नागपुर (महाराष्ट्र)।
विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के उत्कर्ष सभागार में पावर ऑफ़ वन के सम्पादक नीरज श्रीवास्तव की अध्यक्षता में रामकृष्ण वि. सहस्रबुद्धे की पंचाक्षरी और सप्ताक्षरी की कृति ‘प्यार के धागे’ पर विस्तृत चर्चा का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार पूर्णिमा पाटिल, समीक्षक रूबी दास और व्यंग्य कवि अनिल मालोकर ने इसे नवाचार बताया l
यह आयोजन अविशा प्रकाशन और युगधारा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इस अवसर पर नीरज श्रीवास्तव ने पुस्तक चर्चा के महत्व को रेखांकित करते हुए समकालीन समाज की समस्याओं को उठाने का आग्रह किया।
इस कार्यक्रम का संयोजन अविनाश बागड़े का रहा। अतिथियों का परिचय मंजूषा किंजवडेकर ने दिया। अपने मनोगत में कवि रास ने इस सृजन को अपने मन में उठने वाले भावों की अभिव्यक्ति बताते हुए इसे काव्य की नयी विधा के रूप में निरूपित किया l
कार्यक्रम में सत्येंद्र प्रसाद सिंह, नरेन्द्र परिहार, रामेश्वर बंग, विजय वर्गीस व देवयानी बनर्जी आदि उपस्थित रहे l