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न्याय दर्शन के प्रणेता गौतम

ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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गौतम ऋषि दिवस (१९ मार्च) विशेष…

१९ मार्च को मनाते हैं गौतम ऋषि दिवस,
होती हैं धार्मिक झांकियाँ और दीपोत्सव।

ब्राम्हण ऋषि दीर्घ तमस के पुत्र थे गौतम,
न्याय दर्शन के प्रणेता सप्त ऋषियों में गौतम।

ऋषि गौतम ने रचना की ग्रंथ न्याय दर्शन,
ये तत्व ज्ञान का होता है जो इक साधन।

देवी अहिल्याबाई ब्रह्म की थी मानस पुत्री,
पूरे विश्व में थी वो नारी एक अद्वितीय सुंदरी।

गौतम ऋषि से विवाह हुआ नाम अहिल्याबाई,
जो फर्ज से अपने कभी भी ना घबराई।

इंद्र ने माया रचाई, तड़के मुर्गा बांग लगाए,
गौतम का रूप बना, अहिल्या संग वक्त बिताए।

तभी ऋषि गौतम ने आकर पत्नी से पूछा,
अभी यहाँ पर कौन आया था देवी अहिल्या ?

अहिल्याबाई ने झूठ कहा, ‘बिल्ली संग’ बता दिया।
गौतम ने झूठ पकड़ा, ‘बन जा सिला’ श्राप दिया।

गौतम अहिल्या की एक पुत्री थी अंजना,
माता अंजना के भी पुत्र हुए वीर हनुमंता।

जब अपमानित हुए वो सभी देवताओं से,
तब दीक्षा दी शुक्राचार्य को महर्षि गौतम ने॥

परिचय-कुमारी ममता साहित्य जगत में ‘ममता सिंह’ के नाम से संवेदनशील लेखिका एवं भजन गायिका के नाते सक्रिय हैं। जन्म १० जनवरी १९७६ को उत्तर प्रदेश के बकईनिया (गाजीपुर) में हुआ है। वर्तमान में झारखंड राज्य के महुदा (जिला धनबाद) में निवास, जबकि स्थायी पता वारिसलीगंज (बिहार) में है। उन्होंने बी.एस-सी. (वनस्पति शास्त्र), एम.ए. (साहित्य), बी.एड. और पीजीडीआरडी की उच्च शिक्षा प्राप्त की है, साथ ही सी-टेट. एवं एस-टेट. (बिहार) उत्तीर्ण हैं। वर्तमान में लखीसराय जिले (बिहार) में कृषि विभाग में कार्यरत ममता सिंह को हिन्दी और भोजपुरी भाषा का अच्छा ज्ञान है। साहित्य के प्रति गहरी रुचि होने से काव्य गोष्ठियों में सक्रिय उपस्थिति देकर कविता पाठ करती हैं। भजन गायन में भी निपुण हैं और यू-ट्यूब के माध्यम से श्रोताओं तक पहुँचाती हैं। इनकी लेखन विधा- कविता, निबंध और भजन प्रमुख हैं। उनकी रचनाएँ अनेक पत्र-पत्रिका सहित अन्य मंचों पर प्रकाशित हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य समाज में फैली बुराइयों को दूर करना, नैतिक मूल्यों को स्थापित करना और विचारों को जन-जन तक पहुँचाना है। वे रामधारी सिंह दिनकर, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा तथा सुभद्रा कुमारी चौहान को प्रिय लेखक मानती हैं। उनके प्रेरणापुंज चरित्र में महात्मा गांधी, मीराबाई और इंदिरा गांधी शामिल हैं। देश और हिन्दी भाषा के प्रति उनके विचार अत्यंत स्पष्ट हैं। देशहित के लिए समर्पित व्यक्तित्व के रूप में आप साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में निरंतर सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास कर रही हैं। वे मानती हैं, कि- “हिन्दी हमारी पहचान और धरोहर है, जिसका व्यापक प्रचार-प्रसार होना चाहिए।”