गढ़वाल (उत्तराखंड)।
‘भारतीय ज्ञान परम्परा:साहित्य, समाज और पर्यटन का समन्वयात्मक अध्ययन’ विषय पर एक संपादित पुस्तक प्रकाशित किए जाने की योजना बनाई गई है। इस महती शैक्षणिक प्रयास को सफल बनाने में सभी के रचनात्मक सहयोग हेतु लेख भेजने की अंतिम तारीख ३१ मार्च २०२६ है।
प्रधान संपादक डॉ. मंजू कोगियाल एवं डॉ. आशीष कुमार (८९७९७६३२६६) ने बताया कि अधिकतम ३९ शोध-लेख प्रकाशित करने की योजना है (आईएसबीएन सहित)। वर्तमान समय में भारतीय ज्ञान परम्परा, साहित्यिक विमर्श, सामाजिक सरोकार तथा पर्यटन से जुड़े कईं वैचारिक विमर्श चर्चित हैं। इन्हीं समकालीन संदर्भों को ध्यान में रखते हुए प्रयास है कि विविध आयामों पर आधारित शोधपरक पुस्तक का संपादन किया जाए। पुस्तक में उप-विषयों (तथा उनसे संबद्ध अन्य शोधपरक आलेखों) पर लेख आमंत्रित हैं-भारतीय ज्ञान परम्परा की अवधारणा एवं दार्शनिक आधार, वैदिक, उपनिषदिक एवं गीता-दृष्टि में जीवन, समाज और कर्म, भारतीय साहित्य में ज्ञान परम्परा का विकास एवं निरंतरता, साहित्य के माध्यम से सामाजिक चेतना और नैतिक मूल्यों का प्रसार, भारतीय ज्ञान परम्परा और सांस्कृतिक पहचान, भारतीय समाज के निर्माण में साहित्य की भूमिका, भारतीय ज्ञान परम्परा और लोक-साहित्य, भारतीय ज्ञान परम्परा में प्रकृति, पर्यावरण और सतत विकास, भारतीय दर्शन और मानव-मूल्य आधारित सामाजिक संरचना, भारतीय ज्ञान परम्परा और पर्यटन का आपसी संबंध, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं धार्मिक पर्यटन में भारतीय ज्ञान परम्परा की भूमिका, साहित्यिक स्थलों एवं सांस्कृतिक धरोहरों का पर्यटन में योगदान, तीर्थ पर्यटन एवं आध्यात्मिक यात्राएँ: भारतीय परिप्रेक्ष्य, भारतीय ज्ञान परम्परा आधारित पर्यटन का सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव, भारतीय ज्ञान परंपरा और उत्तराखण्ड का लोक साहित्य, भक्तिकालीन साहित्य एवं भारतीय ज्ञान परम्परा का अंतर्संबंध, संत साहित्य:भारतीय ज्ञान परम्परा के विशेष संदर्भ में। उपर्युक्त विषयों से संबद्ध अन्य मौलिक शोध-लेख भी आमंत्रित हैं। आपके अनुसार आलेख हेतु किसी प्रकार का शुल्क देय नहीं है। चयन पूर्णत: गुणवत्ता के आधार पर किया जाएगा। लेख केवल ई-मेल (kogiyalmanju @gmail.com) पर भेजकर व्हाट्सएप संख्या पर सूचना अवश्य करें। यह शब्द-सीमा २५००-३००० तक हिंदी भाषा (देवनागरी लिपि) में ही भेजना हैं।