नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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प्रेम के ढाई अक्षर में समाया पूरा संसार है,
प्रेम कोई शब्द नहीं, यह रिश्ते-नातों का संसार है
प्रेम का कोई स्वरूप नहीं, यह एक विश्वास है,
निराकार है प्रेम, पर जीवन को करता साकार है।
प्रेम एक शक्ति है, प्रेम एक पुंज है,
जीवन को खुश कर देने वाला एक कुंज है
प्रेम एक जीत है, प्रेम एक उमंग है,
प्रेम लोगों के हृदय में उठती तरंग है।
रिश्तों का आधार है, यह हर्ष फैलाता है,
यह अंधकारमय जीवन में नया सवेरा लाता है
प्रेम एक मर्म है, प्रेम एक ज्ञान है,
इससे दुनिया चलती है, यह एक आदर्श सिखाता है।
प्रेम राधा रानी है, प्रेम कृष्ण का रूप है,
प्रेम शबरी में है, प्रेम राम का स्वरूप है
प्रेम से भाई-बहन, प्रेम से माता-पिता,
अतः प्रेम एक शब्द नहीं, यह तो शाश्वत है।
प्रेम मोह नहीं, प्रेम लालच नहीं, यह सजीवता है,
तभी तो प्रेम के बस में श्रीकृष्ण की लीला है।
प्रेम मधुर मिलन का कोई अफसाना नहीं है,
‘प्रेम’ कोई शब्द नहीं, यह साँसों का तराना है॥