प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’
सहारनपुर (उप्र)
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आप हैं देवता, आप आराध्य हैं।
भक्ति से हैं सुलभ शेष दु:साध्य हैं॥
सबके हित आपने है सदा विष पीया,
आप त्यागी परम तब ही सब जग जीया।
कर्म फल सबको देने को पर बाध्य हैं,
आप हैं देवता, आप आराध्य हैं…॥
सारी योनि में भोगों में बस आप हैं,
बह्म-चिंतन में योगों में बस आप हैं।
काम वश में किए सर्व सुसाध्य हैं,
आप हैं देवता, आप आराध्य हैं…॥
आपको खुद से पाना नहीं है सरल,
भक्त के वश सदा निष्प्रपंची विरल।
हैं तपस्वी विकट सिद्ध श्रम साध्य हैं,
आप हैं देवता, आप आराध्य हैं…॥
हम कहीं से चलें पहुंचे बस आप तक,
लें जनम या मरें काम-विश्राम तक।
आप ही अन्त हैं आप ही आद्य हैं,
आप हैं देवता, आप आराध्य हैं…॥
जड़ को चेतन को सबको बनाये हुये,
सारे गुण-तत्व शिव में समाये हुये।
सबकी हैं आत्मा सृष्टि के माध्य हैं,
आप हैं देवता, आप आराध्य हैं…॥
कृपा तुमरी ‘शिवदासी’ ने वंदन किया,
क्षण जो भूली तुम्हें तो है क्रंदन किया।
शरण भोगों से रश्रा हो ये व्याध्य हैं,
आप हैं देवता, आप आराध्य हैं…॥