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नारी शक्ति, शिवा स्वरूपा

सरोज प्रजापति ‘सरोज’
मंडी (हिमाचल प्रदेश)
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नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता….

नारी सृष्टि का संचार, नारी सृष्टि का आधार
नारी सब रिश्तों का भण्डार, नारी बिन सूना संसार
नारी जननी नारी धरणी, नारी से सब शोभायमान,
नारी मूर्त प्रेम व्यवहार, नारी धरती का श्रृंगार।

नारी करूणा नारी अपर्णा, नारी धूप, ठंडी छाँव,
नारी माँ नारी भगिनी, नारी कोमल, घाव सहलाव
सहचरी सहधर्मिणी, सहभागी सुख- दुःख समाज,
नारी बेटी, हृदय वास, नारी सब नाते संभार।

सजल नयन की धारा, वात्सल्य की नदी अपार,
नारी रौनक घर-आँगन, नारी चहके खुशियाँ अपार
नारी बगिया दमके बहार, नारी फूल, खूशबू अपार,
नारी साम्राज्य नभ-धरा, विस्तार विहार अपार।

नारी दादी, नानी प्यारी, दादी-नानी की कहानी निराली,
ममता लुटाती भर-भर आँचल, अंक निष्प्रिय सहाय सदा
संस्कार, आचार;विचार सौम्य, सृष्टि जननी सुरक्षा सहाय,
लोक मंगल,दुर्गा भवानी, काली वनिता प्रमदा।

घर की रीढ़ समर्पण की मूर्त, कर्तव्य बोध परायणता,
शक्ति पुंज शिवा स्वरूपा, सुपर वूमेन, कर्मठता।
निर्मल मन गृह अधिनायक, धरा-सी शीतल सौम्या,
नमन सदा हे! रमणी, हर दिन मनाएं उत्सव काम्या॥

परिचय-सरोज कुमारी लेखन संसार में सरोज प्रजापति ‘सरोज’ नाम से जानी जाती हैं। २० सितम्बर (१९८०) को हिमाचल प्रदेश में जन्मीं और वर्तमान में स्थाई निवास जिला मण्डी (हिमाचल प्रदेश) है। इनको हिन्दी भाषा का ज्ञान है। लेखन विधा-पद्य-गद्य है। परास्नातक तक शिक्षित व नौकरी करती हैं। ‘सरोज’ के पसंदीदा हिन्दी लेखक- मैथिली शरण गुप्त, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा हैं। जीवन लक्ष्य-लेखन ही है।