ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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ठंडा-ठंडा, कूल-कूल,
सब बातों को जाओ भूल।
गर्मी आई, प्यास बढ़ाई,
पियो शर्बत, कुल्फी आई।
तरबूजा-खरबूजा, खीरा-ककड़ी,
धनिया, पुदीना लाते ठंडाई।
नींबू पानी, दही और लस्सी,
कोकाकोला, माजा, पेप्सी।
सबमें आए है बड़ा मजा,
जब मिलकर पीते रूह-आफजा।
कोई पीता शर्बत बेल और गन्ना,
कोई पीता आम का पन्ना।
नीता, रीता, सीता, शीला,
पिकनिक जाते कश्मीर ठंडीला।
बर्फ की वर्षा रिमझिम-रिमझिम,
रातों में झिलमिल-झिलमिल।
चेहरे पर ओढ़कर दुपट्टा,
नीला, पीला, हरा दुपट्टा।
गर्मियों में कड़ी धूप चिलचिलाए,
चेहरे पर पसीना लथपथ आए।
कूलर, पंखा, ए.सी. फेल,
जब चलती लू की रेल॥