दीप्ति खरे
मंडला (मध्यप्रदेश)
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सारी दुनिया छोड़कर,
मैंने तुमको चुन लिया
दुनिया के इस मेले में,
सच्चा सुकून पा लिया।
सारी दुनिया छोड़कर…
न नाम की चाह रही,
न दिल पर रिश्तों का बोझ
बेफिक्री का आलम है,
जबसे नाता तुमसे जोड़ लिया।
सारी दुनिया छोड़कर…
न वैभव न यश की चाह,
न ही कोई कामना अब
जो छूटा वो तेरी माया,
तेरा तुझको अर्पण कर दिया।
सारी दुनिया छोड़कर…
न शिकवा न कोई शिकायत,
न अब भय भविष्य का
मन में सुकून-सा आ गया,
जबसे भरोसा तुम पर कर लिया।
सारी दुनिया छोड़कर…
तुम साथ तो हो जाएंगी,
हर राह आसान
हर हाल में थामोगे हाथ मेरा,
दिल ने यकीन यह कर लिया।
सारी दुनिया छोड़कर…
पूछे अगर मुझसे कोई,
क्या खोया क्या पाया है ?
इससे बढ़कर क्या कहूं,
सब छोड़कर भी सब पा लिया।
सारी दुनिया छोड़कर,
मैंने तुमको चुन लिया॥