नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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कण-कण गवाह मथुरा के,
मेरे कृष्ण जन्म लिए वहाँ
अंगूठे पर खड़े होकर,
भीड़-भरी आबादी में।
जो देखा मैंने उस दिन,
कृष्ण की अनोखी छवि वहाँ
काले-काले घुँघर बालों वाले,
हँसता-हँसता श्याम चेहरा।
भूल न पाऊँ एक पल भी,
तेरी वो प्यारी-प्यारी छवि
काली-काली वो अनूप छाया,
सिर्फ़ एक पल आँखों में बसी।
आँखों के अंदर ही रहना,
मेरा दिल तुझको पुकारे।
ओ कृष्णा, ओ कृष्णा!,
तुम रहना दिल के अंदर।
मेरा रोम-रोम तुझको समर्पित,
हर साँस में बस तेरा नाम।
ओ कृष्णा, ओ कृष्णा!,
तेरा प्रेम है मेरा धन।
देखते-देखते मैंने देखा,
मंदिर में तेरी आँखें काली।
थोड़ी-सी हिल गईं पलकें,
लगा तुमने झपकाई नज़र।
पलक झपकाकर तूने देखा,
मुझे जो, वो प्यारी अदा।
मैं तो साँसत में आ गई,
अँखियाँ फिर-फिर मिचकाईं।
इस अनहोनी घटना को,
दिखा दे, दिखा दे एक बार।
दर्शन अपने फिर दिखा दे,
तुझ पर मेरा हक़ है बनता।
मन-ही-मन मैं तुझको भजूँ,
बोल न पाऊँ जग से बात।
समझ मेरे भोले कन्हैया,
दिल पर तेरा नाम खुदा।
पल-पल निहारूँ तुझको,
ओ कृष्णा, ओ कृष्णा!,
हर धड़कन में तू बसा,
मेरा जीवन तेरा दास॥