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ज़िंदगी एक किताब

नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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ज़िंदगी स्वयं की लिखी एक अनूठी किताब,
प्रत्येक दिन हम संघर्ष करते
हर दिन एक नया पृष्ठ जोड़ते जाते,
हर पृष्ठ अपनी-अपनी दास्तान सुनाते।

कोई खुशियों का उपहार लाता,
कोई दुखों का पहाड़ लाता
कुछ दिल के टूटे अरमान, ख़्वाहिशें लाता,
कुछ पृष्ठ बहुत सारी यादें, नए अनुभव को लाता।

ज़िंदगी की किताब कभी दर्द,
कभी वेदना, कभी खुशियाँ लाती,
यह संघर्षों, भावनाओं और सच्चाइयों को व्यक्त करती,
दिल को छू जाती और आँसू बहाती।

यह प्यार, मुहब्बत, हार-जीत, सुख-दुखों को भी दर्शाती,
जीवन का नया नज़रिया बताती।
हर अध्याय जिन्दगी का,
जीने की कला सिखाता।

ज़िंदगी की एक किताब हैं हम,
जिसे हँसी-खुशी रोज़ाना जीते।
मैं खुश हूँ, अच्छी गुज़र गई,
वरना तो अनेक लोग रोते॥