टूटते सारे रिश्ते…
हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )*********************************** आज फिर ‘धराशाई’ हो गया विश्वास,बदलती दुनिया में ‘किस’ पर करें हम भरोसा ?जब अपने ही घोंप रहें ‘खंजर’ तभी तो,आज टूटते जा रहें हैं सारे ‘रिश्ते- नाते।’ दुनिया कहाँ जा रही है आधुनिकता में,प्यार, मोहब्बत सब ‘बेमानी’ लगता हैऐसे में जब ‘अपने’ ही देते धोखा,तभी तो टूटते हैं सारे … Read more