किसे यक़ीन था…

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* मुझे पता है कोईठहरता नहीं किसी के पास,रुक जाता है कुछ पल के लिएसाथ देता हैं चंद कदमों तक…। फिर भी न जाने मनभागता है उस ओर शायद,ये सोचकर कि अचानक मिल जाएवो कभी किसी मोड़ पर…। पथिक हैं सब जीवन पथ केअलग-अलग है आप-बीती,कैसे किस पर विश्वास करेंजब बिछे हैं … Read more

फागुन लेकर आ गया

राजबाला शर्मा ‘दीप’अजमेर(राजस्थान)******************************************* होली विशेष…. फागुन लेकर आ गयाभांति-भांति के रंगढोल-नगाड़े बज रहे,बाजे ताल-मृदंग। चौराहे और चौक सब,हो रहे रंग से लालगली-गली हुड़दंग है,उड़े अबीर-गुलाल। तन-मन में उल्लास है,छाई नई उमंगफागुन लेकर आ गया,भांति-भांति के रंग। हर्षित है चेहरे सभी,अधरों पर मुस्काननैनों में है बांकपन,गोरी चतुर-सुजान। नाच रहे मदमस्त हो,पी ली जैसे भंगफागुन लेकर आ … Read more

बहुआयामी हैं कामकाजी महिलाओं की समस्याएं

पूनम चतुर्वेदी शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************** भारतीय समाज में जब कोई महिला यह निर्णय करती है, कि वह घर की चहारदीवारी से बाहर निकल कर कार्यस्थल पर अपनी प्रतिभा और परिश्रम से जीवन का निर्माण करेगी, तो यह निर्णय केवल आजीविका का नहीं, एक समग्र जीवन-दर्शन का, एक साहसिक चुनाव का प्रतीक होता है। वह महिला जानती … Read more

‘असफलता’ जीवन की सीख

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* असफलता की राहों में भी, अनुभव के दीप जलते हैं,ठोकर खाकर गिरने वाले ही, ऊँचे शिखरों पर चढ़ते हैं। हार नहीं अंत कहानी का, यह तो नयी शुरुआत है,संघर्षों की भट्टी में ही, बनती दृढ़ विश्वास की बात है। जब-जब सपनों का सूरज, बादल में छिप जाता है,तब-तब मन … Read more

कवि सम्मेलन में ‘नीर’ सम्मानित

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इटारसी (मप्र)। भवानी प्रसाद मिश्र ऑडिटोरियम (इटारसी) में इटारसी कला साहित्य संस्कृति मंच द्वारा रंग तरंग कवि सम्मेलन और सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसमें अंतरराष्ट्रीय कवि डॉ. नीरज कुमार ‘नीर’ को सम्मानित किया गया। नगर पालिका स्वास्थ्य समिति के सभापति राकेश जाधव और वरिष्ठ साहित्यकार राष्ट्रीय कवि बी.के. पटेल नें ‘नीर’ का स्वागत और … Read more

प्रकृति का आनंद

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** मैं चली अकेली,समुद्र के किनारे-किनारेरास्ता लम्बा अवश्य,किंतु लक्ष्य तय करना है। लकड़ी का सहारा,पथ परिक्रमा का साथीढलता सूरज निगाह रखता,पग में कहीं छाले न पड़ जाएइसलिए जल की लहरें कर देतीपग को शीतल। प्रकृति और इंसान का खेल,वर्षों से चला आ रहाजिसमें लोग साथ चलकर,ले रहे प्रकृति का आनंद।यही तो ईश्वर … Read more

‘बढ़ते कदम’ समारोह ८ को, पुस्तक लोकार्पण संग लघुकथा पाठ भी

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भोपाल (मप्र)। लघुकथा शोध केंद्र समिति (भोपाल) एवं दिल्ली शाखा द्वारा अखिल भारतीय लघुकथा-पर्व ‘बढ़ते कदम’ का आयोजन किया जा रहा है। इस समारोह में भारतीय साहित्य के प्रतिष्ठित हस्ताक्षर बलराम जी अध्यक्षता करेंगे।सहयोगी संस्थान विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान (दिल्ली) से प्राप्त जानकारी के अनुसार मंचासीन अतिथियों में अतुल प्रभाकर, लक्ष्मीशंकर वाजपेयी, डॉ. अशोक भाटिया, डॉ. … Read more

कल्पकथा काव्य महाकुंभ होली महोत्सव में उड़े काव्य के रंग

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सोनीपत (हरियाणा)। प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था द्वारा हिन्दी साहित्य की सेवा एवं सांस्कृतिक चेतना के संवर्धन हेतु पाँच दिवसीय (दस सत्रीय) कल्पकथा काव्य महाकुंभ-होली महोत्सव का सफल आयोजन किया गया। इसमें देश-विदेश के १५० से अधिक काव्य मनीषियों ने कार्यक्रम … Read more

तुम क्या कर सकते हो ?

डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्लइन्दौर (मध्यप्रदेश)***************************************** “अच्छा एक बात बताओ, तुम प्रेम की दीवानगी में मेरे लिए क्या कर सकते हो ?”“शायरी की भाषा में कहूं तो… आसमान का चाँद और सितारे तोड़कर तुम्हारी जींस और अपर में टाँक सकता हूँ!”“वाह… वाह! क्या बात है! अच्छा इसके अलावा…?”“इसके अलावा… तुम इस सारे ब्रह्मांड में मुझे सबसे … Read more

नारी दुर्गा स्वरूप

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** नारी अब केवल कोमल काया नहीं रह गई है,वह शक्ति का अद्भुत भंडार हो गई है। ममता, करुणा, प्रेम की मूर्ति के साथ-साथ,वह जीवन का आधार भी बन गई है। जब वह संसार में माँ का रोल निभाती है,तो अपने आँचल में पूरे जग को समेट लेती है। अपने सपनों को तो … Read more