कुल पृष्ठ दर्शन : 2

पुण्यदायी है माँ नर्मदा

ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
*****************************************

पवित्रता और अध्यात्म की पर्याय है देवी नर्मदा,
और कभी रेवा माई भी बन जाती है देवी नर्मदा।

हिन्दू धर्म में नर्मदा माता, रूप में पूजी जाती है,
गंगा समान ही वो भी, पवित्र समझी जाती है।

अमरकंटक से निकल, पश्चिम ओर बढ़ जाती है,
मात्र दर्शन से भी पुण्य, सभी को दे जाती है।

विंध्याचल और सतपपुड़ा पर्वतमाला का संगम,
जिला अनुपपुर मध्यप्रदेश स्थान अमरकंटक।

शंकर कन्या भी कही, जाती है देवी नर्मदा,
नर्मदेश्वर भी कही जाती, है हमारी मैया नर्मदा।

नर्मदा तट पर तपस्या, की थी ऋषि भृगु ने,
खुश हो दिया वरदान, शिव रूप हर कंकड़ में।

देवी नर्मदा की सवारी, माना जाता है मगरमच्छ,
जिसने कभी नहीं दिया, किसी भी भक्त को कष्ट।

अरब सागर में जाकर मिल, जाती है देवी नर्मदा,
आजीवन वो कुँवारी रह गई, हमारी माता नर्मदा।

सोनभद्र से रिश्ता जब, तय हुआ था उसका
धोखा मिला था तब, जोहिला दासी से उसको।

मिली धोखे से उल्टी धारा, बहाती है देवी नर्मदा।
अरब सागर में जाकर मिल, जाती है देवी नर्मदा।

जगत गुरु शंकराचार्य ने, लिखा नर्मदाष्ट्क सम्मान में,
हमने भी कुछ योगदान दिल से, दिया उनके सम्मान में।

माना जाता है शिव के पसीने से उत्पन्न देवी नर्मदा,
दीन-हीन की झोली खुशियों से भर देती देवी नर्मदा॥

परिचय-कुमारी ममता साहित्य जगत में ‘ममता सिंह’ के नाम से संवेदनशील लेखिका एवं भजन गायिका के नाते सक्रिय हैं। जन्म १० जनवरी १९७६ को उत्तर प्रदेश के बकईनिया (गाजीपुर) में हुआ है। वर्तमान में झारखंड राज्य के महुदा (जिला धनबाद) में निवास, जबकि स्थायी पता वारिसलीगंज (बिहार) में है। उन्होंने बी.एस-सी. (वनस्पति शास्त्र), एम.ए. (साहित्य), बी.एड. और पीजीडीआरडी की उच्च शिक्षा प्राप्त की है, साथ ही सी-टेट. एवं एस-टेट. (बिहार) उत्तीर्ण हैं। वर्तमान में लखीसराय जिले (बिहार) में कृषि विभाग में कार्यरत ममता सिंह को हिन्दी और भोजपुरी भाषा का अच्छा ज्ञान है। साहित्य के प्रति गहरी रुचि होने से काव्य गोष्ठियों में सक्रिय उपस्थिति देकर कविता पाठ करती हैं। भजन गायन में भी निपुण हैं और यू-ट्यूब के माध्यम से श्रोताओं तक पहुँचाती हैं। इनकी लेखन विधा- कविता, निबंध और भजन प्रमुख हैं। उनकी रचनाएँ अनेक पत्र-पत्रिका सहित अन्य मंचों पर प्रकाशित हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य समाज में फैली बुराइयों को दूर करना, नैतिक मूल्यों को स्थापित करना और विचारों को जन-जन तक पहुँचाना है। वे रामधारी सिंह दिनकर, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा तथा सुभद्रा कुमारी चौहान को प्रिय लेखक मानती हैं। उनके प्रेरणापुंज चरित्र में महात्मा गांधी, मीराबाई और इंदिरा गांधी शामिल हैं। देश और हिन्दी भाषा के प्रति उनके विचार अत्यंत स्पष्ट हैं। देशहित के लिए समर्पित व्यक्तित्व के रूप में आप साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में निरंतर सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास कर रही हैं। वे मानती हैं, कि- “हिन्दी हमारी पहचान और धरोहर है, जिसका व्यापक प्रचार-प्रसार होना चाहिए।”