डॉ.एन.के. सेठी
बांदीकुई (राजस्थान)
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‘हनुमान जयंती’ विशेष…
रचनाशिल्प:भगण × ७+२२
हे हनुमान सुनो विनती अब, मारुति आपद दूर भगाओ।
देव तुम्ही कलिकाल विराजत, उन्नति की सद राह दिखाओ॥
राघव भक्त कृपा करना अब, हे प्रभु राम सुशासन लाओ।
राम भजें सब काम तजें यह, नाम जपें हिय राम बिठाओ॥
मारुतिनंदन संकटमोचन, भक्त सभी करते हम सेवा।
हे बजरंगबली हमको अब, पार करो भव सागर देवा॥
कारज पूर्ण करें सबके प्रभु, मांग रहे तुमसे हम मेवा।
हाथ धरो सिर पे अपना तुम, पाय सभी हम भक्ति कलेवा॥
हे बजरंगबली सुन लो अब, जीवन ये अब पार लगाओ।
मैं मतिमंद दया करना प्रभु, भूल सभी अब तो बिसराओ॥
दास सदा विनती करता यह, दीनदयाल हमें सुध लाओ।
और नहीं अब ठौर मुझे प्रभु, आश्रय दो न मुझे ठुकराओ॥
हे रघुवीर सुधीर सुनो प्रभु, दास खड़ा यह द्वार तुम्हारे।
दुःख हरो सबके रघुनंदन, वंदन आज करे जन सारे॥
दाशरथी मत देर करो अब, संकटमोचक नाथ हमारे।
दीनदयाल दयानिधि तारक, दुष्ट विनाश करो हित धारे॥
परिचय-पेशे से अर्द्ध सरकारी महाविद्यालय में प्राचार्य (बांदीकुई,दौसा) डॉ.एन.के. सेठी का बांदीकुई में ही स्थाई निवास है। १९७३ में १५ जुलाई को बड़ियाल कलां,जिला दौसा (राजस्थान) में जन्मे नवल सेठी की शैक्षिक योग्यता एम.ए.(संस्कृत,हिंदी),एम.फिल.,पीएच-डी.,साहित्याचार्य, शिक्षा शास्त्री और बीजेएमसी है। शोध निदेशक डॉ.सेठी लगभग ५० राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में विभिन्न विषयों पर शोध-पत्र वाचन कर चुके हैं,तो कई शोध पत्रों का अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशन हुआ है। पाठ्यक्रमों पर आधारित लगभग १५ से अधिक पुस्तक प्रकाशित हैं। आपकी कविताएं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। हिंदी और संस्कृत भाषा का ज्ञान रखने वाले राजस्थानवासी डॉ. सेठी सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत कई सामाजिक संगठनों से जुड़ाव रखे हुए हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत तथा आलेख है। आपकी विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में शोध-पत्र का वाचन है। लेखनी का उद्देश्य-स्वान्तः सुखाय है। मुंशी प्रेमचंद इनके पसंदीदा हिन्दी लेखक हैं तो प्रेरणा पुंज-स्वामी विवेकानंद जी हैं। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-
‘गर्व हमें है अपने ऊपर,
हम हिन्द के वासी हैं।
जाति धर्म चाहे कोई हो,
हम सब हिंदी भाषी हैं॥’