बुझी धरा की प्यास, सावन आया

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* हुआ ग्रीष्म अवसान, मास सावन का आया।बुझी धरा की प्यास, इंद्र ने जल  बरसाया॥श्याम वर्ण के मेघ, दामिनी दम-दम दमके।सुंदर सुरपति चाप,नील नभ चम- चम चमके॥ हरित हुई यह भूमि, वारिधर जल  बरसाए।करते नृत्य मयूर, कोकिल गीत  सुनाए॥हर्षित सारे जीव, गीत पावस के  गाते।हुई पिपासा शांत, खुशी अब सब मिल पाते॥ कृषक चला अब खेत, साथ में हल को लेकर।लगा जोतने भूमि, जोश उमंग … Read more

सबका अनुमान

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* सबका है अनुमान, फसल अब अच्छी होगी।होंगे सभी प्रसन्न, रहेंगे सभी  निरोगी॥बरसेगी बरसात, धरा की प्यास  बुझेगी।हरियाली चहुँ ओर, दिशाएं भी महकेगी॥ ईश्वर की अनुभूति, नहीं अनुमान  कराता।अनिर्वचनीय ईश, सभी का जीवन दाता॥सत्य सनातन रीति, भक्ति से उनको पाते।अवगुण होते दूर, भक्त का साथ निभाते॥ सूक्ष्म तत्व का ज्ञान, सदा जो होता न्यारा।होती है अनुभूति, आत्म में हो उजियारा॥करते हम अनुमान, बीज कर्मों के  बोता।शुभ का शुभ परिणाम, मुक्त जीवन से होता॥ परिचय-पेशे से अर्द्ध सरकारी महाविद्यालय में प्राचार्य (बांदीकुई,दौसा) डॉ.एन.के. … Read more

शीघ्र आ जाइए

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचना शिल्प-८, ८, ८,६… हर पल भारी लगे,हर साँस तुम जगे,प्रतीक्षा में बीते पल,शीघ्र आ जाइए॥ मिट जाएगा अंधेरा,होगा फिर से सवेरा,प्रतीक्षा का फल मीठा,टेर लगाइए॥ पल में उमंग जगे,हिया धड़कन लगे,प्रतीक्षा के बीच गीत,गुनगुनाइए॥ कैसे कहूँ मन बात,तड़पत दिन-रात,अगन-सी जल रही,इसे बुझाइए॥ परिचय-पेशे से अर्द्ध सरकारी महाविद्यालय में प्राचार्य (बांदीकुई,दौसा) डॉ.एन.के. सेठी का बांदीकुई में ही स्थाई निवास है। १९७३ में १५ जुलाई को बड़ियाल कलां,जिला दौसा (राजस्थान) में … Read more

केवल रोटी…

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)… रचनाशिल्प:१०, ८, ८, ६ भूखा रहता है, दुख सहता है, केवल रोटी, पाना है।सुख से रहे स्वजन, शांत रहे मन, इसको जीवन, माना है॥ गिरता पड़ता है, फिर लड़ता है, श्रम से न कभी, वह थकता।रखता है हिम्मत, रही न … Read more

राम है मुक्ति प्रदाता

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* ‘रामनवमी’ विशेष (२६ मार्च)… करना तुम विश्वास, राम है मुक्ति प्रदाता।जगती का आधार, सभी के भाग्य विधाता॥असुरों के हैं काल, भक्त की रक्षा करते।कण-कण में हैं व्याप्त, कष्ट सबका ये हरते।। करते हैं विश्वास, राम मर्यादा पालक।चलें न्याय की राह, यही हैं जग संचालक।।सबके हैं आराध्य, राम सबके मन में हैं।सूरत … Read more

दिया कृष्ण ने ज्ञान

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* दिया कृष्ण ने ज्ञान, सुनाई रण में गीता।बदला था अब पार्थ, हुई अब बुद्धि पुनीता॥दूर हो गया मोह, शोक भी नहीं रहा था।मन में था उल्लास, हृदय में प्रेम बहा था॥ बदला था रण क्षेत्र, डरी दुश्मन की सेना।लड़ें परस्पर वीर, नहीं था लेना देना॥केशव के सब हाथ, कर्म था सब … Read more

जय भारत

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचनाशिल्प:विधान-३२ मात्राएँ–१०, ८, ८, ६…. जय भारत वंदन, भू रज चंदन,गौरवशाली, है गाथा।हिंद की है शान, तिरंगा मान,रखता ऊँचा, ये माथा।हिमशैल है भाल, करे प्रतिपाल,रक्षा करते, हैं प्रहरी।सागर है रक्षक, अरि का भक्षक,रक्षा खाई, है गहरी॥ जय भारत माता, जग विख्याता,करती सबकी, रखवाली।जय वीर प्रसविनी, भारत जननी,देती सबको, खुशहाली।बहती है गंगा, … Read more

माया में फँसता अज्ञानी

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचनाशिल्प:१०, ८, ८, ६…. माया में फॅंसता, ईश्वर भी हँसता कैसा मानव, अज्ञानी।जीवन भर रोता, कभी न सोता,करता है वह, नादानी।प्रभु से विरत रहे, पापरत रहे,करता रहता, मनमानी।माया है ठगिनी, जीवनहरिणी,कर देती ये, हैरानी॥ माया का बंधन, दिखता चंदन,अंत बड़ा ही, दुःख भरा।मन को भटकाता, रूप दिखाता,लगता है सब, हरा-हरा।नश्वर है … Read more

पुण्य धरा है हिन्द

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)… आन बान अरु शान, तिरंगा मान हमारा।हमको इस पर गर्व, हमें प्राणों से प्यारा।तीन रंग का मेल, शान से यह लहराता।चक्र सुशोभित मध्य, सभी के मन को भाता॥ केसरिया है रंग, शौर्य को ये बतलाता।श्वेत रंग है मध्य, हृदय में शान्ति बढ़ाता।हरित वर्ण … Read more

घोर प्रदूषण

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* फैल रहा चहुँ और, जगत में घोर प्रदूषण।प्रतिदिन बढ़ते रोग, मिटे यह जीवन प्रति क्षण॥दोहन करता नित्य, मनुज कुदरत का जग में।मारे तीक्ष्ण कुठार, स्वयं ही अपने पग में॥ भौतिकता की होड़, मची है जीवन के रण।मनुज आज बेहाल, सृष्टि में दूषित कण कण॥जल थल नभ अरु वायु, प्रदूषित है जग … Read more