नाट्य-साहित्य के पुरोधा थे डॉ. चतुर्भुज, गीत-निर्झर थे विशुद्धानंद
पटना (बिहार)। रेल में अधिकारी और आकाशवाणी में निदेशक रहे बिहार के महान रंगकर्मी डॉ. चतुर्भुज नाट्य-साहित्य के प्रणम्य पुरोधा थे। नाट्य-साहित्य को मंचन योग्य शिल्प देकर उन्होंने न केवल रंगमंच को समृद्ध किया, अपितु अपनी मोहक काव्य-कल्पनाओं से ऐतिहासिक नाटकों को विपुल समृद्धि प्रदान की। अपने नाटकों से उन्होंने यह भी सिद्ध किया कि … Read more