कुल पृष्ठ दर्शन : 7

दिया कृष्ण ने ज्ञान

डॉ.एन.के. सेठी
बांदीकुई (राजस्थान)

*********************************************

दिया कृष्ण ने ज्ञान, सुनाई रण में गीता।
बदला था अब पार्थ, हुई अब बुद्धि पुनीता॥
दूर हो गया मोह, शोक भी नहीं रहा था।
मन में था उल्लास, हृदय में प्रेम बहा था॥

बदला था रण क्षेत्र, डरी दुश्मन की सेना।
लड़ें परस्पर वीर, नहीं था लेना देना॥
केशव के सब हाथ, कर्म था सब पर भारी।
हारे यहाँ अधर्म, धर्म की है अब बारी॥

भीष्म सरीखे वीर, पड़े थे शर-शैय्या पर।
बदला था सौभाग्य, कर्म का फल अब पाकर॥
मिली यही थी सीख, कर्म है सबसे ऊपर।
कर्म करो निष्काम, जन्म लेकर इस भू पर॥

ईश्वर का भी न्याय, कभी भी नहीं बदलता।
करता जैसा कर्म, उसे फल वैसा मिलता॥
हुई धर्म की जीत, अधर्म सदा ही हारा।
करो सदा शुभ कर्म, मिले फल उसका न्यारा॥

परिचय-पेशे से अर्द्ध सरकारी महाविद्यालय में प्राचार्य (बांदीकुई,दौसा) डॉ.एन.के. सेठी का बांदीकुई में ही स्थाई निवास है। १९७३ में १५ जुलाई को बड़ियाल कलां,जिला दौसा (राजस्थान) में जन्मे नवल सेठी की शैक्षिक योग्यता एम.ए.(संस्कृत,हिंदी),एम.फिल.,पीएच-डी.,साहित्याचार्य, शिक्षा शास्त्री और बीजेएमसी है। शोध निदेशक डॉ.सेठी लगभग ५० राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में विभिन्न विषयों पर शोध-पत्र वाचन कर चुके हैं,तो कई शोध पत्रों का अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशन हुआ है। पाठ्यक्रमों पर आधारित लगभग १५ से अधिक पुस्तक प्रकाशित हैं। आपकी कविताएं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। हिंदी और संस्कृत भाषा का ज्ञान रखने वाले राजस्थानवासी डॉ. सेठी सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत कई सामाजिक संगठनों से जुड़ाव रखे हुए हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत तथा आलेख है। आपकी विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में शोध-पत्र का वाचन है। लेखनी का उद्देश्य-स्वान्तः सुखाय है। मुंशी प्रेमचंद इनके पसंदीदा हिन्दी लेखक हैं तो प्रेरणा पुंज-स्वामी विवेकानंद जी हैं। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-
‘गर्व हमें है अपने ऊपर,
हम हिन्द के वासी हैं।
जाति धर्म चाहे कोई हो,
हम सब हिंदी भाषी हैं॥’