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निशा भास्कर की रचनाओं में समकालीन कविता का नया तेवर-सिद्धेश्वर

पटना (बिहार)।

महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा प्रवर्तित मुक्त छंद का मूल उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करना था, न कि काव्यात्मकता का लोप करना। जब नई पीढ़ी के रचनाकार पुनः छंद और लय की ओर उन्मुख होते दिखाई दे रहे हैं, तो यह हिंदी कविता के उज्ज्वल भविष्य का सकारात्मक संकेत है।
इसी सकारात्मक प्रवृत्ति का सशक्त उदाहरण कवयित्री निशा भास्कर की कविताएँ हैं। यह रचनाकार कविता के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय संभावनाओं के साथ उपस्थित है। निशा भास्कर की रचनाओं में समकालीन कविता का नया तेवर दिखाई देता है।
भारतीय युवा साहित्यकार परिषद के तत्वावधान में आभासी माध्यम से आयोजित कवि गोष्ठी में संस्था के अध्यक्ष व गोष्ठी संयोजक सिद्धेश्वर ने यह विचार व्यक्त किए।
अध्यक्षता करते हुए सुप्रसिद्ध कवयित्री निशा भास्कर ने प्रस्तुत कविताओं की सराहना करते हुए कहा कि समकालीन हिंदी कविता के परिदृश्य में जहाँ एक ओर मुक्तछंद का व्यापक विस्तार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर गीत, नवगीत और ग़ज़ल जैसी लयात्मक विधाओं की पुनर्वापसी अत्यंत महत्वपूर्ण और आश्वस्तकारी है।
इस अवसर पर निलेश अय्याची, निशा भास्कर, अनिता मिश्रा ‘सिद्धि’, सिद्धेश्वर, सुषमा मल्होत्रा (अमेरिका) आदि रचनाकारों की कविताएँ विशेष रूप से सराही गईं।
कार्यक्रम प्रभारी ‘सिद्धि’ ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।