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तीर्थंकर भगवान महावीर

ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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‘महावीर जयंती’ विशेष…

जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर थे भगवान महावीर,
५९९वें ईशा पूर्व ग्राम कुंड निकट वैशाली बिहार।

महावीर के माता-पिता थे सिद्धार्थ और त्रिशला,
तीस की आयु में भगवान महावीर ने संन्यास लिया।

भगवान महावीर के बचपन का नाम था वर्धमान,
जन्म तिथि चैत्र शुक्ल त्रयोदशी पारंपरिक मान्यता।

भगवान महावीर ने बारह वर्ष कठोर तपस्या किया,
बयालीस की उम्र में ‘केवल ज्ञान’ प्राप्त कर लिया।

सत्य, अहिंसा, अचौर्य और ब्रह्मचर्य का पालन किया,
अपरिग्रह पंच महाव्रत का महावीर ने संदेश दिया।

अवसर्पिणी काल के चौबीसी के अंतिम थे तीर्थंकर,
अहिंसा सबसे उच्चतम गुण बताया महावीर तीर्थंकर।

‘जिओ और जीने दो’ का नारा लगाया स्वामी तीर्थंकर,
मतलब कि दूसरों के विचारों का सम्मान कर।

उन्हें अपने तरीके से जीने की स्वतंत्रता देनी चाहिए,
यही अहिंसा और सहिष्णुता का प्रतीक होनी चाहिए।

रिजपालिका नदी के तट पर केवल ज्ञान प्राप्त किया,
७२ वर्ष में कार्तिक कृष्ण अमावस्या मे निर्वाण लिया।

श्वेताम्बर परम्परा के अनुसार पत्नी नाम था यशोदा,
श्वेताम्बर परम्परा में ही पुत्री का नाम था प्रियदर्शना।

दिगम्बर जैन परम्परा में भगवान महावीर रहे ब्रह्मचारी,
भगवान महावीर तीर्थंकर अपने जीवन में रहे सदाचारी॥