जनतंत्र-वंदनम्

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* लोकतंत्र जनराज का, है व्यापक आधार।नवयुग में नवचेतना, जनहित का आसार॥ लोकतंत्र का गान है, पलता है उल्लास।जीवन खिलने लग गया, है सुख का आभास॥ उगता सूरज नव हुआ, खिली सुकूं की धूप।जनता ही है अब प्रजा, जनता ही है भूप॥ हर कोई अधिकृत हुआ, मिले आज अधिकार।लोकतंत्र की हो रही, … Read more

रहो निर्भीक

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* दुनिया से डरकर नहीं, बेचा कभी ज़मीर।जन गण मन की पीर को, खुलकर कहा कबीर॥ अंधभक्त सब मिल करें, इस मैटर पर शोध।मँहगाई का क्यूँ नहीं, करते आज विरोध॥ अपने बल आगे बढ़ो, बने रहो निर्भीक।दुनिया मुट्ठी में करो, सीख नयी तकनीक॥ जीवन में रखिए नहीं, कहीं ज़रा उलझाव।बड़ी … Read more

भारत का यशगान

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* शोभित,सुरभित,तेजमय,पावन अरु अभिराम।राष्ट्र हमारा मान है,लिए उच्च आयाम॥ राष्ट्र-वंदना मैं करूँ,करता हूँ यशगान।अनुपमेय,उत्कृष्ट है,भारत देश महान॥ नदियाँ,पर्वत,खेत,वन,सागर अरु मैदान।नैसर्गिक सौंदर्यमय,मेरा हिंदुस्तान॥ लिए एकता अति मधुर,गीता और कुरान।दीवाली-होली सुखद,एक्यभाव-पहचान॥ सारे जग में शान है,है प्रकीर्ण उजियार।राष्ट्र हमारा है प्रखर,परे करे अँधियार॥ मातु-पिता,गुरु,नारियाँ,पातीं नित सम्मान।संस्कार मम् राष्ट्र की,है चोखी पहचान॥ तीन रंग के … Read more

खिला प्रेम के फूल

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* इश्क़ नहीं आसान शै, पालो मत ये रोग।चार दिन की चाँदनी, जीवन भर का सोग॥ बनकर आना चाहती, हर औरत इक हूर।ब्यूटी पार्लर गर्ल से, लेकिन है मज़बूर॥ सद् विचार पूँजी बड़ी, माने ये संसार।ग़लत राह से रोकते, कम करते हैं खार॥ दिल को उपवन ले बना, खिला प्रेम … Read more

कान्हा कृष्ण मुरारी

ललित गर्गदिल्ली ************************************** अभिनंदन कान्हा जनम, विष्णु रूप अवतार।बालरूप लीला मधुर, शान्ति प्रेम रसधार॥ नंदलाल श्री कृष्ण भज, वासुदेव घनश्याम।कर्मवीर पथ सारथी, धर्म सत्य श्रीधाम॥ कन्हैया यशुमति लला, दामोदर गोपाल।लीलाधर षोडश कला, मोर मुकुट शुभ भाल॥ मनमोहन माधव मधुर, मन मुकुन्द अभिराम।गिरिधर नटवर बाँसुरी, पंचम स्वर सुखधाम॥ माखन मिसरी हाथ में, भोले माखनचोर।कृष्ण मुरारी चारुतम, … Read more

रखो मित्रता प्रेम से

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** यहाँ मित्रता तो बाग है, और मित्रता आग।रखो मित्रता प्रेम से, बने मित्रता राग॥ जोड़ नहीं है मित्रता, ये तो है बेजोड़।कुछ भी करना साथियों, इसका ना हो तोड़॥ यही ईश उपकार है, रखो सदा विश्वास।करना ना तुम छल कभी, ना तोड़ो तुम आस॥ रिश्ता दूजा है नहीं, ये तो है अनमोल।भूल … Read more

आराधन गिरधर का

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) *********************************************** श्रीकृष्ण जन्माष्टमी विशेष… हे अर्जुन के सारथी, हे गिरिधर गोपाल।नंदलाल यशुमति लला,राधा प्रीत निहाल॥ कृष्ण लाल प्रिय राधिका, प्रथम प्रीत मनमीत।युवा वयसि सखि रुक्मिणी, कहाँ मुरलिया गीत॥ तुम से तुम का मधु सफ़र, राधा मोहन प्रीत।तरसी मुरली श्रवण को, मुरलीधर संगीत॥ नवयौवन केशव वयस, शौर्य नीति रत योग।धर्म न्याय … Read more

राष्ट्रशक्ति अभिमान

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) *********************************************** अपना सम्मान तिरंगा…. भारत घर-घर तिरंगा, शान-बान-अभिमान।जन मन गण गाऍं वतन, राष्ट्र धर्म सम्मान॥ गुरु मानस हो पूत सम, शिष्य बने अभिमान।बिना भेद सब जन सुलभ, ज्ञान मिले वरदान॥ जन-मन अभिवन्दन सदा,लोकतंत्र अभिमान।संविधान करवा रहा, लोक स्वस्ति का भान॥ जननी जन्मभूमि उभय, पावन दें सम्मान।पर माता से श्रेष्ठ है, … Read more

अमर तिरंगा शान

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* अपना सम्मान तिरंगा…. आन-बान है हिंद की, और यही ईमान।अमर तिरंगा शान है, भारत की पहचान॥ लहर-लहर लहरायगा, ये ऊंचे आकास।तीन रंग का मेल है, इसे बनाता खास॥ केसरिया कहता सदा, हिंद रहे खुशहाल।श्वेत शांति देता हमें, हरित हरा हर हाल॥ शोभित अशोक चक्र ये, सदा बढ़ाता मान।नित्य कराता है हमें, … Read more

अनुबन्धों में हैं रिश्तों के आयाम

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* राखी की फैली महक, बँध जाने के बाद।रक्षा की थी बात जो, फिर से वह आबाद॥ नेहभाव पुलकित हुए, पुष्पित है अनुराग।टीका,रोली,आरती, सचमुच में बेदाग॥ मीलों चलकर आ गया, इक पल में तो पर्व।संस्कार मुस्का रहे, मूल्य कर रहे गर्व॥ अनुबंधों में हैं बँधे, रिश्तों के आयाम।मानो तो बस हैं यहीं, … Read more