ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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तेरे दरबार में लगा दी अर्जी,
सुने ना सुने, बाकी तेरी मर्जी।
सीता कहो या राम कहो,
राधा कहो या श्याम कहो।
सबकी सुनने वाले भोले,
चाहे वीर हनुमान कहो।
हमने तो सब सुना दिया,
दिल की व्यथा को बता दिया।
समझे या फिर ना समझे,
इसके आगे भोले तेरी मर्जी।
सबकी नैया पार लगाने वाले,
सबकी बिगड़ी बनाने वाले।
भटके को राह दिखाने वाले,
दुष्टों को सजा दिलाने वाले।
दुखियों का दु:ख हरने वाले,
संताप सबका मिटाने वाले।
मेरी भी आस लगाने वाले,
मेरी भी विपदा मिटाने वाले।
तेरे दरबार में लगा दी अर्जी,
सुने ना सुने, बाकी तेरी मर्जी॥