कुल पृष्ठ दर्शन : 8

समय किसी का नहीं होता

बबिता कुमावत
सीकर (राजस्थान)
*****************************************

ना होता समय किसी का,
न राजा का होता, ना ही होता रंक का।

कौन है जो इसे बाँध सके मुट्ठी में,
था कौन ऐसा इतिहास में ?

कल तक जो थे सिंहासन पर,
आज रह गए बस स्मृति में,

बताया घड़ी की टिक-टिक ने,
वैभव क्षणिक धाम रह गए।

जो आज गर्व में हँसता है,
कल आँसू भी करते उसका इंतज़ार।

झुककर समय के चरणों में ही,
पन्ने भाग्य के करते आकार।

न किसी से रुकता यह है,
न मानता आदेश किसी का।

देखे कर्मों का लेखा-जोखा,
फल दे देता, पर पक्षपात न करता।

मत कर हे मनुज अभिमान,
न हताश हो अंधकार में ही।

समय किसी का नहीं होता,
पर अवसर देता इस संसार में ही॥