भोपाल (मप्र)।
यह संवेदनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक यथार्थ को स्वीकार करने वाली कहानी है। कथानक बुज़ुर्गों की विडम्बना पर आधारित है। कहानी में जीवन का दर्शन है। ठहरे हुए समय में जीवन कठिन हो जाता है, इसे बहने दो। यही भौतिकी में द्रव्य यांत्रिकी का सिद्धांत भी है।
मुख्य अतिथि डॉ. पद्मा शर्मा ने शिरीन भावसार की कहानी ‘लेमिनार फ्लो’ की समीक्षा करते हुए यह बात कही। अवसर रहा
अंतर्राष्ट्रीय विश्वमैत्री मंच के अभिनव आयोजन कहानी संवाद ‘दो कहानी-दो समीक्षक’ का, जो शुक्रवार की शाम को आभासी माध्यम से किया गया। इसकी अध्यक्षता कर रही मंच की संस्थापक अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव ने कहानी संवाद में पढ़ी गई दोनों कहानियों और की गई समीक्षाओं की सराहना की। आपने कहानी के सन्दर्भ में कहा कि दादी-नानी की कहानी सुनाने का युग लौट रहा है। स्टोरी टेलिंग के अब बहुत सारे माध्यम उपलब्ध हैं। यही कारण है, कि यह युवाओं के लिए एक नया करियर बनता जा रहा है। कहानी सुनाना भी एक कला है। यदि प्रस्तुतिकरण अच्छा न हो तो कहानी नीरस हो जाती है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. रानी श्रीवास्तव ने पुष्पा सिन्हा की कहानी ‘मेरा सब कुछ लुट गया’ की समीक्षा करते हुए कहा कि विषय समसामयिक एवं अंत बहुत ही मार्मिक है। इसे और विस्तार दिया जा सकता था। सबसे मजबूत पक्ष न्याय व्यवस्था है।
उपन्यासकार अनिता ‘रश्मि’ ने सभी का स्नेहिल स्वागत किया। संचालन मुज़फ्फर इक़बाल सिद्दीकी ने किया। रानी मोटवानी ने सभी का आत्मीय आभार व्यक्त किया।