सामाजिक सरोकार निर्मित करती है शील कौशिक की लघुकथाएं

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पटना (बिहार)। लघुकथा अपने सीमित कलेवर में व्यापक जीवन सत्य को अभिव्यक्त करने वाली सशक्त विधा है। कम शब्दों में गहरी संवेदना और सामाजिक यधार्थ को उकेरना ही इसकी मूल विशेषता है। सामान्यत: ‘जिद’ को सकारात्मक अर्थों में देखा जाता है, किंतु डॉ. शील कौशिक ने अपनी इस लघुकथा ‘जिद अच्छी है’ में जिद को … Read more

विष्णु के विविध अवतारों को समर्पित रही कल्पकथा काव्य गोष्ठी

सोनीपत (हरियाणा)। कल्पकथा परिवार की साप्ताहिक काव्य गोष्ठी (२३४) विषय ‘माघ पूर्णिमा एवं भगवान श्री हरि नारायण विष्णु के अवतार’ पर अत्यंत साहित्यिक वातावरण में सफलतापूर्वक हुई। यह आयोजन भक्ति, राष्ट्रभाव और साहित्यिक चेतना का अनुपम संगम सिद्ध हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि कवि अमित पण्डा ‘अमिट रोशनाई’ रहे।परिवार की संवाद प्रभारी ज्योतिसिंह ने बताया कि … Read more

अहंकार से मुक्ति और जिम्मेदारी का बोध कराती है माँ नर्मदा

‘नर्मदा साहित्य मंथन’… इंदौर (मप्र)। माँ नर्मदा नदी मनुष्य को अहंकार से मुक्ति दिलाने के साथ ही जिम्मेदारी का बोध भी कराती है। नर्मदा केवल एक शब्द नहीं है। जो नदी नर का मद यानी अहंकार हर ले, वही नर्मदा नदी है। यदि मनुष्य हो अपने अहंकार से मुक्ति चाहिए तो उसे नर्मदा नदी की … Read more

राष्ट्रीय कवि दरबार में चला शब्दों का जादू

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पटियाला (पंजाब) | स्वाभिमान साहित्यिक मंच (पटियाला) द्वारा ४१वें राष्ट्रीय कवि दरबार का आयोजन किया गया। इसने साहित्य प्रेमियों को शब्दों के अद्भुत संसार में डुबो दिया, जहाँ ग़ज़ल और कविता के खूब रंग दिखे।यह नरेश कुमार आष्टा के संयोजकत्व में हुआ। सिद्धेश्वर ने अध्यक्षता की। भारत के विभित्र राज्यों से आए साहित्यकारों ने इसमें … Read more

स्वबोध से ही भारत सोने का शेर बन सकेगा

🔹’नर्मदा साहित्य मंथन’ के पांचवे सोपान का केरल के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने किया उद्घाटन🔹देशभर के चिंतकों ने रखी हर सत्र में विषय पर अपनी बात 🔹विवि के मुख्य सभागार में शुभारंभ, पुस्तक मेला व प्रदर्शनी भी इंदौर (मप्र)। स्वबोध से ही भारत सोने का शेर बन सकेगा। आज भी कहा जाता है कि हमें … Read more

नाट्य-साहित्य के पुरोधा थे डॉ. चतुर्भुज, गीत-निर्झर थे विशुद्धानंद

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पटना (बिहार)। रेल में अधिकारी और आकाशवाणी में निदेशक रहे बिहार के महान रंगकर्मी डॉ. चतुर्भुज नाट्य-साहित्य के प्रणम्य पुरोधा थे। नाट्य-साहित्य को मंचन योग्य शिल्प देकर उन्होंने न केवल रंगमंच को समृद्ध किया, अपितु अपनी मोहक काव्य-कल्पनाओं से ऐतिहासिक नाटकों को विपुल समृद्धि प्रदान की। अपने नाटकों से उन्होंने यह भी सिद्ध किया कि … Read more

‘सागर से अंतरिक्ष तकःभारत की रक्षा क्रांति’ को मिला अकादमिक अनुदान

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नई दिल्ली। जब शब्द राष्ट्र की सुरक्षा और सामरिक स्वावलंबन की गाथा बन जाते हैं तो वे राष्ट्रीय चेतना का दस्तावेज कहलाते हैं। हिन्दी अकादमी, दिल्ली ने इसी चेतना को सम्मान देते हुए वरिष्ठ पत्रकार- लेखक योगेश कुमार गोयल की कृति ‘सागर से अंतरिक्ष तकःभारत की रक्षा क्रांति’ के लिए प्रकाशन अनुदान की घोषणा की … Read more

‘ग़ज़ल कुंभ-२०२६’ साहित्यिक उत्सव में पुस्तकें लोकार्पित

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पटना (बिहार)। ‘ग़ज़ल कुंभ-२०२६’ के अंतर्गत वाराणसी के पटेल भवन में अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक कार्यक्रम किया गया। प्रसिद्ध शायरा डॉ. पूनम सिन्हा ‘श्रेयसी’ (पटना) के ग़ज़ल संग्रह ‘चाक दामन’ और साहित्यकार राजकांता राज की पुस्तक (बाल ग़ज़ल संग्रह) ‘मेंढक बोला टर्र-टर्र-टर्र’ का भी लोकार्पण किया गया। इस कार्यक्रम के संयोजक प्रसिद्ध शायर दीक्षित दनकौरी रहे। अध्यक्षता … Read more

बसंतोत्सव में बही काव्यगंगा

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प्रयागराज (उप्र)। माघ मेला प्रयागराज में श्री देवराहा बाबा सेवाश्रम शिविर में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें देर रात तक काव्य गंगा प्रवाहित होती रही। सभी कवियों को अंगवस्त्र, श्री देवरहा बाबा साहित्य और सम्मान राशि देकर अभिनंदित किया गया।सेवाश्रम के संस्थापक श्री गुरुदेव भगवान की जन्म जयंती पर बसंतोत्सव पर डॉ. शंभूनाथ त्रिपाठी … Read more

पुस्तकें व्यक्तित्व के साथ चरित्र निर्माण का भी सशक्त माध्यम-प्रो. पाल

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कुरुक्षेत्र (हरियाणा)। पुस्तकें केवल जानकारी का स्रोत नहीं, बल्कि व्यक्तित्व एवं चरित्र निर्माण का सशक्त माध्यम भी हैं। आज के डिजिटल युग में भी पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है। साहित्य दर्शन, विज्ञान और सम-सामयिक विषयों से संबंधित पुस्तकों का भी अध्ययन करें, ताकि व्यापक और संतुलित दृष्टिकोण बन सके।यह विचार विवि के कुलसचिव … Read more