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रोटी का अपना मान

हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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भूख में दो रोटी
बहुत होती है,
जब भी मिल जाए
आत्मा ‘तृप्त’ कर देती है,
रोटी का मोल जानो रे भाई
इसे खाने दो हमको,
चाय हो या दूध या फिर सब्जी, दाल
रोटी का अपना मान है।

बचपन हो या बुढ़ापा
चाय के साथ रोटी,
चाहे ताजी हो या बासी
रोटी का अपना मान है,
भूख में तो सूखी ‘रोटी’ भी
अनमोल हो जाती है,
संसार की संरचना इस पर ही निर्भर है।
मनुष्य के लिए महत्वपूर्ण है रोटी,
क्योंकि रोटी का अपना मान है॥