कुमारी ऋतंभरा
मुजफ्फरपुर (बिहार)
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रहते हो तुम खफा मुझसे, क्यों बता भी दो,
भुला दो सारे ग़म को, प्यार से बात कर लो
ग़लती जो हो गई अगर, मुझको बता दो
भुला कर सब अब सनम मुस्कुरा दो।
राहे-जीवन में बड़ी मुश्किलें हैं,
मेरा हाथ थाम कर राह दिखा दो
मैंने बस तुम्हें ही अपना माना है,
अपना समझो या बस पराया कर दो।
मेरा दिल सच्चा है, जमाने को बता दो,
अपनी आँखों के सारे आँसू मिटा दो
कहाँ देखा है किसी ने अपने जन्म को,
इस जन्म में ही मुझे, हर खुशी से मिला दो।
न रूठो ना दूर जाओ, मुश्किलें न बढ़ाओ,
मुकद्दर में आकर मुझे जीना सिखा दो.
पूजा है तुमको, चाहा भी है बस तुमको,
तेरी पूजा से बड़ा क्या है, कभी समझा दो॥