सृजनात्मक क्षमता को ईमानदारी के साथ समाज को समर्पित करना चाहिए-सिद्धेश्वर
पटना (बिहार)। हमारे भीतर निहित सृजनात्मक क्षमता को ईमानदारी और परिश्रम के साथ साहित्य और समाज को समर्पित करना चाहिए, ताकि वह व्यक्ति और समाज के बीच एक सशक्त संपर्क–सेतु का कार्य कर सके। साहित्य की दुनिया में कुछ लोग सृजन को देखकर अति-प्रशंसा के माध्यम से भ्रमित करते हैं, तो कुछ ‘और बेहतर’ की … Read more