अजय जैन ‘विकल्प’
इंदौर (मध्यप्रदेश)
*****************************************
बड़ी ही प्यारी लगती है रानी तितली,
उड़ती-फिरती, करे मनमानी तितली।
लाल, गुलाबी, पीले पंख की सुंदर तितली,
कहीं ना रूकती, रंग-बिरंगी तितली।
फूलों पर है हरदम मंडराती तितली,
कभी यहाँ-कभी वहाँ जाती तितली।
फूलों का मीठा रस पी जाती तितली,
बागों में सुंदरता फैलाती तितली।
छोटे-छोटे पंख हिलाती तितली,
सबके मन को खूब लुभाए तितली।
इधर से उधर उड़ती जाए तितली,
हमको भी पीछे-पीछे दौड़ाए तितली।
हाथों में कभी न आए तितली,
पलभर में उड़ जाती तितली।
ईश्वर की अनुपम रचना है तितली,
बताओ ? किसने रंग भरे तितली।
आनंद व परिवर्तन सिखलाती तितली,
आजादी व निडरता बताती तितली।
बच्चों की प्यारी दोस्त है तितली,
हरपल खुशियों का दे संदेश तितली॥