पूना (महाराष्ट्र)।
यदि हमारी मातृभाषा हमारी माँ है तो अन्य भारतीय भाषाएँ हमारी मौसी की तरह हैं। यदि हम माँ का सम्मान करते हैं तो मौसी का भी सम्मान अवश्य करेंगे।
यह बात भाषाविद डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’ ने मुख्य वक्ता के रूप में संगोष्ठी में कही। अवसर रहा ‘अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के अंतर्गत भारतीय भाषा मंच व डेक्कन एज्युकेशन सोसायटी के तत्वावधान में संचालित फर्ग्युसन महाविद्यालय द्वारा आयोजित विशेष संगोष्ठी का, जिसमें शोभा पैठणकर मुख्य अतिथि व प्रो. गीता नायक विशिष्ट अतिथि रहे।
संगोष्ठी की प्रस्तावना एवं अतिथि परिचय डॉ. पुरुषोत्तम कुंदे ने दिया। उद्घाटन सत्र में महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. श्याम मुडे ने भारतीय भाषाओं के महत्व पर प्रकाश डाला। शोभा पैठणकर ने न्यास के आयाम और विषयों को स्पष्ट किया। प्रो. नायक ने मातृभाषा में शिक्षा और गुणवत्ता पूर्ण शोध को विविध उदाहरणों द्वारा समझाया।
इस अवसर पर छात्रों द्वारा अपनी मातृभाषा में हस्ताक्षर किए गए। डॉ. गुप्ता ने अंग्रेजी सहित सभी भाषाओं में अपने देश का नाम ‘इंडिया’ के स्थान पर ‘भारत’ प्रयोग में लाने का आग्रह किया।
संगोष्ठी में न्यास के पश्चिम महाराष्ट्र प्रांत के अध्यक्ष अनिल महाजन उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने के लिए प्रो. आनन्द काटीकर (कार्यवाह, सोसायटी), डॉ. संतोष धोत्रे (हिंदी विभाग प्रमुख) और प्राध्यापक रेवन चव्हाण ने विशेष सहयोग दिया। आभार डॉ. चंद्रकांत गुलेद ने व्यक्त किया।
(सौजन्य:वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुम्बई)