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धर्म-कर्म के पथ चलूं, दो वरदान

ममता साहू
कांकेर (छत्तीसगढ़)
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‘हनुमान जयंती’ विशेष…

राम नाम रटते सदा, हनुमत वीर महान।
रक्षा करते भक्त की , विघ्न हरण हनुमान॥

बाल्यकाल में ले लिया, मुख में अपने भान।
चारो दिस तम छा गया, घमासान दिनमान ॥

राम सिया हिय में बसे, राम नाम पहचान।
बूटी लाय बचा लिए, दसरत सुत के प्राण॥

संकट मोचन ही सदा, कहलाते हनुमान।
चालीसा के पाठ से, होते सकल निदान॥

पूजन वंदन नित करूं, और धरूं नित ध्यान।
धर्म-कर्म के पथ चलूं, दे दो यह वरदान॥