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शक्ति और शौर्य की गाथा

नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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सूर्य को नमस्कार है,
उनकी शक्ति को नमस्कार है
शौर्य है शक्ति का पुरस्कार,
शक्ति दिखाए कौशल अपार, सूर्य फैलाए उजियारा सार
शक्ति के शौर्य पर टिका है धरती का सारा संसार।

वैसे ही शक्तिशाली सैनिक, जो शूरवीर कहलाते हैं,
युद्धभूमि में अपने शौर्य से विजय पताका फहराते हैं
तिरंगा लेकर हाथों में भारत माँ की गोद में सो जाते हैं,
वीर शहीद की माँ से पूछो, जो अपना बेटा खो देती है,
जब सूनी हो जाए कलाई, बहन फूट-फूटकर रो देती है।

महाभारत में अंगराज कर्ण की शक्ति भी धिक्कार है,
अभिमन्यु के शौर्य पर षड्यंत्रों का प्रहार है
यहाँ जीत गया अभिमन्यु, शक्ति की हुई हार है,
राणा के रक्त का कण-कण आज भी प्रखर हुंकार है।

चाहे हो राणा की शक्ति का शौर्य अपार,
चाहे रानी लक्ष्मीबाई की अद्भुत तलवार
करें वंदन शिवाजी के उत्कर्ष का विस्तार,
भारत माँ के स्वर में गूँजती उनकी जयकार।

जर्मनी से जापान तक गूँजा यह नाम,
‘नेताजी’ की रणनीति ने जगाया अभिमान
हर हिन्दुस्तानी के दिल में जगी प्रीत और जुनून,
उनकी शक्ति ने दिखाया आज़ादी का नूर।

शक्ति और शौर्य दोनों हैं एक-दूजे के आधार,
शौर्य जहाँ जन्मे, वहाँ शक्ति रहे साकार।
शक्ति के पथ पर साहस देता साथ हर बार,
शौर्य के बल पर असंभव भी हो जाए साकार।॥