जीवन की माया

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)************************************** दोस्तों! जीवन की माया के रूप अनेक हैं,कभी नकारात्मक, तो कभी अति नेक हैं। माया तो माया है, जो नित नव रंग मलती है,तो साथ निभाती तो कभी हमको छलती है। जीवन भी अपनी निश्चित गति से बढ़ता है,कभी खुशी देता, तो कभी दु:ख मलता है। जीवन की माया सुख और … Read more

मिलकर हर मुश्किल टालें

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* आओ मिलकर खेलें सारे,नहीं रहे कोई भी न्यारेहाथ पकड़ मुस्काएँ मिलकर,एकता बने हमारी तारे। रंग अनेक, वेश अनेक हैं,सपने लेकिन एक-से नेक हैंप्रेम-सुगंध जहाँ बिखराएँ,वहीं सजे जीवन के लेख हैं। नन्हे मन में बैर न पालें,मीठे बोल सदा ही बोलेंसुख-दुख में सब साथ निभाएँ,मिल-जुलकर हर मुश्किल टालें। भारत माँ की शान बढ़ाएँ,सत्य, दया का दीप जलाएँ।बाल चौपाल यही सिखाती,एक रहें, जग को अपनाएँ॥ परिचय-डॉ.राम कुमार झा का साहित्यिक उपनाम ‘निकुंज’ है। १४ जुलाई १९६६ को दरभंगा में जन्मे डॉ. झा का वर्तमान निवास बेंगलुरु (कर्नाटक)में,जबकि स्थाई पता-दिल्ली … Read more

यही विश्वास है मेरा..

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* तलाश जो ‘खत्म’ नहीं होती है जीवन में,हर एक लम्हा उसका ‘गवाह’ होता हैफुर्सत कहाँ मिलती है ‘जमाने’ में आज-कल,दो पल ‘सुकून’ के हवा हो रहे हैं…। ठहराव के लिए ‘समय’ निकलना तो चाहता हूँ मैं,पर ‘रोजमर्रा’ की दिनचर्या से पस्त हो गया हूँ मैंनया जमाना नये ‘रंग’, फिर भी … Read more

…तो ईमानदारी न सताती

ममता सिंह ‘विशिष्ट’धनबाद (झारखंड)******************************* काश! मैं चरित्रहीन ही होती,तो मैं खुद में ही खुश हो जातीकाश! मैं भी बेईमान ही होती,तो ईमानदारी न मुझे सताती। काश! मैं भी एक बेदर्द ही होती,मुझे औरों का दर्द नज़र न आताकाश! मैं भी संस्कारहीन ही होती,तो संस्कार का पाठ नहीं जानती। काश! काश! काश! काश! काश!,इस जमाने में … Read more

जज्बात… जाने कहाँ गुम

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)********************************** जज्बातों का कारवां अगर साथ हो,तो रिश्ते बन ही जाते हैंदिल के झरोखे में झांक कर देखो,तो कुछ अक्स दिख ही जाते हैं। जज्बातों को जब हमने चाहा,बयां करना जो अल्फाजों मेंबस नजरें साथ देती हैं,लब खामोश रह जाते हैं। रिश्ता सच्चा वही जो,दिल के जज्बातों को समझेकई रिश्ते अक्सर जमाने को,दिखाने … Read more

लाठियॉं… देना होगा जवाब

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* बियाबानों से तोड़कर,लाई जाती है शहरों में धूप में तापकर आग में सेंक कर,उनकी बर्बरता कोमजबूत करने के लिए,कभी-कभी ठोकी जाती है नुकीली कीलें भी और,तैयार की जाती है लाठियाँ…मासूमों पर बरसाने के लिए,जो अपने हक की लड़ाई लड़ते हैं, न्याय की मांग करते हैं…। इनकी लाठियाँ…क्यों नहीं बरसती उन चोर, उचक्कों और डकैतों पर,दिनदहाड़े लूट … Read more

तरसती थी मेरी आत्मा

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)**************************************** हर बार पितृपक्ष में तुमने मुझको ‘गया’ बिठाया,जल अर्पित करके मोक्ष भी दिलायापंडितों को खिलाकर तुमने बड़ा है पुण्य पाया,मेरे लाल क्या तुमको इतनी-सी भी खबर नहीं है। तरसती थी मेरी आत्मा रोटी खाने को,पड़े थे क्या तेरे घर में खाने को लालेउस पल खाने को कुछ भी नहीं था क्या तेरे … Read more

श्रीगुरु कृपा

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)************************************** मोहि श्रीगुरु जतन करायो, मंगल छाया,जीवन खुशबू से है पूरित, पर्व सुहाया। अंधकार में उजलापन है, रौनक के पल,सीख है गुरुवर की, जिसने उल्लास सजाया। बिना गुरू के ज्ञान कहाँ हैं, बोध नहीं,जीवन दर्शन पाकर के उल्लास सजाया। गुरुवर की महिमा से मौसम हरसाता,रीति-नीति का मान आज उर में आया। कृपा … Read more

दर्द कुछ हैं

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************* दर्द कुछ हैं बड़े गहरेजो वर्षों तक न भरते हैं,बना कर घर हृदय के बीचवे दिल में ही रहते हैं। जहाँ से क्यों चले जातेअकेला करके जीवन को,हँसी अपनी तथा स्पर्शछोड़ जाते याद करने को। लोग कहते हैं-भूल जाओपुरानी बीती हुई बातों को,पर नहीं, कुछ यादें होती हैंआत्मा में उतर जाने को। … Read more

झूठ बोलने वाले

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)**************************************** झूठ बोलकर भी अब लोग दिल चुराते हैं,सच बोलने वाले दीवाने ठोकरें खाते हैं। झूठ वाले कहाँ से कहाँ बढ़ गए,और मैं था कि सच बोलता रह गया। दोपहर तक बिक गया बाज़ार का हर एक झूठ,और मैं एक सच लेकर शाम तक बैठा रहा। मैं सच कहूँगा मगर फिर भी हार जाऊँगा,वो … Read more