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साहित्यकार सिद्धेश्वर के सम्मान में काव्य संध्या, पुस्तक विमोचित

दिल्ली।

सुप्रतिष्ठित लेखिका निशा भास्कर के आवास साधनगर, (दिल्ली) में विविध विधाओं के सर्जकों ने संध्या बेला को साहित्यिक आभा से आलोकित किया। गीत, ग़ज़ल, कविता और लघुकथा के कोमल शब्दों और भावों ने पूरे वातावरण को सुवासित कर दिया। सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार एवं समीक्षक डॉ. ओम निश्चल मिश्रा की अध्यक्षता में यह कार्यक्रम हुआ।
मुख्य अतिथि लेखक सुभाष नीरव ने आयोजन को विशिष्ट बनाया। उन्होंने लघुकथा के तत्वों की प्रभावशीलता और उसकी मारक क्षमता को रेखांकित करते हुए अपनी लघुकथाएँ ‘माँ की चिंता’ और ‘चिड़िया की दृष्टि’ उदाहरणस्वरूप प्रस्तुत कीं।
पटना से प्रसिद्ध साहित्यकार सिद्धेश्वर के सम्मान में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने अपनी ग़ज़लों और गीतों से चार चाँद लगा दिए। उन्होंने “मैंने जलती हुई लड़की पर लिखा है एक किस्सा, बात इतनी-सी है, अफ़साना बनाते क्यों हो ?” आदि रचनाओं से प्रभावित किया। आयोजन में सिद्धेश्वर के काव्य-संग्रह ‘शब्द हुए पंख’ का विमोचन डॉ. निश्चल, सुभाष नीरव, निशा भास्कर, शशिकांत भास्कर, सुधा मिश्रा और सरिता शौकीन ने किया। तत्पश्चात सुधा मिश्रा की ग़ज़ल ने भँवरों की गुनगुनाहट-सी वासंतिक अनुभूति कराई। सरिता शौकीन की कविता “देव, एक तलाश…” में “देव! सुनो ना…” की संबोधात्मक शैली ने हृदय के स्पंदनों को छू लिया। निशा भास्कर ने “मेरी जब याद तुम्हें आए, कोई किताब पढ़ लेना” जैसी रचनाओं से प्रेम की गहन अनुभूति को साकार किया। डॉ. मिश्रा ने अपनी ग़ज़लों से उत्कृष्ट साहित्यिक सौंदर्य का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की छोटी-छोटी गोष्ठियाँ ही साहित्य की वास्तविक धरोहर होती हैं, जहाँ सृजन के साथ-साथ समीक्षात्मक विचार-विमर्श होता है और रचनाकार कुछ न कुछ नया सीखकर लौटता है।
सफल संचालन निशा भास्कर ने किया। शशिकांत भास्कर ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।