भारत का संविधान लिखित विधान

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक…. सालों की पराधीनता के चलते,हमें यह अहसास हो गयाअब ना सहेंगे ज़ंजीरें ग़ुलामी की,अब हमारे सिर है धुन आज़ादी की। मतवालों ने जान तक क़ुर्बान कर दी,स्वतंत्रता सैनिकों ने लड़ाई छेड़ दीनत हुआ दुश्मन डालकर हथियार,हो गया भारत को आज़ाद करने तैयार। बीच अगस्त में भारत … Read more

गणतंत्र सुनहरा, नित सम्मान

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक दमक रहा जो सूरज जैसा, लाता नवल विहान है।भारत का गणतंत्र सुनहरा, जिसका नित सम्मान है॥ संविधान ने सम्प्रभुता दी, हर विकास को सींचा,जनहित के रथ को जिसने तो, मजबूती से खींचा।आम आदमी मुदित हो रहा, मंगल का नव गाना,वर्ष छियत्तर की गति-मति है, सचमुच सफ़र … Read more

स्वबोध से ही भारत सोने का शेर बन सकेगा

🔹’नर्मदा साहित्य मंथन’ के पांचवे सोपान का केरल के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने किया उद्घाटन🔹देशभर के चिंतकों ने रखी हर सत्र में विषय पर अपनी बात 🔹विवि के मुख्य सभागार में शुभारंभ, पुस्तक मेला व प्रदर्शनी भी इंदौर (मप्र)। स्वबोध से ही भारत सोने का शेर बन सकेगा। आज भी कहा जाता है कि हमें … Read more

नश्वरता

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* फिर एक कविता आकार लेने लगी है,भीगे शब्दों के वसन धारण करने लगी हैवो जो पड़ा है जमीं पर… निर्विकल्प-सा,उसकी सौहार्द्रता का गुणगान करने लगी हैफिर से एक कविता आकार लेने लगी है। घटनाएँ खास वाली, बताई जा रही है,उसकी पूरी ज़िंदगी, गुनगुनाई जा रही हैअजनबियों को यादगार किस्से कहकर,ज़िंदगी-भर की … Read more

जीवन की अविरल धारा तुम प्रिये

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* जीवन की अविरल धारा तुम प्रिये, हर पल मन को महकाती हो,सूने सपनों मरुस्थल में, सावन बनकर बरसाती होसौम्यता, गरिमा, ममतामयी, लज्जा श्रद्धा, करुण पहचान,हर रिश्ते में नव जीवन की, प्रिये मधुर सुवास बसाती हो। निशि! मंद मुस्कान तुम्हारी, दु:ख की छाया हर लेती हो,स्नेह-सुधा की फुहारें शीतल, हिय … Read more

हमारी जिम्मेदारी है गणतंत्र

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक… संविधान जो हमारा हक लिख देता है,जो हर नागरिक के न्याय समानता की बात करता है। गणतंत्र केवल उत्सव ही नहीं है,ना यह सिर्फ झंडों की शान भर ही है। यह आम आदमी के जीवन का रोज का सम्मान है,जब खेत में पसीना बहता है। किसान और … Read more

ऐसी शिक्षा नीति की आवश्यकता, जो प्रतिभा को जाति से ऊपर रखे

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा विवि अनुदान आयोग के माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के नाम पर लागू किए गए नए नियमों ने देश के शैक्षिक और सामाजिक परिदृश्य में एक बार फिर गहरी हलचल पैदा कर दी है। जिस नीति को ‘समता’, ‘समान अवसर’ और ‘समावेशी शिक्षा’ की भावना से … Read more

विष और अमृत

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** समुद्र मंथन हुआ था जिसमेंनिकले रत्न अनेकबाँट लिया मिल सुर-असुरों नेनहीं किया था कोई भेद,पर जब पहला रत्न था निकलाबड़ा विषैला कालकूट विषग्रहण नहीं उसको कर पायाविषय बड़ा गंभीर था खेद। महादेव तब आगे आयेलिया उन्होंने गरल उड़ेलकंठ में रखा उसे आपनेनीलकंठ का यह था खेल,और बहुत से रत्न थे निकलेपर जब … Read more

स्वतंत्र अधिकार

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)… हर पल रहे मन में देश के लिए तमन्ना,ईश्वर से है यही दुआ हर सूरत मुस्काए यहाँ। देश का हर जवान करता रहे देश की सेवा,दूर कर दूँ ताकतवर तानाशाही की बेला। आजाद भारत में फहराता रहे तिरंगा हरदम,स्वतंत्रता से जिए हर नागरिक यहाँ। … Read more

नाट्य-साहित्य के पुरोधा थे डॉ. चतुर्भुज, गीत-निर्झर थे विशुद्धानंद

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पटना (बिहार)। रेल में अधिकारी और आकाशवाणी में निदेशक रहे बिहार के महान रंगकर्मी डॉ. चतुर्भुज नाट्य-साहित्य के प्रणम्य पुरोधा थे। नाट्य-साहित्य को मंचन योग्य शिल्प देकर उन्होंने न केवल रंगमंच को समृद्ध किया, अपितु अपनी मोहक काव्य-कल्पनाओं से ऐतिहासिक नाटकों को विपुल समृद्धि प्रदान की। अपने नाटकों से उन्होंने यह भी सिद्ध किया कि … Read more