कुमारी ऋतंभरा
मुजफ्फरपुर (बिहार)
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दुनिया में यह चर्चा छाई,
रामलला आए हैं, रामलला आए हैं
चलो न सब मिल अयोध्या में,
दर्शन करें राम भगवान के।
घर-घर में पूजा होती है,
मंदिर में घंटी बजती है
मन हो निर्मल पसंद प्रभु को,
सबका मन, वाणी स्वच्छ चाहिए।
गंगा बहती धारा में जैसे,
जग में हरदम सत्कर्म करेंगे
सबके प्रति भावना हो कल्याणकारी,
अयोध्या में है रामलला का मंदिर।
जग यह हुआ सारा राम भगवान का,
‘राम राज्य’ अब जग सारा
पहले कर लें हम आत्म सुधार,
करते हरदम हम साधना।
परहित कष्ट सहते हरदम,
प्रेम रहे सदा निष्प्राण सबका सदा
दुनिया में यही चर्चा छाई है,
रामलला है अयोध्या में।
हर प्राणी से प्यार और सहकार बढ़ाएं,
पढ़ें-पढ़ाएं सदा हम साहित्य युग को
बहती गंगा जैसे गंगोत्री से,
समाज का अच्छा निर्माण करें।
चलो अयोध्या धाम चलें,
सीता जैसी घर घर की नारी हो
भाई हो सदा भरत-लक्ष्मण सा,
श्रीराम जैसा हमारा आचरण हो।
सौन्दर्य हमारा सुशोभित हो,
संतान हो लव-कुश जैसी
दुनिया में चर्चा छाई है,
अयोध्या में है राम लला।
चलो अयोध्या धाम चलें…
रामलला का दर्शन करें॥