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प्रभु प्रेम

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’
सहारनपुर (उप्र)
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न तू सुख की बात कर, न तू दुःख की बात कर,
नाम प्रभु का ले के, बस तू दिन से रात कर।

किसी की निंदा, कटु वचन से मुक्ति तेरी रुक जाएगी,
क्षमा सभी को कर तू अपनी भक्त जात कर।

भजन ना हो पाए जो तुझसे भोजन, संग तेरा दूषित,
अंदर झांक के देख ज़रा तू खुद से बात कर।

साँस तेरी रुक जाएगी कब रे, इसका तुझको पता नहीं,
प्रभु सुमिर के मौत को, तू अपनी बारात कर।

कष्टों के बिस्तर पर सोकर भी जो प्रभु को भूले ना,
ऐसा भक्त बन प्रेमी बन, तू सबको मात कर।

भजन की नित-नित भूख बढ़े जब, प्रेम प्रभु से हो जाए,
श्रद्धा, प्रेम, भक्ति की प्रभु पर तू बरसात कर।

न तू सुख की बात कर, न तू दुःख की बात कर।
नाम प्रभु का ले के, बस तू दिन से रात कर॥