ लगाते,हँसी की मीठी धुन में सपने झिलमिलाते। नीले गगन तले खुशियों का है मेला,हर नन्हा दिल जैसे रंगों का अलबेला। कोई आगे बढ़ता, कोई पीछे आता,मस्ती की राहों में सब संग मुस्काता। छोटी-छोटी बातें, बड़े-बड़े अरमान,खेल-खेल में सीखें जीवन का सम्मान। हवा संग उड़ते … Read more

आधुनिक हिंदी आलोचना के मार्गदर्शक व्यक्तित्व प्रो. सुशील कुमार शर्मा

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** समकालीन हिंदी साहित्य के विस्तृत परिदृश्य में कुछ ऐसे व्यक्तित्व उभरते हैं, जिनकी उपस्थिति केवल उनके लेखन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे एक विचारधारा, एक बौद्धिक परम्परा और एक सांस्कृतिक चेतना का प्रतिनिधित्व करने लगते हैं। प्रो. सुशील कुमार शर्मा इसी श्रेणी के ऐसे विशिष्ट साहित्यकार और आलोचक हैं, जिन्होंने … Read more