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सभी नागरिक गिलहरी की भांति छोटे-छोटे प्रयास करें

गोष्ठी…

इंदौर (मप्र)।

आज समाज में जो विचार शून्यता है। प्रायः राम को तो सब मानते हैं, पर राम की नहीं मानते; जबकि करने वाले और कराने वाले सब राम ही हैं। ​राम जी का परिवार एक आदर्श परिवार है। हमारे राष्ट्र में स्त्री सशक्तीकरण को एक मिथ्या नरेटिव का रूप दे दिया गया है, जबकि भारतीय संस्कृति में स्त्री हमेशा सशक्त ही रही है। इसके लिए समस्त नागरिकों का यह कर्तव्य है कि गिलहरी की भांति छोटे-छोटे प्रयास करें, ताकि यह वास्तविक रामराज्य के रूप में स्थापित हो सके।
यह बात मुख्य अतिथि के रूप में प्रखर वक्ता माला ठाकुर ने कही। अवसर रहा वामा साहित्य मंच द्वारा चैत्र मास के उपलक्ष्य में आयोजित मासिक गोष्ठी का, जिसका मुख्य विषय ‘सबहि नचावत राम गुसाई’ था। कार्यक्रम का केंद्र बिंदु मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन दर्शन और उनके व्यक्तित्व की शिक्षाएं रहीं।
प्रचार प्रभारी सपना साहू ‘स्वप्निल’ ने बताया कि शुभारंभ शैला अजवे के सुमधुर सरस्वती वंदना और दिव्या मण्डलोई के भक्तिमय राम भजन के साथ हुआ। मंच की अध्यक्ष ज्योति जैन ने स्वागत उद्बोधन में अभिनंदन करते हुए कहा कि रामचरित मानस जीवन शिक्षा है। धीरज के साथ धर्म, मित्र और नारी के प्रति कृतज्ञता रखना ही जीवन की सार्थकता है।
प्रारम्भ में अतिथि का पुष्पगुच्छ से स्वागत सचिव स्मृति आदित्य और पुष्पा दसौंधी ने किया।
​ गोष्ठी में लेखिकाओं व कवयित्रियों ने रामचरितमानस की २ कालजयी चौपाइयों पर मंथन किया। प्रथम चौपाई ‘धीरज धरम मित्र अरु नारी। आपद काल परखिए चारी।।’ पर विचार रखते हुए महिमा शुक्ला ने पत्नी की एकनिष्ठा को दाम्पत्य सफलता का आधार बताया, जबकि माधुरी निगम ने धैर्य धारण करने को ही जीवन की सफलता की कुंजी माना। डॉ. शोभा प्रजापति ने राम नाम को सर्वोपरि औषधि बताया। अवंति श्रीवास्तव ने विपरीत परिस्थितियों में कर्तव्यपरायणता की परीक्षा को प्रमुखता से रखा। डॉ. आराधना तिवारी ने कहा कि नारी आपत्तिकाल में नहीं हर काल में अपनी मित्र है। डॉ. सुनीता दुबे, अनुपमा गुप्ता एवं श्रुति शर्मा ने भी राम के आदर्शों को अपनाने पर जोर दिया। ​दूसरी चौपाई ‘बिनु सत्संग विवेक न होई। राम कृपा बिनु सुलभ न सोई।।’ को साहित्यकार डॉ. स्नेहलता श्रीवास्तव ने मानवता की रक्षा का दर्शन निरूपित किया। सपना साहू ‘स्वप्निल’ ने संगत को ही जीवन की गति का आधार बताया। आशा गर्ग, निरुपमा त्रिवेदी, भावना दामले और आशा मानधन्या आदि ने भी विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर काजल मजुमदार ने लघुकथा सुनाई।

सफल संयोजन उषा गुप्ता ने किया। संचालन इंदु पाराशर द्वारा किया गया। अनिता जोशी ने आभार व्यक्त किया।