जनतंत्र-वंदनम्
प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* लोकतंत्र जनराज का, है व्यापक आधार।नवयुग में नवचेतना, जनहित का आसार॥ लोकतंत्र का गान है, पलता है उल्लास।जीवन खिलने लग गया, है सुख का आभास॥ उगता सूरज नव हुआ, खिली सुकूं की धूप।जनता ही है अब प्रजा, जनता ही है भूप॥ हर कोई अधिकृत हुआ, मिले आज अधिकार।लोकतंत्र की हो रही, … Read more