गाजियाबाद (उप्र)।
‘पेड़ों की छाँव तले रचना पाठ’ की साहित्यिक गोष्ठियों में मैं कई वर्षों से शामिल हूँ और हरे-भरे पार्क के अंदर प्राकृतिक वातावरण में घास के ऊपर भूमि पर बैठ कर काव्य पाठ का आनंद लिया है। बच्चों को साहित्य के प्रति उनकी रुचि और उत्साह को बढ़ाने वाले ‘बाल रचना पाठ एवं लेखन प्रतियोगिता’ एक अनुकरणीय पहल है, जो संस्था १० वर्षों से नियमित कर रही है ।
साहित्य अकादमी पुरस्कार से पुरस्कृत प्रख्यात बाल साहित्यकार दिविक रमेश ने मुख्य अतिथि के रूप में यह बात प्रथम ‘एनसीआर लिटरेरी फ़ेस्टिवल-२० २६’ की एक दशकीय काव्य यात्रा पर्व पर कही। पेड़ों की छाँव तले फाउंडेशन के तत्वावधान में ‘एक दशकीय काव्य यात्रा पर्व’ गाजियाबाद स्थित शंभू दयाल डिग्री कालेज में मनाया गया।
प्रख्यात लेखिका ममता कालिया ने इसमें विशिष्ट अतिथि के रूप में लेखकों से संस्मरण पर जोर देने की सलाह दी, जिसे आज प्रकाशक वरीयता दे रहे हैं। आपने कहा कि साहित्य सृजन में सरोकार का महत्व सबसे बड़ा है। विधाएं कुछ भी क्यों न रहें, आपकी अनुभूतियाँ सृजन का प्रधान पक्ष है जबकि भाषा उसके प्रभाव को बढ़ाती है। हमें अपने लेखन में क्षेत्रीयता का समावेश रखना चाहिए।
अध्यक्ष एवं संयोजक अवधेश सिंह ने बताया कि ३ सत्र में विभाजित इस आयोजन की थीम ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हिन्दी भाषा’, ‘साहित्य – कला – संस्कृति’ एवं ‘मीडिया की वर्तमान स्थिति एवं चुनौतियाँ’, थी जिस पर प्रसिद्ध वीरेंद्र सिंह आस्तिक, आलोचक कमलेश भट्ट ‘कमल’ एवं संपादक अशोक मिश्र ने साहित्यिक विमर्श में वक्तव्य दिए। इस सत्र का आभार प्रदर्शन कालेज की प्राचार्या रोचना मित्तल द्वारा किया गया।
इस अवसर पर काव्य संग्रह ‘एक दशकीय कविता विमर्श’ (संपादक अवधेश सिंह), ‘साझा संसार’ (जेन्नी शबनम) एवं लघुकथा-कहानी की २ पुस्तक ‘नोट की मौत’ एवं ‘अस्पताल’ (सुरेन्द्र अरोरा) का चर्चा के साथ लोकार्पण किया गया। पत्रिका ‘बुलंद प्रभा’ के विशेष अंक ‘डॉ. अश्वघोष श्रद्धांजलि विशेषांक’ का लोकार्पण उपसंपादिका मधु वार्ष्णेय के माध्यम से किया गया।
तीसरे सत्र में सरस काव्य पाठ हुआ, जिसमें २४ से ज्यादा कवि एवं कवयित्रियों ने पाठ किया। संचालन संस्था के अध्यक्ष अवधेश सिंह ‘बंधुवर’ के साथ ठाकुर प्रसाद चौबे पूनम सिंह तथा रघुवीर शर्मा ने किया।