वक़्त तय करता

कल्याण सिंह राजपूत ‘केसर’देवास (मध्यप्रदेश)******************************************************* वक़्त-वक़्त की बात है,किससे, कब,कहाँ, मिलना है,ये वक़्त तय करता है।हम सब तो हाड़-माँस केपुतले हैं,साँसें कितनी…ये तो वक्त तय करता है। ये वक़्त ही है जिसने कई,राजाओं को रंक बनाया हैकई सम्राट व शहंशाहों,को झुकाया हैरावण हो या कंस,सभी को मिट्टी में मिलाया हैक्या दानव क्या मानव !सभी को … Read more

अब अन्तरिक्ष भ्रमण करती हैं बेटियाँ

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ टुकड़ों-टुकड़ों में कभी जीती थी बेटियाँ,किसी कोने में चुपचाप रोटियाँ बेलती थी बेटियाँ। अपनी आँसुओं को चुपचाप पीती थी बेटियाँ,अनजाने रिश्तों में बांध दी जाती थी बेटियाँ। जमाना बदल गया है, अब तो साइकिल से,खिलखिलाते हर गली-मुहल्लों से निकल स्कूल-कालेज जाती है बेटियाँ। कभी गुमसुम, आँचल में डरी रहने वाली,अब अन्तरिक्ष भेद … Read more

वर्तमान में नारी

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** नारी आज रिश्तों में तो बंधती है,पर स्वतंत्र उड़ान का स्वप्न भूलती नहीं। वह त्याग तो करती है,पर स्वयं को मिटाती नहीं। वह प्रेम तो करती है,पर अपने अस्तित्व की कीमत पर नहीं। वह हर कदम पर प्रश्न तो करती है,पर मौन शिक्षा स्वीकार करती नहीं। वह लिखती और बोलती तो है,पर … Read more

आनंद बाँटने आया

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* सांता क्लॉज आया है,खुशियाँ भरकर लाया है। लाल-सफेद वस्त्रों वाला,सफेद दाढ़ी बालों वालादेखो बाबा आया है,सांता क्लॉज आया है। बच्चों को वह लगता प्यारा,सबकी आँखों का है ताराआनंद बाँटने आया है,सांता क्लॉज आया है। कंधे पर झोली लटकाए,लाखों खुशियाँ भरकर लायेमन को वह तो भाया है,सांता क्लॉज आया है। … Read more

साहिबज़ादा की शहादत

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मासूम थे दो नन्हें, पर वक्ष हिमालय-सा,धर्म-पथ पर अडिग रहना, था प्रण प्रलयालय-सा। दीवारों में चिनवा कर भी, झुके नहीं वे प्यारे,इतिहास लिख गए अमर, बन कर ज्वाला अंगारे। डर जिनकी आँखों से भी, दूर खड़ा काँप गया,अधर्म का किला सारा, मौन खड़ा थर्रा गया। बाल हृदयों में बसता, … Read more

‘भारत रत्न’ गोविंद बल्लभ पंत

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )****************************************************** अल्मोड़ा के खूंट में जन्मे पं. बल्लभ पंत,पिता मनोरथ थे, माता गोविन्दी बाई पंतमहान स्वतंत्रता सेनानी व राजनेता जैसे संत,प्रारंभिक शिक्षा अल्मोड़ा से पाए पं. गोविंद पंत। इलाहाबाद से वकालत हासिल कर आगे बढ़े थे पंत,स्वतंत्रता, असहयोग आंदोलन, सत्याग्रह की भूमिका रही अनंतसाइमन कमीशन बहिष्कार में हुए जेल में … Read more

वह जो अनकहा रह गया

डॉ. विद्या ‘सौम्य’प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)************************************************ मैं ढूँढती हूँ…वजूद अपना अक्सर,चूल्हे की धुआँधार आँखों में,खिड़की से झाँकती, एक टुकड़ा धूप मेंजैसे मेरे हिस्से की, बस इतनी ही उमर है। मैं सहती हूँ…कभी शब्दों की तीखी मार,कभी खामोशियों का भारी विस्तारमैंने सिला है होंठों को हर उस मोड़ पर,जहाँ सवाल उठाना भी वर्जित है। मैं सोचती हूँ…पैरों … Read more

कवि हृदय

बबीता प्रजापति झाँसी (उत्तरप्रदेश)****************************************** संवेदना है,वेदना हैशब्दों की बौछार है,कवि हृदय को सदा-सर्वदाशब्दों से ही प्यार है। प्रेम है,हृदय हैसो फूलों में पराग है,जग में इनके बिनाविरक्ति हैवैराग है…। स्वप्न है,कल्पना हैइनका अपना लोक है,जग में बाहर क्या धरा ?दु:ख है या शोक है…। गहन निशा हो,या साँझ होसब इनको स्वीकार है।भोर का वंदनललाट चंदन,प्रातः का … Read more

धूल धूसरित धरा आभूषण

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )****************************************************** पूरे देश-में छाया सफेद धुआँ, धुंधला-धुंध,पर्यावरण प्रदूषित हुआ, गंदी है ओस की बूँदबादल में जकड़े सूर्यदेव ने आँखें ली है मूंद,तरसता जन जीवन, त्राहिमाम पेड़ पौधे, कुमुद। न कुहरा छँटा, न बादल फटा, न सूरज में है तेज,शीत लहर के ठण्ड कहर में डूबा मानव निस्तेजभीषण ठण्ड में, शीतलहर … Read more

एकांत में ही भक्ति

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** हिलाने-डुलाने से दही नहीं जमता,एकांत में ही मन प्रभु भक्ति रमता। ज्ञान, भक्ति, कर्म प्रभु-कृपा से मिल जाते जब,मिट जाती सारी जीवन में अहमता। रूप, धन का दबदबा प्रभु-भक्ति मिटा देता है,भोगचक्र फंस तू हर योनि में जनमता। खिल्ली उड़ा-उड़ा के खुश हों जो ग्रंथ, संत,आ जाती उनके जीवन … Read more