दिल्ली।
तथ्य अनंत हो सकते हैं, किंतु वास्तविक तथ्यों की यात्रा को सत्य की परिणति तक पहुँचाना ही शोध का अभीष्ट है। तथ्यों की यात्रा को सत्य की परिणति तक पहुँचाना ही शोध है।
यह विचार ‘वाङ्मय विमर्श’ द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला श्रृंखला की पाँचवीं कड़ी में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रख्यात विद्वान प्रो. हरीश अरोड़ा ने ‘शोध प्रविधि और प्रक्रिया’ विषय पर मुख्य वक्ता के नाते व्यक्त किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ शुभम शास्त्री द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। वाङ्मय विमर्श के संरक्षक डॉ. राजकुमार उपाध्याय ‘मणि’ ने स्वागत वक्तव्य में इस प्रकल्प के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। ‘मणि’ ने मुख्य वक्ता प्रो. अरोड़ा का अभिनंदन किया।
कार्यक्रम का सुस्पष्ट संचालन साक्षी सिंह ने किया। सत्र समापन पर हंसिका ने सभी के प्रति औपचारिक धन्यवाद व्यक्त किया।