दीप्ति खरे
मंडला (मध्यप्रदेश)
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महादेव शंभू त्रिपुरारी,
शीश चंद्र जटा गंगाधारी
ॐ नमः शिवाय का जाप करूं,
मैं शत शत तुम्हें प्रणाम करूं।
तुम हो आदि अनंत महादेवा,
कैलाश पर्वत पर है डेरा
गोद में गणपति संग में गौरा,
शत-शत तुम्हें प्रणाम करूं।
भस्मी रमाए अंग-अंग में,
डम-डम डमरू बाज रहा
हाथ त्रिशूल गले सर्पों की माला,
शत-शत तुम्हें प्रणाम करूं।
दुख की धूप में छाया बनकर,
सदा तुम साथ निभाते हो
दीनबंधु करुणा के सागर,
शत-शत तुम्हें प्रणाम करूं।
भक्तों के तुम सच्चे साथी,
दुःख हर लेते पल में आप।
श्रद्धा सुमन अर्पित चरणों में,
शत-शत तुम्हें प्रणाम करूं॥