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मातम

राधा गोयल
नई दिल्ली
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चारों ओर सिर्फ सन्नाटा नहीं,
बल्कि एक ऐसा मातम पसरा है
जो चीखता है, रोता है
अपनों को खो देने के ग़म से बेहाल।
जले हुए शरीर,
पहचान के इंतज़ार में है उनके अपने
कांपते हाथों और डरे हुए दिलों के साथ,
डीएनए सैंपलिंग के लिए आ रहे हैं।

हर एक चेहरे पर बस एक ही सवाल-
“आख़िर हमारे अपनों ने क्या ग़लती की थी ?”
चेहरों की तलाश में आँखें थक चुकी हैं,
लेकिन वो पहचान नहीं पा रहे,
क्योंकि अब सिर्फ राख बची है
अब तक २६५+मौतें…
और हर मौत के पीछे एक अधूरी कहानी।

प्लेन का नाम लेते ही दिल दहल जाता है,
सूटकेसों में भरे थे ख्वाब
किसी की नौकरी की शुरुआत,
किसी की छुट्टी की खुशी
किसी की ज़िंदगी का नया मोड़…
किसे पता था, कि वो सपने आग में जल जाएंगे।

ये हादसा नहीं, ज़ख्म हैं,
जो कभी नहीं भर पाएंगे।
हे भगवान…।
इन टूटे हुए दिलों को हिम्मत देना,
आज रूह रो रही है॥