टूटते सारे रिश्ते…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )*********************************** आज फिर ‘धराशाई’ हो गया विश्वास,बदलती दुनिया में ‘किस’ पर करें हम भरोसा ?जब अपने ही घोंप रहें ‘खंजर’ तभी तो,आज टूटते जा रहें हैं सारे ‘रिश्ते- नाते।’ दुनिया कहाँ जा रही है आधुनिकता में,प्यार, मोहब्बत सब ‘बेमानी’ लगता हैऐसे में जब ‘अपने’ ही देते धोखा,तभी तो टूटते हैं सारे … Read more

मनोरम तरणताल

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** बच्चों के मन को अति भाताप्रति-दिन वह कुछ नया सीखता,तरण-ताल का दृश्य मनोरममन को उनके बहुत लुभाता। बच्चों की टोली बन जातीपानी के नित खेल सिखाती,स्वास्थ्य सभी का अनुपम गहनायह बच्चों को निडर बनाती। तरण-ताल का नीला पानीछप-छप बच्चों की मनमानी,गर्मी से राहत मिलती हैमास्टर जी की सुनते वाणी। मात-पिता को भी … Read more

मेरा प्रेम-तुम्हारा प्यार

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* मेरा प्रेम,झरने की तरहबहता हुआनिर्मल, निश्छलतन-मन को करता शीतल। तुम्हारा प्यार,रात की गहराई की तरहगंभीर, समझ के बाहर,कभी वो सार्थक उपहारकभी दिमाग का दही। मेरा प्रेम,थोड़ी नोक-झोंककभी थोड़ा बचपना,अच्छा खाना बनानाअनुराग से खिलाना। तुम्हारा प्यार,विचित्र पर निरालाकभी कर्मयोगी निष्ठावान,कभी बनारस का मीठा पानकभी बिन बोले मेहमान। मेरा प्रेम,सुबह की लालीजग से … Read more

कब आओगे नरसिंह…?

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* कब आओगे असुर मारने ऐ प्रभुवर नरसिंह,तुम तो हो इंसाँ के रक्षक नित्य प्रखर नरसिंह। पाप आज बढ़ता ही जाता, झूठ विहँसता है,कब दिखलाओके इन सबको तुम हनकर नरसिंह। अंधकार अब हरसाता है, गंदापन फैला,नहीं बैठना तुम रस्ते में ऐ थककर नरसिंह। आज नारियाँ सिसक रही हैं,पीड़ा बहुत बड़ी,कब दुष्टों को … Read more

हस्ताक्षर नहीं, पहचान चाहिए

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** स्त्रियों की ज़िंदगी परपुरुषों के हस्ताक्षर बहुत हुए,कभी पिता के नाम सेकभी पति के नाम से,कभी किसी रिश्ते की मोहर सेउनके अस्तित्व के पन्ने भर दिए गए। हर कदम पर कहा गया“तुम कम हो, तुम कमज़ोर हो,”तुम्हारे सपनों की उड़ान परसवालों के पत्थर रख दिए गए। उसकी ख़ामोशी को सहमति समझा,उसकी सहनशीलता … Read more

विनाश का प्रमुख कारण अहंकार

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** एक छोटे से गाँव में एक प्रतिभाशाली मूर्तिकार रहता था, जिसका नाम था रमेश। उसे मूर्तिकला से गहरा लगाव था, और उसने अपनी पूरी ज़िंदगी इस कला को समर्पित कर दी। सालों की मेहनत से उसकी कला इतनी निखर गई कि उसकी हर मूर्ति में जान-सी मालूम पड़ती थी। गाँव के … Read more

तेरे बिना..

कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,हैदराबाद (तेलंगाना)*************************************************** बिना तेरी यादकैसे गुज़रेगा दिन,बिना तेरे नामकैसे चले ये दिन। बिना तेरी बातकैसे कटेगी शाम,बिना तेरे साथकैसे मिले आराम। बिना तेरी हँसीकैसे खिलेगा मन,बिना तेरी खुशीकैसे सजेगा जीवन। बिना तेरे ख़्वाबकैसे आएगी नींद,बिना तेरे जवाबकैसे मिलेगी जीत। बिना तेरे स्पर्शकैसे महकेगी साँस,बिना तेरे हर्षकैसे जगेगी आस। बिना तेरे प्यारकैसे धड़केगा … Read more

दातून करना भूल चुके हो…तो

राधा गोयलनई दिल्ली**************************************** “आए दिन तुम्हारे दाँतों में कुछ न कुछ समस्या होती ही रहती है। डॉक्टर के पास ही चक्कर लगते रहते हैं, लेकिन फर्क कुछ नहीं पड़ा। कोलगेट टूथपेस्ट छोड़ा तो डॉक्टर के कहने पर पैप्सोडेण्ट शुरू कर दिया।“   “तो आप ही बताओ ना कि क्या करें ? दाँत किस पेस्ट से साफ … Read more

कब तक चलेगा ये खिलवाड़ ?

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* कब तक आग निगलती रहेगी    सपनों का संसार,कब तक होता रहेगा यूँ जीवन से  खिलवाड़। दिल्ली रोई, लखनऊ सिसका, चीखा हर परिवार,मासूमों की चिताओं पर बैठा है भ्रष्टाचार। कल तक जिन आँखों में थे उज्ज्वल कल के चित्र,आज वही तस्वीर बने हैं, मौन    खड़े हैं मित्र। धुआँ उठा केवल भवनों से, ऐसा   कहना भूल,जली सुरक्षा की चेतना, जले  नियम-अनुकूल। कागज़ पर सब ठीक लिखा … Read more

जीवन किसान का आसान नहीं 

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** सुबह अभी पूरी तरह जागी भी नहीं होती,आकाश पर हल्की रोशनी फैल रही होती हैतभी एक किसान अपने घर से निकल पड़ता है। उसके कदमों में जल्दी नहीं होती,लेकिन उसके मन में दिन भर के कामों की लंबी सूची होती है। वह खेत को केवल मिट्टी का टुकड़ा नहीं मानता,वह उसे अपने जीवन … Read more