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श्री रामदूत हनुमान

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’
धनबाद (झारखंड )
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‘हनुमान जयंती’ विशेष…

कलयुग में भी सदा अमर हैं भगवान रामदूत मेरे वीर हनुमान,
किष्किंधा, अंजनेरी, तिरुमाला, अंजनधाम, गोकर्ण है जन्म स्थान
बल, बुद्धि, विद्या, भक्ति, निःस्वार्थ सेवा के प्रतिमूर्ति हैं हनुमान,
गुरु हैं जिनके सूर्य देवता, जन्म है रुद्रावतार,हनुमंतदेव महान।

लाल फल की चाह में सूर्यदेव को निगल गए हनुमान,
इंद्रदेव के वज्र से घायल, उगल दिए सूरज को हनुमान
तब से नाम पड़ा जगत में, पवन पुत्र महावीर हनुमान,
शक्तिशाली, बड़े बलशाली देवों से पाए, अजेय वरदान।

वानर राज सुग्रीव प्रिय मित्र, श्री राम भक्त हनुमान,
माँ सीता की खोज में बड़े समुद्र को लाँघ गए हनुमान
लंका अशोक वाटिका उजाड़े, पहुँचे माँ सीता तक हनुमान,
स्वर्ण लंका को आग लगाई शक्तिशाली वीर हनुमान।

द्रोणागिरि पर्वत लिए हाथ उठाए जपत रहें सब जय हनुमान,
संजीवनी बूटी से लक्ष्मण जी के प्राण बचाए वैद्य जपे जय श्री हनुमान
रावण वध कर लौट के आए, प्रभु राम के सर्वोच्च भक्त बने हनुमान,
श्रीराम सेवक जब बन जाएं सिंदूर लाल संग लिपटे हनुमान।

जय जय महावीर, जय जय वीर हनुमान,
संकट मोचन, कृपा निधान, रामभक्त मेरे हनुमान।
भूत, पिशाच भय से मुक्त रखें सबको हनुमान,
जप वंदे तू राम का नाम, मिलेगा हनुमत शक्ति वरदान॥

परिचय-सिंदरी (धनबाद, झारखंड) में १४ दिसम्बर १९६४ को जन्मे आचार्य संजय सिंह का वर्तमान बसेरा सबलपुर (धनबाद) और स्थाई बक्सर (बिहार) में है। लेखन में ‘चन्दन’ नाम से पहचान रखने वाले संजय सिंह को भोजपुरी, संस्कृत, हिन्दी, खोरठा, बांग्ला, बनारसी सहित अंग्रेजी भाषा का भी ज्ञान है। इनकी शिक्षा-बीएस-सी, एमबीए (पावर प्रबंधन), डिप्लोमा (इलेक्ट्रिकल) व नेशनल अप्रेंटिसशिप (इंस्ट्रूमेंटेशन डिसिप्लिन) है। अवकाश प्राप्त (महाप्रबंधक) होकर आप सामाजिक कार्यकर्ता व रक्तदाता हैं तो साहित्यिक गतिविधि में भी सक्रियता से राष्ट्रीय संस्थापक-सामाजिक साहित्यिक जागरुकता मंच मुंबई (पंजी.), संस्थापक-संरक्षक-तानराज संगीत विद्यापीठ (नोएडा) एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता के.सी.एन. क्लब (मुम्बई) सहित अन्य संस्थाओं से बतौर पदाधिकारी जुड़े हैं, साथ ही पत्रकारिता का वर्षों का अनुभव है। आपकी लेखन विधा-गीत, कविता, कहानी, लघु कथा व लेख है। बहुत-सी रचनाएँ पत्र-पत्रिका में प्रकाशित हैं, साथ ही रचनाएँ ४ साझा संग्रह में हैं। ‘स्वर संग्राम’ (५१ कविताएँ) पुस्तक भी प्रकाशित है। सम्मान-पुरस्कार में आपको महात्मा बुद्ध सम्मान-२०२३, शब्द श्री सम्मान-२०२३, पर्यावरण रक्षक सम्मान-२०२३, श्रेष्ठ कवि सम्मान-२०२३ सहित अन्य मिले हैं तो विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में कई बार उपस्थिति, देश के नामचीन स्मृति शेष कवियों (मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, भारतेंदु हरिश्चंद्र आदि) के जन्म स्थान जाकर उनकी पांडुलिपि अंश प्राप्त करना है। श्री सिंह की लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी भाषा का उत्थान, राष्ट्रीय विचारों को जगाना, हिन्दी भाषा, राष्ट्र भाषा के साथ वास्तविक राजभाषा का दर्जा पाए, गरीबों की वेदना, संवेदना और अन्याय व भ्रष्टाचार पर प्रहार करना है। मुंशी प्रेमचंद, अटल बिहारी वाजपेयी, जयशंकर प्रसाद, भारतेंदु हरिश्चंद्र, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर, किशन चंदर और पं. दीनदयाल उपाध्याय को पसंदीदा हिन्दी लेखक मानने वाले ‘चंदन’ के लिए प्रेरणापुंज-पूज्य पिता जी, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, महात्मा गॉंधी, भगत सिंह, लोकनायक जय प्रकाश, बाला साहेब ठाकरे और डॉ. हेडगेवार हैं। आपकी विशेषज्ञता-साहित्य (काव्य), मंच संचालन और वक्ता की है। जीवन लक्ष्य-ईमानदारी, राष्ट्र भक्ति, अन्याय पर हर स्तर से प्रहार है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-“अपने ही देश में पराई है हिन्दी, अंग्रेजी से अंतिम लड़ाई है हिन्दी, अंग्रेजी ने तलवे दबाई है हिन्दी, मेरे ही दिल की अंगड़ाई है हिन्दी।”