कैसे बताऊँ मैं

एल.सी.जैदिया ‘जैदि’बीकानेर (राजस्थान)************************************ दर्द-ऐ-दिल,किस’को सुनाऊँ मैं,गुजर रहे हैं दिन,कैसे बताऊँ मैं। तन्हाइयों से तंग आ गया जनाब,हर बात,अब कैसे समझाऊँ मैं। मजे लोग लेंगे ये सोच चुप रहता,खुद का दिल खुद से बहलाऊँ मैं। दुनिया में मुझे गम,सभी ने दिऐ हैं,इल्जाम अब ये किस पे लगाऊँ मैं। कुरेद रहे हैं जख़्म जो बार-बार मेरे,बेरहम जख्मों … Read more

दीवारों में क्या घर रहता है

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** जब देखो तब हाथ में खंजर रहता है,उसके मन में कोई तो डर रहता है। चलती रहती है हर दम इक आँधी-सी,एक ही मौसम मेरे भीतर रहता है। गुजर रहे हैं बेचैनी में आईने,चैन से लेकिन हर इक पत्थर रहता है। तंग आ गया हूँ मैं इसकी बातों से,कौन है ये … Read more

ये कैसा जह़र घुला

एल.सी.जैदिया ‘जैदि’बीकानेर (राजस्थान)************************************ दिल रोता है आँसू मगर निकलता नहीं,कतरा,कतरा बहता है लहू दिखता नहीं। गम-ऐ-हाल कैसे जीते हैं लोग यहां पर,मरना चाहे अगर चैन से कोई मरता नहीं। चलती है साँसें रुह से उतर कर रुह तक,जिन्दा तो है मगर जिन्दा वो दिखता नहीं। कहने को तो अल्फाज़ लबों पर बहुत है,खौफ इतना है … Read more

बिन सोचे-विचारे

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* झूठ जुमले के सहारे चल रहे।आसमां भू पर उतारे चल रहे। मंज़िलों का कुछ नहीं उनको पता,आज बिन सोचे-विचारे चल रहे। हर तरफ़ है ज़ह्र आलूदा हवा,पर शजर पर रोज़ आरे चल रहे। हमनवा को जानते हरगिज़ नहीं,साथ लेकर चाँद-तारे चल रहे। है चरम पर जीत जाने का जुनूं,यूँ … Read more

कहानी और है

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* दौरे हाजिर की कहानी और है।शान-शौकत खानदानी और है। बहते दरिया की रवानी और है।सड़ते पानी की कहानी और है। कल की गुज़री ज़िन्दगानी और है।आजकल की कुछ कहानी और है। लीडरों की लनतरानी और है।लफ़्ज़ की खेती किसानी और है। मुँह से कहता हर घड़ी कुछ और ही,मन … Read more

किनारा भी नहीं है

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ दरिया है ये कैसा कि किनारा भी नहीं है,मझधार में तिनके का सहारा भी नहीं है। मुश्किल में मुझे छोड़ के मुँह फेरने वाले,ग़ैरत ने मेरी तुझको पुकारा भी नहीं है। घेरे हैं दिशाओं को निराशा के अँधेरे,आकाश पर आशा का सितारा भी नहीं हेै। मैं दर्द का आधार भला छोड़ दूं कैसे,जीने … Read more

मेरे प्यार का रंग

सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश)****************************************** रंग और हम(होली स्पर्धा विशेष )… लाख इंकार पे भी वो तेरे इक़रार का रंग,उम्र भर सुर्ख़ रहा जिससे मेरे प्यार का रंग। नाम अपना जो सुना तेरी ज़बाँ से तो हुआ,फीका आरिज़ के मुक़ाबिल गुल-ए-कचनार का रंग। याद है तुझको अचानक जो हुआ था इक दिन,मेरी साड़ी से … Read more

हमारे कर्म

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** रचनाशिल्प:क़ाफ़िया-अब,रदीफ़- क्या होगा,बहर १२२२,१२२२,१२१२,२२ हमारे कर्म का कोई हिसाब क्या होगा,कहीं लिक्खा नहीं है तो ज़वाब क्या होगा। गँवा दे चैन अपना देख कर सभी जिसको,उससे दिलकश़ कहीं कोई शब़ाब क्या होगा। छुपा के रक्खे जो शर्मो-हया को पर्दे में,इससे बढ़कर कहीं कोई हिजाब क्या होगा। किसी के काम आ जाये … Read more

रास्ते मिल गए

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* खुद ब खुद इश्क़ के रास्ते मिल गये।प्रेम के जब मुझे क़ाफिल मिल गये। सामने धुंध अज़हद घनी थी मगर,जब चले दो क़दम रास्ते मिल गये। ख़ूबसूरत ग़ज़ल सामने आ गयी,क़ाफ़िये जब मुझे बोलते मिल गये। जब ग़लत रास्ते पर चला दो क़दम,बाप-माँ तब वहाँ रोकते मिल गये। फूल … Read more

इंक़िलाब आने दो

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* कुछ तो अच्छा जनाब आने दो।नींद के साथ ख़्वाब आने दो। सब्ज़ परचम सदा रखो ऊँचा,अब नहीं इज़्तिराब आने दो। बन्द कर दो दुकानदारी सब,अब ज़रा इंक़िलाब आने दो। नफरतें नफरतें करें पैदा,हाथ में अब गुलाब आने दो। कुछ नहीं कम अभी परेशानी,मत नया अब अजाब आने दो। बात … Read more