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लूट रहे प्रबंधन संग ठेकेदार

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’
धनबाद (झारखंड )
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पढ़े-लिखे बेरोजगार हैं, देखो यह संसार,
एम.टेक. डिग्री लिए भी हैं युवक लाचार
पाँच हजार के वेतन पर नौकरी को तैयार,
सरकारी आदेश का हो रहा है बंटाधार।

सरकारी नौकरी अब कहाँ ? ठेके की बहार,
ठेकदारी में काम को अब तरस रहे हैं यार
उद्योगों को ही बेच रही राज्य की सरकार,
कोयला, स्टील प्लांट में नियुक्ति, रहे नहीं आसार।

चारों तरफ व्याप्त है आउट सोर्सिंग में भरमार,
मोटी रकम हज़म कर रहे प्रबंधन संग ठेकेदार
कम वेतन में काम को अभियंता- मजदूर तैयार,
स्थाई नौकरी से सब हो गए खुद ही खबरदार।

न्यूनतम मजदूरी की बातें बस करती है सरकार,
ठेका-पेटी के चक्कर में सब कुछ अब बेकार
निजी और सरकारी उद्योगों में नौकरी क्या दरकार ?
लूट मची है ठेकेदारों से, बिकती रोजी-रोजगार।

भारत में आउट सोर्सिंग का ओएनजीसी का व्यापार,
एनटीपीसी ने भी जल्दी में इसे स्वयं किया स्वीकार
कोयला, निजी उद्योगों ने भी अपना लिया ये आकार,
स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवन-शैली छीनी, मजदूरों में हाहा-कार।

प्रबंधन का वेतन दस गुना बढे़, मजदूरों पर एक चौथाई की मार
अस्थाई रोजगार अभियंता-मजदूर बढ़े,
स्थाई नियोजन की बात पर सरकारें सब लाचार।

तकनीकी अभियंता या तकनीशियन पाते अस्थाई पगार,
कारखाने में आउट सोर्सिंग पर उत्पादन बेशुमार
सरकारी की बात क्या निजी फैक्टरी की यही पुकार,
हर क्षेत्र में प्रबंधन का बस ठेका करने की फुफकार।

अभियंताओं की रेस ने पकड़ी है अब रफ्तार,
प्रदूषण, ऊष्मा, ध्वनि देख करते फैक्ट्री को धिक्कार।
न बचेगा कृषक यहाँ, न अभियंता, कोसो सौ-सौ बार,
जय हो भारत माता, जय हो, जय- जय मेरी सरकार॥

परिचय-सिंदरी (धनबाद, झारखंड) में १४ दिसम्बर १९६४ को जन्मे आचार्य संजय सिंह का वर्तमान बसेरा सबलपुर (धनबाद) और स्थाई बक्सर (बिहार) में है। लेखन में ‘चन्दन’ नाम से पहचान रखने वाले संजय सिंह को भोजपुरी, संस्कृत, हिन्दी, खोरठा, बांग्ला, बनारसी सहित अंग्रेजी भाषा का भी ज्ञान है। इनकी शिक्षा-बीएस-सी, एमबीए (पावर प्रबंधन), डिप्लोमा (इलेक्ट्रिकल) व नेशनल अप्रेंटिसशिप (इंस्ट्रूमेंटेशन डिसिप्लिन) है। अवकाश प्राप्त (महाप्रबंधक) होकर आप सामाजिक कार्यकर्ता व रक्तदाता हैं तो साहित्यिक गतिविधि में भी सक्रियता से राष्ट्रीय संस्थापक-सामाजिक साहित्यिक जागरुकता मंच मुंबई (पंजी.), संस्थापक-संरक्षक-तानराज संगीत विद्यापीठ (नोएडा) एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता के.सी.एन. क्लब (मुम्बई) सहित अन्य संस्थाओं से बतौर पदाधिकारी जुड़े हैं, साथ ही पत्रकारिता का वर्षों का अनुभव है। आपकी लेखन विधा-गीत, कविता, कहानी, लघु कथा व लेख है। बहुत-सी रचनाएँ पत्र-पत्रिका में प्रकाशित हैं, साथ ही रचनाएँ ४ साझा संग्रह में हैं। ‘स्वर संग्राम’ (५१ कविताएँ) पुस्तक भी प्रकाशित है। सम्मान-पुरस्कार में आपको महात्मा बुद्ध सम्मान-२०२३, शब्द श्री सम्मान-२०२३, पर्यावरण रक्षक सम्मान-२०२३, श्रेष्ठ कवि सम्मान-२०२३ सहित अन्य मिले हैं तो विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में कई बार उपस्थिति, देश के नामचीन स्मृति शेष कवियों (मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, भारतेंदु हरिश्चंद्र आदि) के जन्म स्थान जाकर उनकी पांडुलिपि अंश प्राप्त करना है। श्री सिंह की लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी भाषा का उत्थान, राष्ट्रीय विचारों को जगाना, हिन्दी भाषा, राष्ट्र भाषा के साथ वास्तविक राजभाषा का दर्जा पाए, गरीबों की वेदना, संवेदना और अन्याय व भ्रष्टाचार पर प्रहार करना है। मुंशी प्रेमचंद, अटल बिहारी वाजपेयी, जयशंकर प्रसाद, भारतेंदु हरिश्चंद्र, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर, किशन चंदर और पं. दीनदयाल उपाध्याय को पसंदीदा हिन्दी लेखक मानने वाले ‘चंदन’ के लिए प्रेरणापुंज-पूज्य पिता जी, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, महात्मा गॉंधी, भगत सिंह, लोकनायक जय प्रकाश, बाला साहेब ठाकरे और डॉ. हेडगेवार हैं। आपकी विशेषज्ञता-साहित्य (काव्य), मंच संचालन और वक्ता की है। जीवन लक्ष्य-ईमानदारी, राष्ट्र भक्ति, अन्याय पर हर स्तर से प्रहार है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-“अपने ही देश में पराई है हिन्दी, अंग्रेजी से अंतिम लड़ाई है हिन्दी, अंग्रेजी ने तलवे दबाई है हिन्दी, मेरे ही दिल की अंगड़ाई है हिन्दी।”